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Monday, October 5, 2015

वास्तु ज्ञान :Vastu Knowledge

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Thursday, October 9, 2014

बिना तोड़- फोड़:घर का वास्तु: Bina tour phor ka Vastu

बिना तोड़- फोड़:घर का  वास्तु
दक्षिण में सिर करके सोना: स्वस्थ और दीर्घायु ।
पति पत्नी का सुंदर सा फोटो :शयन  कक्ष में लगाएं।
इससे दाम्पत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी  , कलह में कमी आएगी।
घर में नित्य घी का दीपक: जलाना चाहिए।
रात्रि के समय शयन कक्ष :कपूर जलाने से बीमारियां, दुःस्वपन , पितृ दोष का नाश,।
 में कोई बीमार हो जाए: रोगी को शहद में चन्दन ,गंगाजल मिला कर चटाएं।
पत्नी बीमार हो तो: घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखभाल करे ।
पूर्व या दक्षिण दिशा: सिर रख कर ही सोना चाहिए।
घर से बीमारी जाने का नाम न ले रही ह:एक गोमती चक्र ले कर उसे हांडी में पिरो कर रोगी के पलंग के पाये पर बांधने देने से  रोग समाप्त होना शुरू हो जाता है।
शनिवार को खाने में किसी भी रूप में काला चना अवश्य ले लिया करें।
 संध्या समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध है।  इससे धन का क्षय होता है।
भोजन सदैव :पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर के करना चाहिए।
सोईघर में ही बैठकर भोजन :राहु शांत होता है।
 घर में देवी-देवताओं पर चढ़ाये गये फूल या हार: सूख जाने पर भी उन्हें घर में नही रखना है ।
 पवित्र नदियों का जल संग्रह घर के ईशान कोण में रखने से अधिक लाभ होता है।
घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए : कुत्ते को दूध दें, अपने कमरे में मोर का पंख रखें।
हनुमान जी की आरती करें। अनिष्ट दूर   होगा और धन भी प्राप्त   होगा ।
हनुमान जी के मन्दिर में:एक नारियल पर सिन्दूर, मोली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें। फिर  चढ़ा आएं। धन लाभ होगा।
पीपल के वृक्ष की जड़ में तेल का दीपक जला दें। धन लाभ होना।
प्रातःकाल पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाए, तथा अपनी सफलता की मनोकामना करें।  घर से बाहर निकलते समय दाहिना पाँव पहले बाहर निकालें।
 रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए : गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें `जय गणेश काटो कलेश´।
शनिवार को खाने में किसी भी रूप में काला चना अवश्य ले लिया करें।
  तुलसी का पौधा : तुलसी के पत्तों के नियमित सेवन से कई रोगों से मुक्ति मिलती है।
 ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) : साफ-सुथरा रखें ,सूर्य की  किरणें घर में प्रवेश करे ।
भोजन बनाते समय गृहिणी : मुख पूर्व की ओर ।
 पूर्व की ओर मुख करके भोजन करने से: व्यक्ति की पाचन शक्ति में वृद्धि ।
 बच्चे  पूर्व की ओर मुख करके अध्ययन करना चाहिए करने से लाभ होगा।
 कन्याओं के विवाह में विलम्ब: वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) के कमरे में सोना चाहिए, विवाह अच्छे और समृद्ध परिवार में होता  है ।
 उत्तर दिशा की ओर सिर करके नहीं सोना : अनिद्रा रोग होने की संभावना होती है।
 घर में नमक के पानी से पोंछा लगाने से  नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
 माता-पिता को  प्रणाम करना से  बृहस्पति और बुध ठीक होते हैं।
प्रवेश द्वार : स्वच्छ होगा घर में लक्ष्मी आती है।
प्रवेश द्वार: स्वस्तिक, ॐ, शुभ-लाभ जैसे मांगलिक चिह्नों को लगाना  चाहिए।
विवाह पत्रिका : न फाड़े क्योंकि इससे गुरु और मंगल का दोष लगता है।
 घर में देवी-देवताओं की  तस्वीरें : शयन कक्ष में  न रखे ।
शयन कक्ष: टेलीविजन न रखें , शारीरिक क्षमताओं पर असर पड़ता है।
 दफ्तर में काम करते समय: उत्तर-पूर्व की ओर मुख करके बैठें ,,बॉस (कार्यालय प्रमुख) का केबिन नैऋत्य कोण में रखना चाहिए।
 शंख :बजाने से  रोगाणु नष्ट होते हैं।
पक्षियों को दाना खिलाने ,गाय को रोटी और चारा खिलाने, से गृह दोष कम  होते है।
पूर्व दिशा :  संपत्ति और तिजोरी रखना शुभ होता है ।
