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Saturday, July 22, 2017

Astrologer Advice: Let the girl go through her horoscope about her future husband:कन्या अपने भावी पति के बारे में अपनी कुंडली से जाने:

Astrologer Advice: Let the girl go through her horoscope about her future husband:
 कन्या अपने भावी पति के बारे में अपनी कुंडली से जाने:
Astrologer Housi lal chourey:
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Astrologer Advice: Let the girl go through her horoscope about her future husband:
 कन्या अपने भावी पति के बारे में अपनी कुंडली से जाने:
कुंडली विश्लेषण में आज हम जानकारी दे रहे हैं कि कन्या अपने भावी पति के बारे में अपनी कुंडली से कैसे जान सकती है इसके लिए कुंडली में हम विशेषकर सप्तम भाव सप्तमेश पर उस पर पापी को ग्रहो ,उनके प्रभाव तथा राशियां को देखकर इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं इसके लिए मेरा वीडियो देखिए और अगर वीडियो आपको अच्छा लगे तो आप मेरी एस्ट्रोलॉजी सिम्पलीयफीड Astrology Simpliyfied  को Subscribed कीजिए ।धन्यवाद।

Astrologer Advice: man's happiness in marriage life ? :पुरुष जाने उसका स्त्री सुख कैसा रहेगा?

Astrologer Advice: man's happiness in marriage life ? :पुरुष जाने उसका स्त्री सुख कैसा रहेगा?
Astrologer Housi lal chourey:
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Astrologer Advice: man's happiness in marriage life ? :पुरुष जाने उसका स्त्री सुख कैसा रहेगा?
आज हम जानकारी दे रहे हैं कि पुरुष अपनी कुंडली का विश्लेषण करके पहले ही जान सकता है कि उसका विवाह का सुख किस तरह का रहेगा इसके लिए हमें कुंडली का सप्तम भाव ,सतमेश, लग्न और लग्नेश तथा शुक्र ग्रह की स्थिति का अध्ययन करना चाहिए ।अगर ऊपर बताए हुए भाव और ग्रह पापी ग्रहों से प्रभावित हैं तो जातक को स्त्री सुख में कमी रहेगी अतः उन ग्रहों का उपाए हमें  दान व्रत जप आदि से करना चाहिए। इस तरह से उन सब ग्रहों की शांति हेतु हम जान व्रत जप आदि करते हैं। धन्यवाद।

Astrological Advice: : Navmashas Kundali : नवमांश कुंडली की उपयोगिता:

Astrological Advice: : Navmashas Kundali : नवमांश कुंडली की उपयोगिता: 



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आज हम चर्चा कर रहे हैं नवांश कुंडली के बारे में ,वर्ग कुंडलियों में हम नवांश कुंडली को विवाह के संदर्भ में देखते हैं अगर जातक के विवाह के बारे में हम कुंडली विश्लेषण करते हैं जब हमें देखना है चाहिए नवांश कुंडली में सप्तम भाव सप्तमेश तथा कारक ग्रह की स्थिति कैसी है अगर नवमांश कुंडली में सप्तम भाव और सप्तमेश पाप प्रभाव में है 6 8 12 भाव में है तथा सप्तमेश नीच राशि में शत्रु राशि मेंहै  तो वह वैवाहिक जीवन सुख में नहीं रहता है ।अतः नवमांश कुंडली का विश्लेषण लग्न कुंडली के साथ-साथ करना चाहिए। आप अधिक जानकारी के लिए वीडियो देखिए। धन्यवाद।

Monday, July 17, 2017

ज्योतिषी सलाह: क्या आपका वैवाहिक जीवन जीवन कष्ट में है? Is your marriage life in trouble?

ज्योतिषी सलाह: क्या आपका वैवाहिक जीवन जीवन कष्ट में है? Is your marriage life in trouble?
Astrologer Housi lal chourey:
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कुंडली विश्लेषण में आज हम चर्चा कर रहे हैं की हमारा विवाह जीवन कष्ट में रहेगा इसके लिए हमें कुंडली में सातवें भाव ,सप्तमेश, लग्न ,शुक्र एवं गुरु की स्थिति को मुख्य रूप देखना चाहिए ।सप्तम भाव क्योंकि कुंडली में विवाह का कारक ह,विवाह से संबंधित है तथा सप्तमेश को भी देखने आवश्यक है क्योंकि वही इस भाव का स्वामी है, शुक्र इस भाव का कारक ग्रह ,गुरु ग्रह भी कारक ग्रह है। अतः लग्नेश सप्तमेश संबंधों को भी देखना अवश्य है।नवांश कुंडली को भी इसका आधार बना के ऊपर बतावे भाव को देखना चाहिए ।  ऊपर बतावे भाव उनका स्वामी तथा उसका कारक पाप ग्रहों के मध्य स्थित हो । पापी ग्रहो से युक्त हो ,निर्बल हो शुभ ग्रह ना उसे देखते हो ,तब हमें हमारे वैवाहिक जीवन कस्टमय का होगा अगर सप्तमेश पापाक्रांत होकर छठे आठवें बारह भाव में नीच का हो तो हो तो जातक और जातिका को यह में प्रॉब्लम आ सकती है ।यदि षष्टेश अष्टमी द्वादशेश सतंम भाव में विराजमान हो उस पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि ना हो और तो वह भी सुख में बाधा आती है । राहु केतु सप्तम भाव में हो उसके ग्रहों से युति बनती हो, सप्तमेश वक्री हो शनि की दृष्टि हो तो विवाह में प्रॉब्लम आती है । हमने जाना कि  वैवाहिक जीवन  कस्टमर  होंगा अगर सप्तम भाव ,सप्तमेश, द्वितीय भाव पर  क्रूर ग्रहों का प्रभाव हो फिर अगर हमारा अष्टकूट मिलान भी ठीक ना होने पर वैचारिक मतभेद के कारण हमारा  वैवाहिक जीवन कष्टमय रहता है । कुंडली में मंगल दोष होने पर भी पति पत्नी के बीच में मध्य तनाव बढ़ जाता है क्योंकि मंगल क्रूर ग्रह  है, गर्म स्वभाव है उसका इसलिए वह दोनों के बीच में मनमुटाव क्लेश, तनाव आदि की स्थिति पैदा करता है ।इसलिए नान मांगलिक और मांगलिक की शादी होने से यह स्थिति बनती है अतः कुंडली में ऊपर बताए हुई योग को जानकर उनका उपाय करके हम उनके प्रभाव को कम कर सकते है।धन्यवाद।

