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Saturday, July 22, 2017

Astrologer Advice: Planetary Disease and upay: ग्रहों के रोग तथा शांति के उपाय:

Astrologer Advice: Planetary Disease and upay: ग्रहों के रोग तथा शांति के उपाय:
Astrologer Housi lal chourey:
ग्रह-तारे: click the blog. 09893234239, 08319942286,08861209966:housi.chourey@gmail.com:
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आज हम आपको जानकारी दे रहे हैं कि कैसे जातक कुंडली से जान सके कि उसे कौन से ग्रह रोग को प्रभावित कर रहे हैं तो उसके हिसाब से हम उन ग्रहों के दान ,पूज्य देवता की आराधना, मंत्रों के जाप तथा रत्न पहन कर उनके प्रभाव को कम कर सकते हैं। बाकी की जानकारी आप वीडियो में देखिए। धन्यवाद।

Monday, July 17, 2017

ज्योतिषी सलाह :क्या आपको मधुमेह रोग होगा? Astrologer Advice: Will you have diabetes?

ज्योतिषी सलाह :क्या आपको मधुमेह रोग होगा? Astrologer Advice: Will you have diabetes? 

Astrologer Housi lal chourey:
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ज्योतिषी सलाह में हम जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जातक को मधुमेह रोग होगा या नहीं। इसके लिए जातक को कुंडली का प्रथम भाव छठा आठवा बारवा  भाव तथा कारक ग्रह शुक्र गुरु  तथा पाप ग्रह सूर्य मंगल शनि राहु केतु को देखना चाहिए।कुंडली में अगर शुक्र ग्रह नीच ,शत्रु राशि में हो और उस पर पाप ग्रहो ,सूर्य मंगल शनि राहु और केतु का प्रभाव हो तथा कुंडली के छठे भाव और इसके स्वामी का संबंध शुक्र से हो। उसके पश्चात  देखें छठे भाव और छठे भाव के स्वामी का संबंध गुरु से हो तथा गुरु का छठे भाव से संबंध होने पर जातक को मधुमेह रोग की संभावना होती  है ,मधुमेह रोग का विचार हम लोग छठे भाव आठवां भाव ,बारवा भाव , तथा इन भाव के स्वामियों को देखकर भी करते हैं । इसका का मेन कारक ग्रह शुक्र  बृहस्पति  और चंद्रमा है।इसके पश्चात हमे देखें कि गुरु शुक्र चंद्र पर पाप ग्रहों का प्रभाव , शनि मंगल राहु और केतु का  हो तथा छठे भाव आठवें भाव 12 भाव के स्वामियों का संबंध ऊपर बताए हुए ग्रहो से होने पर या यह ग्रह छठे भाव में आठवें भाव में 12 भाव में स्थित हो तो यह रोग होता है ।अर्थात छठे भाव में आठवें भाव बारह भाव में गुरु शुक्र चंद्र की स्थिति हो और उन पर पाप ग्रह शनि मंगल राहु केतु का प्रभाव हो तो मधुमेह रोग की  होने की संभावनाएं बढ़ जाती है ।तो वह जातक अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाकर यह जान सकता है कि उसे मैं मधुमेह रोग होने की संभावना है या नहीं। धन्यवाद।ज्योतिषी सलाह में हम जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जातक को मधुमेह रोग होगा या नहीं। इसके लिए जातक को कुंडली का प्रथम भाव छठा आठवा बारवा  भाव तथा कारक ग्रह शुक्र गुरु  तथा पाप ग्रह सूर्य मंगल शनि राहु केतु को देखना चाहिए।कुंडली में अगर शुक्र ग्रह नीच ,शत्रु राशि में हो और उस पर पाप ग्रहो ,सूर्य मंगल शनि राहु और केतु का प्रभाव हो तथा कुंडली के छठे भाव और इसके स्वामी का संबंध शुक्र से हो। उसके पश्चात  देखें छठे भाव और छठे भाव के स्वामी का संबंध गुरु से हो तथा गुरु का छठे भाव से संबंध होने पर जातक को मधुमेह रोग की संभावना होती  है ,मधुमेह रोग का विचार हम लोग छठे भाव आठवां भाव ,बारवा भाव , तथा इन भाव के स्वामियों को देखकर भी करते हैं । इसका का मेन कारक ग्रह शुक्र  बृहस्पति  और चंद्रमा है।इसके पश्चात हमे देखें कि गुरु शुक्र चंद्र पर पाप ग्रहों का प्रभाव , शनि मंगल राहु और केतु का  हो तथा छठे भाव आठवें भाव 12 भाव के स्वामियों का संबंध ऊपर बताए हुए ग्रहो से होने पर या यह ग्रह छठे भाव में आठवें भाव में 12 भाव में स्थित हो तो यह रोग होता है ।अर्थात छठे भाव में आठवें भाव बारह भाव में गुरु शुक्र चंद्र की स्थिति हो और उन पर पाप ग्रह शनि मंगल राहु केतु का प्रभाव हो तो मधुमेह रोग की  होने की संभावनाएं बढ़ जाती है ।तो वह जातक अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाकर यह जान सकता है कि उसे मैं मधुमेह रोग होने की संभावना है या नहीं। धन्यवाद।