उत्तर दिशा :  कैश व आभूषण अलमारी में रखते हैं, उत्तर दिशा की ओर खुलेगी, उसमें रखे गए पैसे और आभूषण में हमेशा वृद्धि होती रहेगी।
 दक्षिण दिशा : धन, सोना, चाँदी और आभूषण रखने से बढ़ोत्तरी  विशेष नहीं होती है।
तिजोरी  :सीढ़ियों के नीचे तिजोरी ,  टायलेट के सामनेरखना शुभ नहीं होता है  ।  कबाड़ या मकड़ी के जाले:  नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
घर में टूटी-फूटी मशीनों :को न रखें। रहने से मानसिक तनाव तथा शारीरिक व्याधियां उस घर के रहवासियों को घेरती हैं।
घर में कहीं भी झाड़ू :खड़ी करके नहीं रखना चाहिए,उसे पैर न  लगें ,उसे न लांघै ।  तो  बरकत होती है     
 पूजाघर में :तीन गणेश  3 माताओं तथा 2 शंखों का  पूजन  नही करना चाहिए।
घर के ईशान्य क्षेत्र में (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में) कोई भी पालतू जानवर न बांधें। कुत्ते, मुर्गे एवं भैंसों के संबंध में तो और भी सावधान रहें, अन्यथा घर में परेशानियों का अंबार लगा रहेगा।
 तुलसी का पौधा, सीता अशोक, आंवला, हरश्रृंगार, अमलतास, निर्गुण्डी पौधे अवश्य होने चाहिए।  कैक्टस:अशांति देता है।
 ईश्वर का भजन-पूजन  होना चाहिए।  पूर्वाभिमुख अथवा उत्तरा‍भिमुख होकर पूजन करें।  घी का दीपक अवश्य जलाएं।
घर में सामान बिखरा हुआ नही होना चाहिए, क्योंकि...
 नेगेटिव प्रभाव देती है।
 बेड के अंदर पुराने कपड़े, पुराने बिस्तर आदि : अशुभ प्रभाव, बीमारियां होने का खतरा बना रहता है।
 घर में गंदगी रहती है तो निश्चित ही वहां दरिद्रता का वास हो जाता है। कोई टूटा-फूटा सामान हो तो उसे तुरंत हटा दें।  कोई टेढ़े आकार का कांच, खंडित मूर्ती अथवा कोई टूटा चित्र, बंद घड़ी हो तो इन्हें भी घर में नहीं रखना चाहिए।दरिद्रता की ही प्रतीक मानी जाती हैं। अत: इन्हें तुरंत हटा
घर की छत पर: फालतू सामान, गंदगी पड़ी रहती है तो इसके दुष्प्रभाव परिवार की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य की हानि होती  है।
 नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं। जहां गंदगी होती है वहां से लक्ष्मी चली जाती है और दरिद्रता का वास हो जाता है।
 कोई मूर्ति किसी प्रकार से खंडित हो जाए तो उसकी पूजा नहीं करना चाहिए।
 खंडित मूर्ति की पूजा को अपशकुन माना गया है।
घर के दरवाजे सुंदर और आकर्षक होने चाहिए।  टूटे दरवाजे नकारात्मक ऊर्जा को अधिक सक्रिय कर देते हैं।
 ईशान कोण के दोष
 ईशान दिशा में कोई दोष है जैसे- ईशान कोण कटा हुआ है, यहां शौचालय, रसोई। ईशान कोण के स्वामी भगवान शिव है। ईशान कोण में दोष होने पर भगवान शिव की पूजा करना चाहिए।
ईशान कोण का स्वामी गृह बृहस्पति होने के कारण प्रत्येक गुरुवार को ऊँ बृं बृहस्पतये नम: मंत्र का जप करना चाहिए।
 तर्जनी अंगुली में सोने का छल्ला धारण करे ।
पीले रंग के बल्व
5 मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
 सुख-समृद्धि: बैठक कक्ष,शयनकक्ष , में फूलों का गुलदस्ता रखें।
 घर में कभी भी कंटीली झाडिय़ां या पौधे न रखें।
ऐसे पुष्प या पौधे को सजावट में न ले जिससे दूध झरता हो।
शयनकक्ष में झूठे बर्तन नहीं रखना चाहिए: रोग व दरिद्रता आती है।
रात में बुरे सपने आते हों :जल से भरा तांबे का बर्तन सिरहाने रखकर सोएं।
 गृहस्थ जीवन में समस्याएं : कमरे में शुद्ध घी का दीपक प्रतिदिन जलाना चाहिए।
 पूजा स्थल ईशान कोण(पूर्व-उत्तर) : इससे घर में खुशहाली आएगी।
टी.वी. या अन्य अग्नि संबंधी उपकरण : आग्नेय कोण में रखें।
बच के रहें घर का ये कोना खतरनाक है आपके लिए...
लड़की का विवाह नहीं हो रहा: वायव्य कोण यानि उत्तर-पश्चिम दिशा के कोने में (जिसे वायुदेवता का स्थान भी कहा जाता है।) कमरा देना चाहिये।
 व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं चाहिये : घर के वायव्य कोण वाला कमरे का उपयोग नहीं करना चाहिये।
घर में शुभता की दृष्टि से मंदिर लकड़ी, पत्थर और संगमरमर का होना चाहिए।
मंदिर इमारती लकड़ियों के बने होने चाहिए जैसे चंदन, शाल, चीड़, शीशम, सागौन आदि।
 घर में पूजा के लिए डेढ़ इंच से छोटी और बारह इंच से बड़ी मूर्ति का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