Wednesday, July 12, 2017

ज्योतिषी सलाह :जातक की कुंडली से जाने पत्नी गुणों से युक्त

ज्योतिषी सलाह :जातक की कुंडली से जाने पत्नी का गुणधर्म :


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कुंडली विश्लेषण में हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं की जातक को उसकी पत्नी का स्वभाव तथा गुणधर्म किस प्रकार का होगा ।इसलिए कुंडली का विश्लेषण करते हुए हम सप्तम भाव में स्थित राशि के हिसाब से पत्नी के गुणधर्म का आकलन करते हैं ।जब जातक के सप्तम भाव में शुक्र ग्रह की राशि  वर्षभ और तुला राशि होगी तो पत्नी सुंदर ,गौरवर्ण ,संगीत कला  में प्रवीण होती है ।यदि सप्तम भाव में मिथुन या कन्या राशि होगी तो जातक की पत्नी सौभाग्यशाली मृदुभाषी होती है ।
सप्तम भाव में कर्क राशि हो तो जातक की पत्नी सुंदर ,भाविक, कल्पना प्रिय ,लंबे कद वाली ,अच्छे नाक नक्शा वाली पत्नी प्राप्त होती है ।यदि सप्तम भाव में धनु या मीन राशि हो हो हो तो जातक की पतनी अध्यात्मिक ,धार्मिक ,सुंदर  तथा भाग्य में वृद्धि करने वाली होती है ।अगर जातक के सप्तम भाव में कुंभ राशि हो तो जातक की पत्नी धार्मिक, आध्यात्मिक कार्यों में रुचि लेने वाली, दूसरों की सेवा करने वाली और दूसरों को सहयोग देने वाली होती है । इस तरह से जातक का सप्तम भाव मैं राशि के हिसाब से उनकी पत्नी का गुण धर्म का पता चल जाता है और साथ में यह भी देखा जाता है यह सप्तम भाव पाप ग्रहों से रहित हो तथा सप्तम भाव का स्वामी शुभ ग्रह  होकर केंद्र और त्रिकोण में हो तभी ऊपर बताए हुए गुणधर्म की संभावना बनती है ।धन्यवाद। 

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ज्योतिषी सलाह :विवाहित जीवन पर गुरु और शुक्र का शुभ अशुभ प्रभाव : Effect of Guru and Venus :

ज्योतिषी सलाह :विवाहित जीवन पर गुरु और शुक्र का शुभ अशुभ प्रभाव : Effect of Guru and Venus :
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कुंडली विश्लेषण में आज हम चर्चा कर रहे हैं कि विवाहित जीवन पर गुरु ग्रह और शुक्र ग्रह का पति पत्नी कुंडली में क्या प्रभाव होता है ।दोनों ग्रह अगर कुंडली में शुभ प्रभाव में हो उसके मूल त्रिकोण राशि में हो, केंद्र में हो, त्रिकोण में हो तो वैवाहिक जीवन आनंद में रहता है ।परंतु यही दोनों ग्रह कुंडली में पाप प्रभाव में हो 6 8 12 भाव में बैठे हो ,नीच राशि में हो ,शत्रु राशि में हो तो वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव डालतै है। जानकारी के लिए वीडियो देखें। धन्यवाद।
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Friday, July 7, 2017

ज्योतिषी सलाह : विवाह में विलंब और कलह: Astrologer Advice: Delay and Discord (Problem/Unhappy) in Marriage