Wednesday, July 12, 2017

ज्योतिषी सलाह :मेडिकल व्यवसाय मैं लोकप्रिय क्षेत्रों का चयन: Astrologer Advice: Medical Businesses I choose the popular areas:

ज्योतिषी सलाह :मेडिकल व्यवसाय मैं लोकप्रिय क्षेत्रों का चयन: Astrologer Advice: Medical Businesses I choose the popular areas:

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ज्योतिषी सलाह :मेडिकल व्यवसाय मैं लोकप्रिय क्षेत्रों का चयन: Astrologer Advice: Medical Businesses I choose the popular areas:
कुंडली विश्लेषण में आज हम चर्चा कर रहे हैं कि हमें जातक को मेडिकल व्यवसाय में अपनी रुचि के हिसाब से कौन सा कौन सा अपनी पसंद का महत्पूर्ण विभाग चुनना चाहिए ।जातक की कुंडली में कार्डियोलॉजिस्ट बनने के योग के लिए हमें सूर्य ग्रह कुंभ राशि सिंह राशि और पांचवा घर देखना होता है ।स्त्री रोग विशेषक के लिए कुंडली में चंद्रमा ,मंगल, कर्क राशि ,वृश्चिक राशि तथा पांचवा ,आठवा भाव का विश्लेषण तथा संबंध देखना होता है ।Paediatrics में जाने के लिए सूर्य ,चंद्रमा ,मंगल, सिंह राशि, कर्क राशि और पांचवें भाव का संबंध देखना होता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ के लिए कुंडली में शनि ,मकर राशि ,कुंभ राशि तथा छठे आठवें भाव का इन राशि तथा ग्रहों से संबंध देखना होता है। न्यूरोलॉजी के लिए बुध, मंगल ,मेष राशि ,कुंभ राशि ,मीन राशि, मिथुन राशि कन्या राशि ,वृश्चिक राशि आदि का संबंध छठे आठवें बारह भाव से देखना चाहिए ।नेत्र रोग विशेषज्ञ बनने के लिए सूर्य ,चंद्रमा ,शुक्र बुध,गुरु का संबंध दूसरे भाव , भाव छठे भाव आठवे भाव तथा वृषभ राशि ,कर्क राशि ,सिंह राशि और मीन राशि से हो जाए तो हम नेत्र रोग विशेषज्ञ बन सकते हैं ।त्वचा रोग विशेषक बनने के लिए शनि ग्रह बुध ग्रह वृषभ राशि कन्या राशि तुला राशि मकर राशि मीन राशि तथा छठे भाव और 12 भाव का आपसी संबंध हमें त्वचा रोग विशेषज्ञ बनाता है ।सर्जरी के लिए मंगल ग्रह ,शनि ग्रह ,मेष राशि वृश्चिक राशि ,मकर राशि और छठा भाव आठवां भाव और 12 भाव का संबंध, सर्जन बनाता है ।फेफड़े रोग के विशेषज्ञ के लिए बुध ग्रह, शुक्र ग्रह, चंद्र ग्रह तथा राशि में वृषभ राशि ,मिथुन राशि ,कर्क राशि, तुला राशि तथा तीसरा भाव ,चौथा भाव और छठे भाव का आपसी संबंध हमें इस फील्ड में विशेषज्ञ बनाता है। इस तरह हम जातक की कुंडली का विश्लेषण करके जान सकते हैं कि उसको मेडिकल व्यवसाय में विशेषज्ञ बन सकता है या नही ।धन्यवाद।