Wednesday, March 12, 2014

वास्तु टिप्स :सास-बहु के बीच कलेश :मनमुटाव :झगड़ा :Vastu Tips:

सास-बहू की टेंशन का कम करने के वास्तु टिप्स
वास्तु दोष


सास-ससुर का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और बेटे-बहू का कमरा पश्चिमी या दक्षिण दिशा में। अगर बेटे-बहू का रूम साउथ-वेस्ट में है, तो उनका सास-ससुर से झगडा रहेगा, डॉमिनेटिंग दिशा होने के कारण यहां घर के बडों को ही रहना चाहिए।.
किचन कभी भी घर के सेंटर में ना हो, यह आपसी संबंधों के लिए बेहद घातक है। घर की रसोई नॉर्थ-ईस्ट यानी उत्तर-पूर्व में होगी, तो वहां भी सास-बहू के आपसी क्लेश, मनमुटाव और हमेशा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं रहेंगी।.
गैस के ऊपर बने कैबिनेट काले ना हों। काले रंग से निकनेवाली अलफा रेडिएशन सेहत के लिए ठीक नहीं होतीं और चूंकि महिलाओं का ही अधिकतम टाइम में बीतता है, इसलिए सबसे ज्यादा असर इन्हीं की हेल्थ पर पडता है।.
वास्तु समाधान इस आधुनिक समय में ज्यादातर लोगों के घर छोटे-छोटे होते हैं, टाइम और पैसे की कमी होती है, इसलिए लोगों के लिए अपने घर को वास्तु के हिसाब से बनवाना सम्भव नहीं होता। जैसा घर मिला, उसी में काम चला लिया। अपने घर के वास्तु दोष आप इस प्रकार से ठीक कर सकती हैं।.
किचन में नीला कलर ना करावएं। यह हेल्थ की नजर से सही नहीं है, क्योंकि ब्लू कलर जहर का चिह्व है।.
घर की दीवारों पर मल्टीकलर ना कराएं। खासकर रेड कलर को कम से कम यूज में लाएं।.
घर के बडों का कमरा अगर साउथ-वेस्ट में ना हो, तो अपना कमरा बदल लें। अगर ऎसा करना संभव नाहो, तो उन्हें बेड इस दिशा में खिसका लेना चाहिए। पूरी फैमिली के आपसी रिश्ता को अच्छा बनाने के लिए पूरे परिवार की फोटो लाल रंग के फ्रेम में अपने-अपने बेडरूम में लगाएं।.