ज्योतिषी सलाह : विवाह में विलंब और कलह: Astrologer Advice: Delay and Discord (Problem/Unhappy) in Marriage 
आज हम चर्चा करेंगे कि विवाह में विलंब और कलह  के क्या कारण होते है।आज हम कुंडली विश्लेषण में जातक की कुंडली में विवाह में विलंब क्यों होता है  तथा विवाह होने के बाद कलह क्यों किस कारण से होता है।इसके लिए हम जातक की कुंडली में लग्न भाव ,द्वितीय भाव ,सप्तम भाव आदि को देखना होता है। पुरुष की कुंडली में शुक्र शादी का कारक होता है तथा स्त्री की कुंडली में गुरु शादी का कारक होता है। सप्तम भाव तथा सप्तमेश अगर पाप ग्रहों से प्रभावित होगा तथा सप्तमेश छठे भाव में बैठा होगा तो शादी मैं देर से होगी तथा शादी के बाद  कलह होता रहेगा ।अब हम कुंडली में नीचे बताए गए सूत्रों को देखेंगे ।
अगर जातक की कुंडली में सप्तम भाव में शनि चंद्रमा एवं सूर्य से युक्त होकर ,  दृष्ट होकर ,सप्तम भाव या लग्न में स्थित हो तो विवाह में विलंब होता है और उसके बाद जातक को वैवाहिक जीवन  में परेशानी भी होती है।
यदि सूर्य लग्न में हो तथा शनि सप्तम में हो तब विवाह में देर होगी।
यदि शनि और चंद्र से सप्तमस्त तो शादी मैं विलंब होता है ।
यदि शनि से मंगल या राहु सप्तमस्त में हो विवाह में देरी होती है।
विवाह कारक शुक्र का चंद्रमा ,सूर्य से युति करें या सप्तमस्त तो  भी  विवाह में देरी होती है ।  द्वितीय भाव में चंद्रमा और   शनि ग्रह की उपस्थिति विवाह में विलंब का कारण  बनाता है ।
यदि लग्न, सप्तम या उसके स्वामी और शुक्र यदि पापकर्तरी में होते हैं, तब भी विलंब होता है ।
यदि शनि पंचम भाव में सप्तम भाव में  द्वादश भाव में हो या सप्तम भाव का स्वामी शुक्र से चौथे सातवें और ग्यारहवें हो तो यह विलंब का कारण बनते हैं ।
यदि लग्न भाव और सप्तम भाव के आगे-पीछे पापी ग्रहों का होना भी विवाह में विलंब और शादी के बाद वैवाहिक जीवन में परेशानियां का सूचक है ।
यदि राहु ग्रह पंचम में ,सप्तम में, या नवम भाव में पापी ग्रहों के साथ हो तो वैवाहिक जीवन में परेशानी पैदा करता है ।
यदि दूसरे भाव में पापी ग्रहों का प्रभाव हो और दूसरे भाव का स्वामी बारहवें भाव में हो तो विवाह विलंब से होता है ।
यदि सप्तमेश ,छठे भाव, अष्टम भाव , द्वादश भाव में स्थित हो वह विवाह मैं विलंब दर्शाता है।
 यदि वक्री ग्रह द्वितीय भाव में स्थित हो या द्वितीय भाव का स्वामी भी वक्री हो तो विवाह में देरी का कारण बनता  है ।
यदि सप्तम भाव में वक्री ग्रह है तथा सप्तमेश भी वक्री हो  या शुक्र भी वक्री हो तो विवाह विवाह विलंब दर्शाता है
यदि लग्न  सप्तम भाव में पापी ग्रहों   हो तो विवाह  देर से होता है ।
यदि शनि मंगल लग्न में हो ,यह भी विवाह में देरी तथा शादी के बाद  कलह दर्शाता है ।
यदि दूसरा भाव पाप  ग्रस्त हो और दूसरे भाव का स्वामी बारहवें भाव में हो यह विवाह में विलंब दिखाता है ।
यदि छठे भाव का स्वामी ,सातवें भाव का स्वामी ,12 भाव का स्वामी का सप्तम भाव में होना या सप्तम भाव को देखना विवाह विलंब और परेशानी दिखाता है ।
यदि मंगल शनि ,शुक्र और चंद्रमा से सातवें भाव में हो  तो विवाह में विलंब होगा ।
यदि मंगल शनि राहु केतु सूर्य लग्न में हो चौथे भाव में हो या बारहवें भाव में हो तो विवाह में विलंब होगा ।
इस तरह से  हमने जाना कि जातक की कुंडली में उपरोक्त बताए गए भाव और ग्रह प्रभावित हैं  तो जातक के विवाह में विलंब होगा तथा विवाह होने के पश्चात उपरोक्त ग्रहों की पूजा पाठ से ,मंत्रों से ,अनुष्ठान से शांति नहीं की गई तो वैवाहिक  परेशानी पैदा करेंगे ।
अतः जातक अपनी कुंडली का विश्लेषण ज्योतिषी से करवा कर ,उचित सलाह ले कर अपने विवाहित जीवन को सफल बनाने की कोशिश करें ।धन्यवाद।
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Thursday, June 29, 2017

ज्योतिषी सलाह: आपका जीवनसाथी कैसा होगा?Astrologer Advice:How will be your life partner?

ज्योतिषी सलाह: आपका जीवनसाथी कैसा होगा?Astrologer Advice:How will be your life partner? 

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कुंडली विश्लेषण में आज हम चर्चा करेंगे  कि हमारा जीवन साथी कैसा होगा |यह जानने के लिए हमें कुंडली का सप्तम भाव शुभ प्रभाव में होना चाहिए |साथ में सप्तमेश  भी शुभ स्थान में बैठा होना चाहिए| सप्तमेश पर शुभ ग्रहों की दृष्टि मैं होना चाहिए उस पर किसी पाप ग्रह की युति  दृष्टि न हो तो जीवन साथी सुशील विद्वान सुंदर अच्छे स्वभाव का तथा भाग्यवान मिलता है ।जितने भी ऐसे शुभ योग कुंडली में होंगे उतना सुख प्राप्त होगा ।धन्यवाद।

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Saturday, June 24, 2017

ज्योतिषी सलाह : शादी कब होगी: Astrologer Advice: When will the marriage be:

ज्योतिषी सलाह : शादी कब होगी: Astrologer Advice: When will the marriage be:

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Thursday, June 22, 2017

ज्योतिषी सलाह: पति पत्नी के बीच में क्लेश :मनमुटाव: Astrological Advice:Quarrel between husband wife

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Tuesday, June 13, 2017

ज्योतिषी सलाह : वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा ,विवाह कब होगा, हमारा तलाक तो ना होगा : Astrologer advice:How will the marital life ? When will be marriage or divorce