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Tuesday, July 4, 2017

ज्योतिषी सलाह :शारीरिक रोग जाने कुंडली के द्वारा: Astrologer Advice:Health through horoscope:

ज्योतिषी सलाह :आज हम कुंडली विश्लेषण में यह जानने की कोशिश करेंगे कि हमें रोग होने की संभावना है या नहीं इसके लिए हमें कुंडली में छठा भाव को विशेषकर देखना होता है 
इसके साथ-साथ हमें लग्न भी देखना होता है तथा कुंडली का लग्न भाव तथा लग्नेश का विचार करना होता है ।
इसके अतिरिक्त छठे आठवें भाव में भाव तथा उनके स्वामी एवं इन भाव में स्थित ग्रह की उपस्थिति एवं दृष्टि आदि का विचार भी करना चाहिए ।हम जातक की कुंडली में कुंडली में लग्न का लग्नेश को ,छठे भाव को छठे भाव के स्वामी को और 6 8 12 भाव तथा इनके स्वामी स्थित ग्रहों आदि की स्थिति देखकर हम जातक को होने वाले संभावित रोग के बारे में बता सकते हैं। इन रोगों का होने का समय ग्रह की महादशा अंतर्दशा तथा गोचर का अध्ययन करके बता सकते हैं ।
लंबी अवधि के रोग ग्रह की महादशा अंतर्दशा में होती हैं तथा अल्पावधि वाले रोग प्रत्यंतर दशा एवं सूक्ष्म दशा में होती है।
 रोगों का आरंभ संबतधी ग्रह की दशा अंतर्दशा में ,अष्टमेश की दशा अंतर्दशा में, द्वादशेश की दशा अंतर्दशा में ,मारकेश की दशा अंतर्दशा में एवं रोग कारक ग्रहो की दशा अंतर्दशा में होता है ।
ग्रह अपने कारक  तत्व से संबंधित रोग देता है ।
जैसे कि सूर्य  मिर्गी, हृदय रोग ,नेत्ररोग आदि का कारक है ।
चंद्र ग्रह , रक्तदोष ,मनोरोग आदि का कारक है ।
मंगल ग्रह, नेत्रों ,खुजली ,अंग-भंग, रक्तदोष  आदि का कारक है ।बुद्ध ग्रह ,मतिभ्रम ,वाणी दोष ,मनोरोग ,त्वचारोग आदि का कारक है।
 गुरु  ग्रह पीलिया ,लीवर के रोग ,अपेंडिसाइटिस ,रसोली, आदि का कारक है। 
शुक्र ग्रह पोस्टेड ,गुप्त रोग,  आदि का कारक है।
 शनि ग्रह वात , पैर में दर्द, गठिया , लगड़ा पन ,लकवा, घुटने के जोड़ों का दर्द और स्नायु मंडल के रोग का कारक ।
राहु भी हिर्दय रोग,   आदि का कारक है ।
केतु ,सुस्ती, अचानक चोट लगना, घाव होना ,चमरोग होना, एलर्जी होना ,इन सब का कारक है।
 इस तरह से हमने जाना अगर जो ग्रह ऊपर बताए हुए भावों में प्रभावित होंगे उस तरह का रोग प्रदान करेंगे।
 इस तरह हम ज्योतिषी से अपनी कुंडली दिखाकर संभावित रोगों का पता लगाकर , उन ग्रहों का उचित उपाय करके, उस रोग की संभावना को कम करने का प्रयास कर सकते हैं।
 इसके लिए संबंधित  ग्रह का जप ओर दान करना चाहिए। 
ग्रहों के अरिष्ठ के निवारण के लिए पूजा-पाठ जप तप, दान पुण्य और अनुष्ठान किए जाने चाहिए ।
इससे हम कुछ हद तक रोगों में कमी ला सकते हैं ।
इसके लिए अपनी कुंडली का विश्लेषण ज्योतिषी से करवा सकते हैं ।धन्यवाद। 
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Monday, June 26, 2017