ये उपाय आजमाएं और सास-बहू की नाेक-झोंक से छुटकारा पाएं
अगर आपके घर में सास-बहू की नाेक-झोंक होती है तो इसे आप वास्तुशास्त्र के कुछ आसान उपाय आजमाकर दूर कर सकते हैं।
उपाय 1: सास-ससुर का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और बेटा-बहू का कमरा पश्चिमी या दक्षिण दिशा में। अगर बेटे-बहू का कमरा दक्षिण-पश्चिम में है, तो उनका सास-ससुर से झगड़ा रहेगा, हावी होने वाली दिशा होने के कारण यहां घर के बड़ाें को ही रहना चाहिए।
उपाय 2: किचन कभी भी घर के बीच में ना हो, यह आपसी संबंधों के लिए बेहद घातक है। घर की रसोई उत्तर-पूर्व में होगी, तो वहां भी सास-बहू के आपसी क्लेश, मनमुटाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हमेशा नहीं रहेंगी।
उपाय 3: किचन में कभी भी नीला रंग ना करवाएं। यह स्वास्थ्य की नजर से सही नहीं है, क्योंकि नीला रंग जहर का चिह्व है। घर की दीवारों काे कई रंगाें से रंगीन ना कराएं। खासकर लाल रंग को कम से कम उपयोग में लाएं।
उपाय 4: घर के बड़ाें का कमरा अगर दक्षिण-पश्चिम ना हो, तो कमरा बदल लें। अगर ऐसा करना संभव नहीं हो, तो उनके बेड इस दिशा में खिसका लेना चाहिए। पूरे परिवार के आपसी रिश्ते को अच्छा बनाने के लिए पूरे परिवार की फोटो लाल रंग के फ्रेम में अपने-अपने बेडरूम में लगाएं इससे लाभ मिलेगा। खासतौर पर सास-बहू के झगड़ों से निजात मिलेगी।
 सास-बहु के बीच कलेश दूर करने के उपाय———

गाय के गोबर का दीपक बनाकर उसमें गुड़ तथा मीठा तेल डालकर जलाएं। फिर इसे घर के मुख्य द्वार के मध्य में रखें। इस उपाय से भी घर में शांति बनी रहेगी तथा समृद्धि में वृद्धि होगी।
—— एक नारियल लेकर उस पर काला धागा लपेट दें फिर इसे पूजा स्थान पर रख दें। शाम को उस नारियल को धागे सहित जला दें। यह टोटका 9 दिनों तक करें।
—- घर में तुलसी का पौधा लगाएं तथा प्रतिदिन इसका पूजन करें। सुबह-शाम दीपक लगाएं। इस उपाय को करने से घर में सदैव शांति का वातावरण बना रहेगा।
—– अगर घर में सदैव अशांति रहती हो तो घर के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर श्वेतार्क (सफेद आक के गणेश) लगाने से घर में सुख-शांति बनी रहेगी।
—- यदि किसी बुरी शक्ति के कारण घर में झगड़े होते हों तो प्रतिदिन सुबह घर में गोमूत्र अथवा गाय के दूध में गंगाजल मिलाकर छिड़कने से घर की शुद्धि होती है तथा बुरी शक्ति का प्रभाव कम होता है।
—-घर के बर्तन के गिरने टकराने की आवाज न आने दें।
—-घर सजाकर सुन्दर रखें।
—-बहू को चाहिए की सूर्योदय से पहले घर में झाडू लगाकर कचड़े को घर के बाहर फेंके।
—-पितरों का पूजन करें।
—-प्रतिदिन पहली रोटी गाय को एवं आखरी रोटी कुत्ते को खिलाऐं।
—-ओम् शांति मन्त्र का जाप सास-बहू दोनों 21 दिन तक लगातर 11-11 माला करें।
—-रोटी बनाते समय तवा गर्म होने पर पहले उस पर ठंडे पानी के छींटे डाले और फिर रोटी बनाएं।