 ज्योतिषी सलाह : वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा ,विवाह कब होगा, हमारा तलाक तो ना होगा : Astrologer advice:How will the marital life ? When will be marriage or  divorce:
ज्योतिषी सलाह में आज हम बात करेंगे वैवाहिक जीवन के बारे में  अर्थात हमारा कुंडली के हिसाब से वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा ,विवाह कब होगा, हमारा तलाक तो ना होगा , और अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए क्या उपाय करना होगा, इन सब पहलुओं पर कुंडली के हिसाब से विश्लेषण करके हम पता लगाने की कोशिश करेंगे .सर्वप्रथम हम कुंडली में विवाहित जीवन के लिए प्रथम भाव और सप्तम भाव ,साथ   नवम भाव पर भी विचार करते हैं, साथ-साथ में चतुर्थ भाव पंचम भाव का द्वादश भाव पर विचार करते हैं। इन सब भावो में सप्तम भाव बहुत महत्वपूर्ण है। 
अब हम जानने की कोशिश करेंगे कि हमारा विवाह कब होगा इसके लिए हमें दशाओं पर विचार करते हैं. हम यह पता लगाते हैं कि वर्तमान में किस ग्रह की दशा चल रही है। अगर चंद्र ,गुरु और शुक्र की दशा चल रही है तो विवाह होने के योग बनते हैं उसके पश्चात सप्तमेश अर्थात सप्तम भाव के स्वामी की बात करेंगे ,अगर सप्तम भाव के स्वामी की दशा चल रही है तब भी विवाह होता है। इसके पश्चात दूसरे भाव के स्वामी जिस राशि में बैठते हैं उस उस भाव के स्वामी की दशा में विवाह होता है। सप्तमेश अगर राहु या केतु से युक्त हो तो इसकी  दशा में विवाह होता है. नवम भाव के स्वामी और दशम भाव के स्वामी की दशा में विवाह होता है। अब हम गोचर के बारे में बात करेंगे अगर कुंडली के हिसाब से जातक के विवाह का समय आ गया होगा तो हम गोचर में गुरु और शनि के बारे में विचार करेंगे। जब गोचरवश शनि और गुरु ,लग्न और लग्नेश तथा सप्तम भाव और सप्तमेश पर गोचर करते हैं तब शादी के योग बनते हैं। गुरु का गोचर जन्म कुंडली के पंचम भाव और पंचम भाव के स्वामी से विचरण करता है तब भी विवाह के योग बनते हैं। गोचर का गुरु जब नवम भाव और नवम भाव के स्वामी पर विचरण करता है तब भी विवाह के योग बनते हैं. जब गोचर का गुरु प्रथम भाव, पंचम भाव नवम भाव, एकादश भाव तथा तृतीय भाव पर विचरण करें तब भी विवाह के योग बनते हैं।
 अब हम बात करेंगे कि हमारा वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा इसके लिए हम कुंडली में  लग्न और चंद्रलग्न दोनों कुंडलियां को आधार मानकर लग्न कुंडली का और चंद्र कुंडली का सप्तमेश, शुक्र ,चंद्रमा की स्थिति के बारे में जानेंगे, अगर इन सब की  अच्छी स्थिति होने पर वैवाहिक जीवन सुख में रहता है। परंतु यदि  सप्तम भाव पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो ,यहां पापी ग्रहों की दृष्टि सप्तम भाव पर हो तो हमारा व्यवहारिक जीवन दुख में होता है। हमारा व्यवहारिक जीवन सुखमय तब होगा जब सप्तम भाव पर ग्रहों का दृष्टि संबंध न बने ,तथा सप्तम भाव का स्वामी केंद्र भाव में या त्रिकोण में हो या ग्यारहवें भाव में हो तो हमारा विवाहित जीवन सुखमय होगा। केंद्र का मतलब पहला भाव ,चौथा भाव, सातवां भाव ,दसवां भाव तथा त्रिकोण का मतलब पांचवा भाव, नवा भाव होता है ,इसका मतलब यह है  की , सप्तम भाव का स्वामी इन  भावो मे बैठा हो तो हमारा वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। सप्तमेश और सप्तम भाव के बली होने पर हमारा वैवाहिक जीवन अच्छा रहता है। 
अब हम जानेंगे कि कुंडली में तलाक के योग तो नहीं बन रहे हैं या हमारा वैवाहिक जीवन अलगाववादी तो नहीं हो रहा है ,तो हमें कुंडली में सप्तम भाव ,सप्तम भाव के स्वामी तथा शुक्र पर पापी ग्रहों का प्रभाव होगा तो तलाक हो सकता है ,जैसे कि ऊपर बताए गए सप्तम भाव उसके स्वामी और शुक्र के साथ में शनि राहु ,सूर्य राहु का प्रभाव होगा तो अलगाववादी प्रवत्ति आएगी। चौथा भाव और द्वितीय भाव पर भी  इस प्रकार से पापी ग्रहों का प्रभाव होगा तब भी अलगाव की स्थिति बन सकती है। 
कुंडली में हम शादी के पहले कुंडली मिलान ठीक से करना चाहिए अगर कुंडली मिलान ठीक से की जाए तथा शुभ मुहूर्त में शादी की जाए वह हमें तलाक से बचाती। जहां विवाह विच्छेद के योग कुंडली में इस तरह से भी देख सकते हैं ,राहु और केतु का प्रभाव सप्तमेश पर ,द्वितीय पर होने पर.
 स्त्री जातक की कुंडली में सप्तम भाव पर राहु, मंगल और सूर्य में से एक या दो अथवा तीनों ग्रहों का प्रभाव होने पर विवाह में परेशानी के योग बनते हैं। युवाओं में अब हम सुखी वैवाहिक जीवन बनाने के लिए कुंडली में ,यह देखे की प्रथम सप्तम भाव में स्थित राशियां और उनके स्वामी एक दूसरे के मित्र हो तो उनका वैवाहिक जीवन ठीक रहता है। अगर लग्नेश सप्तम भाव में स्थित हो तो पत्नी आपका अनुसरण करेगी। अगर पत्नी की कुंडली में सप्तम अष्टम और नवम भाव शुभ ग्रहों से युक्त हो तो वह सौभाग्यवती, पुत्रवती ,धनी होती है। कुंडली के लग्न भाव में चंद्रमा ,बुध , गुरु ,शुक्र का प्रभाव हो तो स्त्री सर्वगुण संपन्न होती है,तथा जीवन सदा सुख में रहता है। 
अब हम बात करेंगे कि हमारी शादी को सुखमय कैसे बनाएं ,इसके लिए वर और कन्या की कुंडली को मिलान करते है, लगभग दोनों की आयु में अधिक अंतर ना हो, मांगलिक वर-वधुओं की कुंडली में दोनों का मांगलिक होना चाहिए। कुंडली मिलान में नाड़ी दोष पर भी विचार करना चाहिए। कुंडली में दरिद्र योग  , व्यभिचार योग और संतान भाव का योग इन का विश्लेषण करना चाहिए।  विवाह के पश्चात पति-पत्नी को  गणेश जी की आराधना करना चाहिए और अपनी कुंडली के हिसाब से मुख्य ग्रह और इष्ट देवता दोनों को जानकर ,मुख्य ग्रह को मजबूत करना चाहिए और इष्ट देवता की हमेशा आराधना करते रहना चाहिए।  समय-समय पर अपने कुल देवता और कुल देवी का  पूजन करना चाहिए।  कुंडली के हिसाब से भाग्यशाली रत्न को धारण करना चाहिए। समय-समय पर  तीर्थ स्थानों का भ्रमण करना चाहिए तथा स्नान ,दान करना चाहिए।  माता पिता और गुरुजनों का सदा सम्मान और सेवा करनी चाहिए। गौ माता , कुंवारी कन्याओं का आदर सत्कार करते हुए अन्न - वस्त्र ,भोजन आदि करना चाहिए। इस प्रकार हमने देखा विवाहित जीवन सुखमय रहे इसके लिए कुंडली विश्लेषण अच्छे ज्योतिषी से करवाएं। 
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Wednesday, June 7, 2017