Friday, April 19, 2013

वास्तु ज्ञान --बाथरूम में नमक रखने से नेगेटिविटी दूर होगी:Keep some Salt in the Bathroom to Kill Negative Energy



 बाथरूम में नमक रखने से नेगेटिविटी दूर होगी:Keep some Salt in the Bathroom to Kill Negative Energy

हमारे घर का मुंह पूरब की तरफ है। इसके बावजूद मेरे जीवन में कोई शांति नहीं है। हमने जबसे इस मकान में शिफ्ट किया है, तभी से मैं इमोशनली, मेंटली और फाइनेंशली समस्याएं झेल रहा हूं। कृपया कोई उपाय बताइए।
आपके घर का नक्शा देखा। इसमें बहुत कम बदलाव करने की जरूरत है, लेकिन आपने सारी चीजों को मिसमैनेज किया हुआ है। इससे आपका घर वास्तु के नियमों के विपरीत हो गया है। यह पॉजिटिव एनर्जी को बर्बाद करने की तरह है। अगर आपने इनका ध्यान रखा होता है, तो पॉजिटिव एनर्जी आपके घर में रहकर आपको लाभ दे सकती थीं। आपके घर का मुंह पूरब की तरफ है, जो बहुत शुभ होता है। इसके अलावा उत्तर दिशा में खुली जगह का होना भी वास्तु के अनुसार काफी शुभ है। पूरब मुंहाना होते हुए भी आपको वास्तु का लाभ इसलिए नहीं मिल रहा है, क्योंकि घर के एकदम बाहर बड़े-बड़े पेड़ पॉजिटिव एनर्जी का रास्ता रोक रहे हैं। घर में दो कमरे पेंटागन आकार के हैं। ये वास्तु के नियमों के विपरीत हैं। आपने घर में बोरिंग भी फायर जोन यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में कराई है, जो गलत है। मंदिर को भी गलत जगह पर रखा गया है।


सबसे पहले बोरिंग को उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में शिफ्ट करने की कोशिश करें। इससे घर के आर्थिक हालात सुधरेंगे। घर में समृद्धि लाने के लिए आप इस हिस्से में अंडरग्राउंड वॉटर टैंक भी बनवा सकते हैं। आपके घर में पूजा घर और टॉयलेट्स बराबर में बने हुए हैं। यह वास्तु के हिसाब से बिल्कुल गलत है। आपको घर के मंदिर में ऊर्जावान 91 ग्रिड पिरामिड रखना चाहिए। इसके अलावा मंदिर में मूर्ति का मुंह दक्षिण या पश्चिम की तरफ रखें, जबकि पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व की तरफ होना चाहिए। बाथरूम में नमक का कटोरा रखें। इससे घर की नेगेटिव एनर्जी को बैलेंस करने में मदद मिलेगी। किचन की दीवार पर पूरब दिशा में एक बड़ा शीशा टांगने से घर में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होंगी। घर की बाहरी दीवार पर अष्टकोणीय शीशा इस तरह टांगें कि इसमें पेड़ों का अक्स दिखाई दे। इससे द्वार वेध दोष दूर होगा। 


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