ज्योतिषी सलाह:बृहस्पति, शुक्र और वैवाहिक जीवनJupiter ,Venus & Married Life

ज्योतिषी सलाह:बृहस्पति, शुक्र और वैवाहिक जीवनJupiter ,Venus & Married Life
बृहस्पति और शुक्र यह दोनों ग्रह पुरुष और स्त्री  की कुंडली में विवाहित जीवन के लिए बहुत  जरूरी होते हैं | इसमें शुक्र ग्रह पुरुष जाति का  प्रतिनिधित्व करते हैं तथा गुरु ग्रह स्त्री जाति का प्रतिनिधित्व करता है  |अब हम बात करेंगे कि यह दोनों ग्रह कुंडली में किस तरह का प्रभाव देते हैं | अगर पुरुष की कुंडली में शुक्र ग्रह  सप्तमेश और सप्तम भाव शुभ प्रभाव में हो तो हमें पत्नी का सुख तथा विवाहित जीवन अच्छा होता है |परंतु शुक्र ग्रह सप्तम भाव  तथा सप्तमेश पर  पाप ग्रहों का प्रभाव होगा  तो विवाहित  जीवन पर बुरा असर डालेगा|
  इसी तरह से अगर गुरु ग्रह सप्तम भाव और सप्तमेश स्त्री की कुंडली में अच्छे प्रभाव में नहीं हो पापी ग्रहों के प्रभाव हो तो स्त्री को विवाहित जीवन में प्रॉब्लम आ सकती है |
 स्त्री को वैवाहिक  का सुख प्राप्त नहीं होता है  अतः  हमें कुंडली विश्लेषण के समय यह दोनों ग्रहों का ध्यान रखना चाहिए और किसी अच्छे ज्योतिषी  से अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाकर इन ग्रहों का उचित उपाय करना चाहिए जिससे कि हमारा विवाहित जीवन सुखमय हो सके .
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Wednesday, August 12, 2015

ज्योतिष टिप्स : शीघ्र विवाह के लिए :astrology remedies for early marriage

ज्योतिष   टिप्स  :शीघ्र विवाह के लिए श्रीकृष्ण के मंत्र का 108 बार जाप किजीए   ।
 भगवान श्री कृष्ण का मन्त्र नीचे दिया गया है।
“क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।”

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Tuesday, February 24, 2015

ज्योतिष और विवाह :विवाह कौन तय करेगा ?Astrology and Marriage: Marriage Who will decide?

ज्योतिष का ज्ञान रखने पर हम यह जान सकते है  की  विवाह कौन तय करेगा ?
यह तय करने  के लिए हम कुंडली मे :
सप्तमभाव ,सप्तमेश,शुक्र ग्रह पर जिस ग्रह की दृष्टि हो तब वह ग्रह
कुंडली में जिस भाव का स्वामी हो उस स्थान से संबंध रखना वाला रिश्ता ही विवाह कराता हैं।
प्रथम भाव:जातक स्वय। 
दूसरा भाव:परिवार व कुटुंब वाले। 
तीसरा भाव:भाई बहनों। 
चतुर्थ भाव: माता या मातृ पक्ष । 
पांचवा भाव:प्रेम संबंध । 
छठा भाव :  मामा पक्ष। 
सातवा भाव  :साझेदारी।
नवम भाव :धार्मिक स्थान। 
दशम भाव: पिता या पिता के पक्ष  । 
एकादश भाव : बड़े भाई बहन
द्वादश भाव:चाचा पक्ष  । 

नोट :अपनी  कुंडली अच्छे ज्योतिषि  को  दिखाकर  इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते है ।
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Monday, February 23, 2015

ज्योतिष और विवाह : कन्या का समय पर विवाह होने के लिए उपाय:Astrology and Marriage: Remedy to be married in time:

विवाह योग्य कन्या का समय पर विवाह होने के लिए उपाय: 
सोमवार को शिवलिंग का पूजन करें एवं जल चढ़ावे। 
गुरुवार का व्रत रखे ।
सोने की अंगूठी में पुखराज रत्न धारण करे। 
शिव-पार्वती का प्रतिदिन पूजन करना चाहिये।
गुरुवार को गाय को चने की दाल खिलाना चाहिये।
भगवान नारायण कि अराधना करना चाहिये ।
पानी में एक चूटकी हल्दी मिलाकर स्नान करना चाहिये।
भोजन में केसर का सेवन करना चाहिये।
गुरुवार को किसी गरीब को, ब्राह्मण को ,किसी सुहागिन स्त्री को ,गुरु ग्रह से संबंधित सामग्री का दान करना चाहिये।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह बाधा के निम्न उपाय करें:
सूर्य: प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में सूर्य को जल चढ़ाएं , मंत्र: ऊँ सूर्याय: नम:।

मंगल : चांदी का चौकोर टुकड़ा सदैव पास रखें। मंगलवार के दिन देवी-मंदिर में लाल गुलाब का फूल चढ़ाएँ, पूजन करें एवं मंगलवार का व्रत रखें।  नौ मंगलवार तक करें। अंतिम मंगलवार को 9 वर्ष की नौ कन्याओं को भोजन करवाकर लाल वस्त्र, मेहँदी एवं यथाशक्ति दक्षिणा देंना चाहिये।
शनि:शनिवार को शिवजी पर काले तिल चढ़ाएं । काले घोड़े की नाल का छल्ला सीधे हाथ।
की मध्यमा अंगुली (मीडिल फिंगर) में पहनें।
राहू :शनिवार को बहते पानी में नारियल बहाएं।
विवाह योग्य कन्या का कमरा  वायव्य कोण में होना चाहिये।


 कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नंद गोपसुतं देवि पतिं में कुरु ने नमः॥ (कात्यायनिमंत्र श्रीमद् भागवत)
माँ कात्यायनि देवी या पार्वतीदेवी के फोटो को सामने रखकर जो कन्
या पूजन कर इस कात्यायनि मंत्र की 1 माला का जाप प्रतिदिन करती है,
हे गौरी! शंकरर्धाङ्गिस यथा त्वं शंकरप्रिया।
तथा माँ कुरुं कल्याणिस कान्तं कान्तां सुदुर्लभाम्‌।
भगवती पार्वती का पूजन कर इस मंत्र की 5 माला प्रतिदिन करना ।
श्री गणपति अथर्वशीर्ष का प्रतिदिन 11 बार पाठ करें। अथर्वशीर्ष के प्रत्येक मंत्र से श्री गणेशजी की प्रतिमा पर दूर्वा चढ़ाएँ। इस प्रकार 84 दिनों तक नियमित करें, शीघ्र मनोकामना पूर्ण होती है । 

कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाये और यदि वहा  पर कन्या को मेहँदी लग रहे हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहँदी उस कन्या के हाथ से लगवा ले तो विवाह का मार्ग ठीक होता है|
लड़की गुरुवार को अपने तकिए के नीचे हल्दी की गांठ पीले वस्त्र में लपेट कर रखे।
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Sunday, February 22, 2015

ज्योतिष और विवाह:शादी किस उम्र में होगी :Astrology and Marriage: At What age would you marry

ज्योतिष का ज्ञान रखने पर हम यह जान सकते है  कि शादी किस उम्र में होने  कि सभावना है। कुंडली मे हमे इन भाव,ग्रह आदि  का  विचार करना चाहिए।  
लग्न और लग्नेश को देखा  जाता  है। घटना का संबंध किस भाव से है
भाव का स्वामी कौन  है ।
भाव का कारक ग्रह कौन है। 
भाव में कौन कौन से ग्रह हैं। 
भाव पर किस  ग्रह की दृष्टि। 

विवाह के योग कब बनते हैं:
जिस वर्ष शनि और गुरु दोनों गोचर मे सप्तम भाव या लग्न को देखते हों,  सप्तमेश की महादशा-अंतर्दशा या शुक्र-गुरु की महादशा-अंतर्दशा में विवाह मे । सप्तम भाव में स्थित ग्रह या सप्तमेश के साथ बैठे ग्रह की महादशा-अंतर्दशा में विवाह संभव है।

भाव  :कुंडली का सातवाँ भाव । 
शुभ ग्रह: शुक्र बुध गुरु और चन्द्र  शुभ ग्रह हैं |
अशुभ ग्रह : राहू मंगल शनि सूर्य यह सब अशुभ ग्रह हैं |
राशि:कुंडली के  सातवाँ भाव की राशि। 
बीस से चौबीस वर्ष की उम्र में शादी:
सातवेंभाव  मे :
बुध  :बीस वर्ष की उम्र में शादी करवाता है।
शुक्र, गुरु ,चन्द्र :कुंडली के सातवें भाव में हैं तो चौबीस पच्चीस वर्ष  की उम्र में शादी करवाता है। 
राहू, शनि का प्रभाव :राहू, शनि का प्रभाव ,सातवाँ भाव पर हो तो दो साल और शादी की उम्र मे जोड देना चाहिए
अशुभ ग्रह : राहू मंगल शनि सूर्य यह सब अशुभ ग्रह हैं |अशुभ ग्रह सातवें घर में होंगे शादी में देर उतनी ही अधिक होगी। 
  राहू केतु ,शनि, मंगल ,सूर्य :कुंडली के सातवें भाव में हैं तो सत्ताईस से तीस वर्ष  की उम्र में शादी करवाता है। शादी काफी विघ्नों के बाद  होती है |
राहू : राहू सातवें भाव में हैं तो  आसानी से विवाह नहीं होने देता | 
बात पक्की होने के बावजूद रिश्ते टूटते रहते हैं | 
केतु :केतु सातवें भाव में तो   गुप्त शत्रुओं की वजह से शादी में अडचनें होती है | 
शनि  :शनि सातवें भाव हो तो  शादी तीस वर्ष की उम्र के बाद ,बत्तीस से चालीस वर्ष की उम्र में होती है।
शनि मंगल, शनि राहू, मंगल राहू या शनि सूर्य या सूर्य मंगल, सूर्य राहू एक साथ सातवें भाव में हों तो विवाह में बहुत अधिक देरी होने की संभावना रहती है | शादी तीस वर्ष की उम्र के बाद होती है
मांगलिक: मांगलिक होने पर विवाह के योग 27, 29, 31, 33, 35 व 37वें वर्ष में बन सकते हैं।
पुरुष की कुंडली में शुक्र और स्त्री की कुंडली में गुरु निर्बल हो तो विवाह में देरी हो सकती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी ग्रह बाधा की वजह से विवाह में विलंब हो रहा हो तो उस ग्रह का उपाय करना चाहिए
 नोट :अपनी  कुंडली अच्छे ज्योतिषि  को  दिखाकर हम शादी किस उम्र में होगी इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते है ।
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Monday, January 12, 2015

ज्योतिष और विवाह :गुण मिलान के साथ साथ कुण्डली मिलान क्यों जरूरी है ?Astrology and Marriage: Why gun milan and kundali milan ?


ज्योतिष मे  जब हम  विवाह के लिए गुण मिलान करते तब हमे कुण्डली मिलान भी  जरूरी है। 
गुण मिलान से अधिक कुण्डली मिलान जरूरी है क्योकि है :
  • गुण मिलान से केवल इतना पता चलता है कि वर-कन्या के बीच कितनी निभेगी यह हम वर्ग, गण, वश्य, नाड़ी भकूट, तथा योनि के दयारा मालूम किया  जाता  हैं।
  •  पर इससे ये बिल्कुल नहीं जाना जा सकता है कि उन दोनों के बीच पूरा  जीवन कैसा रहेगा, साथ ही उनका भाग्य कितना  साथ देगा ।  
  • मांगलिक दोष का भी पता नही लगता है ।  
  • सप्तम भाव की स्थिति ठीक  है की नही इसका  भी पता नही लगता है।  
  • संतान भाव का   भी अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है । 
  • वर-कन्या की गुण मिलान के साथ साथ से उनका कुण्डली  मिलान करना जरूरी है।     
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Saturday, January 10, 2015

ज्योतिष : शीघ्र विवाह के उपाय :Astrology : Solution of early marriage:

नीचे बताऐ उपाय   शीघ्र विवाह के लिए ।
 हल्दी  :
 प्रत्येक गुरूवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए|

केसर : केसर का भी प्रयोग करना चाहिए|
गाय :

 गुरूवार को गाय को आटा  , हल्दी ,थोडा गुड तथा चने की गीली दाल का भोग देना चाहिए|गुरूवार :
गुरूवार की शाम को पांच प्रकार की मिठाई , हरी इलाइची का जोड़ा , शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिए| लगातार तीन गुरूवार करना चाहिए| केले के वृक्ष के सामने गुरु के 108 नामों के उच्चारण करते हुऎ , शुद्ध घी का दीपक तथा जल अर्पित करना चाहिए|
आठ छुआरे:
शुक्रवार की रात्रि में आठ छुआरे जल में उबाल कर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोयें और शनिवार को प्रात:स्नान करने के बाद किसी बहते जल में प्रवाहित कर दें|
मेहँदी :
कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाये और यदि वहां पर कन्या को मेहँदी लग रहे हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहँदी उस कन्या के हाथ से लगवा ले तो विवाह  होने की उमीद हो जाती है|
शादी  :
कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब  जायें तो कन्या खुले बालों से, लाल वस्त्र धारण कर हँसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे|
 बृहस्पति पूजा :
 पूजा से विवाह के मार्ग में आ रही सभी अड़चनें  समाप्त हो जाती हैं।  गुरुवार को बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग की वस्तुएं
हल्दी, पीला फल, पीले रंग का वस्त्र, पीले फूल, केला, चने की दाल चढ़ानी चाहिए और  गुरुवार के दिन व्रतकरते  हुए  खाने में पीले रंग का खाना  खाएं, जैसे चने की दाल, पीले फल, केले खाने चाहिएऔर  पीले रंग के वस्त्र ही पहनने चाहिए।
शिव-पार्वती का पूजन :
 प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन करें।
सूर्य पूजन :
 प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में सूर्य को जल चढ़ाएं और इस मंत्र का जप करें। मंत्र: ऊँ सूर्याय: नम:।
चांदी का चौकोर टुकड़ा :
मंगल के कारण विवाह में विलंब होने पर चांदी का चौकोर टुकड़ा सदैव अपने पास रखें।

 गुड़ और पानी:
 विवाह प्रस्ताव के जाते समय थोड़ा गुड़ खाकर और पानी पीकर जाना चाहिए। 
प्रति शनिवार को शिवजी पर काले तिल चढ़ाएं, इससे शनि की बाधा समाप्त हो जाएगी और शादी शीघ्र होगी। शनिवार को बहते पानी में नारियल बहाएं, इससे राहू की बाधा दूर होगी।
शनिवार के उपाय :
 शनिवार को काले कपड़े में साबुत उड़द, लोहा, काला तिल और साबुन बांधकर दान करें। काले घोड़े की नाल का छल्ला सीधे हाथ की मध्यमा अंगुली (मीडिल फिंगर) में पहनें।
शिव पूजा :
यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें !
शिवलिंग पर जल :
प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! 

विवाह बाधा  :
शादी वाले दिन से एक दिन पहले एक ईंट के ऊपर कोयले से “बाधायें” लिखकर ईंट को उल्टा करके किसी सुरक्षित स्थान पर रख दीजिये,और शादी के बाद उस ईंट को उठाकर किसी पानी वाले स्थान पर डाल कर ऊपर से कुछ खाने का सामान डाल दीजिये, शादी विवाह के समय में बाधायें नहीं आयेंगी।
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Thursday, November 20, 2014

ज्योतिष :कुंडली से जाने : तलाक के कारण और योग : सूत्र :रिश्तों को तोड़ते :पृथकताजनक ग्रह :Cause of Divorce: Divorce in astrology


 ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए हमारे शास्त्रों मे कई  सूत्र दिए हैं।
 कुछ प्रमुख सूत्र इस प्रकार से  हैं।
ज्योतिष के अनुसार तलाक के कारण और योग :
ज्योतिष मै  तलाक के सूत्र formula :
सातवाँ   भाव :विवाह से सम्बन्ध रखता है। 
शुभ और अशुभ  ग्रह :
शुभ  ग्रह :चन्द्र, बुध, शुक्र और बृहस्पति  शुभ  ग्रह होते  हैं | |
अशुभ  ग्रह :सूर्य, मंगल, शनि, राहू  अशुभ ग्रह होते  हैं |
 शुभ और अशुभ  ग्रह : शुभ ग्रह सातवें भाव को शुभता  देते  हैं और अशुभ ग्रह सातवें भाव के लिए बाधक का काम करते हैं |
सातवें भाव पर पृथकताजनक ग्रहों का प्रभाव :
सूर्य, बुध और राहू पृथकताजनक ग्रह हैं |

बारहवें भाव की  राशि का स्वामी ग्रह भी पृथकतावादी ग्रह होता है।
 दो या दो से अधिक पृथकताजनक ग्रह अगर साथ मै  हों तो जहा  पर बैठेंगे उससे सम्बन्धित चीजों से आपको अलग कर देते है |  सातवें भाव में बैठेकर   जातक को अपने जीवन साथी से अलग करने  की कोशिश करते है  | 
 सप्तम भाव, सप्तमेश एवं कारक ग्रहों का पापी ग्रहों से युति या दृष्टि  दाम्पत्य जीवन में कटुता करता है। सूर्य, शनि, मंगल एवं राहु (पापी ग्रह) दाम्पत्य जीवन में अलगाव लाते हैं।  पापी ग्रहों को पृथकता कारक ग्रह होते  है। 
सप्तम भाव इन पापी ग्रहों से पीड़ित अथवा पाप प्रभाव में हो, तो वैवाहिक जीवन कष्टदायक एवं दुखमय होता है। 
बृहस्पति :बृहस्पति पति सुख का कारक होकर यदि सप्तम भाव में स्थित हो, जातका के पति सुख में कमी रहेगी। 
 सप्तम भाव के दोनों ओर पापकर्तरी योग (पापी ग्रह) होने पर एक दूसरे के प्रति क्रूर व्यवहार के कारण तलाक की स्थिति बनती है।
 तलाक होने का समय:
ग्रहों के फल देने का एक निश्चित समय : जन्मकुंडली में विमशोत्तरी महादशा के नाम से एक कालम होता है जिसमे यह सब समय विवरण दिया रहता है |
दशा अन्तर्दशा या गोचर :अशुभ ग्रहों का सातवें भाव में होना ही तलाक  की वजह बनते  है।   ग्रह जो सातवें घर को नुक्सान पहुंचा रहा है उसकी दशा अन्तर्दशा या गोचर में आपकी राशि से भ्रमण कर रहा हो |
उपाय -
इष्ट देव,  की आराधना करे।
सप्तम स्थान में स्थित क्रूर ग्रह के उपाय करे ।
मंगल   ग्रह  का दान करें। 
 गुरुवार का व्रत करें।
 माता पार्वती का पूजन करें।
सोमवार का व्रत करें।
प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। 

पीपल की परिक्रमा करें।

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गुरू उच्च होकर भी प्रभावहीन है, तो ये करें उपाय
Solutions for good effects of Guru Brihaspati
 

Wednesday, November 19, 2014

ज्योतिष :कुण्डली से जाने : अनैतिक संबंध :विवाहेतर संबंध :उपाय :Astrology: Immoral relationship :Extramarital affair:

कुण्डली  से जाने अनैतिक संबेधों के कारक :

ग्रह  भाव : चंद्र ,मंगल ,शुक्र ,राहु सप्तम भाव,पंचम ,द्वादश प्रमुख  है। 
मंगल :     कर्मठ ,शारीरिक शक्ति , विवाहेतर संबंधों का कारक।
शुक्र :विपरीत लिंग से: रोमांस की दृष्टि से आकर्षित करने की क्षमता, कामेच्छा, के लिए प्रेरित ।  .  
शनि  : आलोचना।
राहु-केतु :स्वामी के अनुरूप ही संबंध ।
मंगल तथा शुक्र :कामुक संबंध । 
विवाह का कारक चंद्र, मंगल और शुक्र हैं।
भाव  : सप्तम भाव व सप्तमेश, पंचम भाव व पंचमेश तथा द्वादश भाव व द्वादशेश का किसी भी रूप में संबंध हो तो अनैतिक संबंध बनते  है।
चंद्र की भी अहं भूमिका होती है।
मंगल ने शारीरिक शक्ति प्रदान की करता है।  विवाहेतर संबंधों का कारक का काम  करता  है।  सप्तम भाव में मंगल चारित्रिक दोष उत्पन्न करता है
कुंड़ली मे सप्तम भाव में सूर्य हो, तो अन्य स्त्री-पुरुष से नाजायज संबंध बनाने वाला जीवनसाथी हो सकता है।
अनैतिक संबेधों का कारण,दृष्टि, युति आदि  से होता   हैं। 
योगों में शनि का योगदान अनैतिक संबंध कारक माना जाता है। 
जन्म कुंड़ली मे सप्तम भाव में चन्द्रमा के साथ शनि की युति होने पर जातक किसी अन्य से प्रेम कर अवैध संबंध रखता है।
 कुंड़ली मे सप्तम भाव में राहु होने पर जीवनसाथी धोखा देने वाला और  व्यभिचारी होता हैं व विवाह के बाद अवैध संबंध बनाता है।
 कुंड़ली मे सप्तमेश यदि अष्टम या षष्टम भाव में हों,मतभेद पैदा करता  हैं।
सप्तम, अष्टम एवं द्वादश भाव का संबंध उपर्युक्त योगों के साथ हो तो अनैतिक संबंध बनते है।
कुंडली में शुक्र उच्च का होने पर व्यक्ति के कई प्रेम प्रसंगहो सकते हैं ।
निर्बल मंगल गोपनीय संबंध बनाकर विवाहोपरांत जीवन को कष्टमय बना सकता है। लेकिन मंगल और शुक्र दोनों बलवान हों तो बहु संबंधों के साथ बहुविवाह भी होते  हैं ।
चतुर्थ एवं सप्तम भाव मंगल और राहु से प्रभावित हों, तो कई स्त्रियों या पुरुषों से संबंध बनते हैं। 
सप्तम भाव व सप्तमेश, पंचम भाव व पंचमेश तथा द्वादश भाव व द्वादशेश का किसी भी रूप में संबंध हो, विवाहेतर संबंध बनते हैं।
बहु संबंध एवं बहु विवाह का एक प्रमुख कारण देस ,काल , वातावरण  होता है। 
अनैतिक संबंध : पुरुष सौंदर्यप्रिय तथा स्त्री धनप्रिय होने  के  कारण विवाह   के कारण बनते  हैं।  वास्तुदोषों के कारण होते हैं। साथ  मै ग्रह योगों की भूमिका मुख्य होती है। 
 एक दूसरे कि भावनाओं का सम्मान करते हुवे अपने अंदर समर्पण कि भावना रखनी चाहिए।ऐसे अशुभ ग्रह योग का प्रभाव कम करने के लिए यह उपाय करें:
• प्रतिदिन शिव-पार्वतीजी का पूजन करें।
पूरे विधि-विधान से हरितालिकातीज का व्रत रखें।
• सोमवार का व्रत रखें।
• मोती की अंगुठी धारण करें।
• माता-पिता का हृदय कभी ना दुखाएं और उनका या अन्य किसी बड़े व्यक्ति का अनादर बिल्कुल ना करें।
  मंगल ,राहु व शनि के उपाय करना चाहिए।
• हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का पाठ करें।
• प्रतिदिन पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।
मंत्र-यंत्र-, रत्न उपाय करके ऐसे योग का प्रभाव कम किया जा सकता हैं।
विद्वान एवं जानकार ज्योतिषी से परामर्श लेना  चाहिए।

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