ज्योतिषी सलाह :रोग देने वाले ग्रहो के उपाय : Astrologer Advice:Disease grah , Upay

ज्योतिषी सलाह :रोग देने वाले ग्रहो के उपाय : Astrologer Advice:Disease grah , Upay 

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कुंडली विश्लेषण में आज हम बात कर रहे हैं कि जो ग्रह कुंडली में रोग दे रहे हैं उन के उपाय कैसे करना चाहिए । धन्यवाद।
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ज्योतिषी सलाह :हृदयरोग:Astrologer Advice:Heart Disease:

ज्योतिषी सलाह :हृदयरोग:Astrologer Advice:Heart Disease: 


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कुंडली विश्लेषण में आज हम हृदय रोग के बारे में बात कर रहे हैं ।इसके लिए कुंडली का छठा भाव जो रोग का होता है तथा चतुर्थ भाव ,पंचम भाव उनके स्वामी तथा इन पर पढ़ने वाला  पाप ग्रहों का प्रभाव का विश्लेषण कर हम जान सकते हैं कि हमारे कुंडली में हृदय रोग की संभावना है या नहीं। इस जानकारी के लिए आप यह वीडियो देखिए और अच्छे ज्योतिषी से सलाह लीजिए ।धन्यवाद।

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Sunday, June 25, 2017

ज्योतिषी सलाह: मधुमेह रोग होने के कारण:Astrologer Advice:Diabetes yog:

ज्योतिषी सलाह: मधुमेह रोग होने के कारण:Astrologer Advice:Diabetes yog:
 
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कुंडली विश्लेषण में आज हम बात कर रहे हैं मधुमेह रोग के बारे में हम कुंडली के द्वारा जान सकते हैं कि हमें डायबिटीज मधुमेह रोग होगा कि नहीं इसके लिए हम कुंडली में लग्न लग्नेश ।
 तृतीय भाव एवं छठा भाव तथा शुक्र गुरु एवं पाप ग्रहों का विश्लेषण करते हैं ।आप वीडियो देख कर और जानकारी प्राप्त कर सकते है। धन्यवाद

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Monday, February 2, 2015

ज्योतिष और रोग : रोग लंबे समय के लिए क्यों रहते है ?कब रोग ठीक होगा :उपाय :Astrology and disease: why the disease for a long time ?


 ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए हमारे शास्त्रों मे कई  सूत्र दिए हैं।
 कुछ प्रमुख सूत्र इस प्रकार से  हैं। ज्योतिष में रोग विचार  में  विचारणीय  सूत्र( फॉर्मूला )।
ज्योतिष में रोग विचार :
 षष्ठ स्थान 
 ग्रहों,
 राशियों, 
कारकग्रह ,  .
छः भावों का विश्लेषण:प्रथम भाव या लग्न, षष्ठ, अष्टम एवं द्वादश भावों ,मारक भाव द्वितीय एवं सप्तम का रोग ,स्वास्थ्य से  संबंध है
 ज्योतिष और रोग :जन्म कुंडली शनि या राहु छठे हाउस , रोग के हाउस से जुड़े हुए हैं
तब
रोग  लंबे समय के लिए रहेगा  क्योंकि शनि या राहु धीमी गति से चलते है।
 चंद्रमा तेज से गति से चलता है तो रोग जल्द ही ठीक हो जाते हैं। 
रोग ग्रहों की  प्रकृति होते है के अनुसार होते हैं. उनके प्रभाव की अवधि भी उनकी प्रकृति के अनुसार होते हैं।
 शनि ग्रह और  बीमारी: शारीरिक कमजोरी, दर्द, पेट दर्द, घुटनों या पैरों में होने वाला दर्द, दांतों ,त्वचा सम्बन्धित रोग, अस्थिभ्रंश, मांसपेशियों से सम्बन्धित रोग, लकवा, बहरापन, खांसी, दमा, अपच, स्नायुविकार ,नेत्र रोग और खाँसी ।
 राहु और  बीमारी:मस्तिष्क सम्बन्धी विकार, यकृत सम्बन्धी विकार, निर्बलता, चेचक, पेट में कीड़े, ऊंचाई से गिरना, पागलपन, तेज दर्द, विषजनित परेशानियां,  पशुओं या जानवरों से शारीरिक कष्ट, कुष्ठ रोग, कैंसर । बुखार, दिमागी की खराबियाँ, अचानक चोट, दुर्घटना ।
 कब रोग ठीक होगा : रोगकारक ग्रह की दशा अन्तर्दशा की समाप्ति के बाद  रोग ठीक होगा ।  लग्नेश , योगकारक ग्रह की दशा अन्तर्दशा प्रत्यन्तर्दशा प्रारम्भ हो जाए, तो रोग से छुटकारा प्राप्त हो सकता  हैं। शनि :रोग से जातक को लम्बे समय तक पीड़ित रहता है।  राहु :किसी रोग का कारक  होता है, तो बहुत समय तक उस रोग की पता नही हो पाता है। ऐसे में रोग अधिक अवधि तक चलता है।
रोग का निवारण के लिए मन्त्र का जाप करे  :
 त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनानमृत्योमुरक्षीय मामृतात्।।
प्रतिदिन इस मन्त्र को भोजन करते समय, ओषधि लेते
समय तीन बार इस मन्त्र का जप
करने से शरीर स्वस्थ रहता हे  और रोगों को नष्ट करता हे।
मंत्रों और हनुमान चालीसा के पाठ।
गायत्री मंत्र का पाठ। 
उपाय: ग्रहों के द्वारा उत्पन्न रोग के समय अपने सम्बंधित चिकित्सक की सलाह पर दवा का सेवन करना चाहिए। अपने ज्योतिषी की सलाह पर सम्बंधित भावः जिस से बीमारी उत्पन्न है के स्वामी की तथा कारक ग्रह से सम्बंधित उपाय करना चाहिए।
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ज्योतिष सरलीकृत वीडियो :Astrology Simplified videos on you tube:
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Sunday, January 18, 2015

ज्योतिष: ग्रह और रोग :Astrology: Planets and disease:

ग्रह  और रोग
प्रत्येक ग्रह हमारे शरीर पर प्रभाव डालते है। जिससे की हमे बीमारियों का सामना करना पड़ता है।नीचे  हम बता रहे है कि कौनसा  ग्रह  कौनसा रोग.
दे सकता  है। 
सूर्य और रोग:
विवेक  : विवेक खोना ।
दिमाग : दिमाग और शरीर का दायां भाग सूर्य से प्रभावित होकर रोग देता है।
अकड़न :सूर्य के कारण खराब होने पर शरीर में अकड़न आ सकती है।
थूक का आना :मुंह में थूक आते रहता है।
दिल का रोग :दिल के रोग का होना।   

धड़कन :धड़कन का कम-ज्यादा होते रहना ।
दांतों  : दांतों में तकलीफ का होना।
बेहोशी और सिरदर्द  :का रोग होना ।
चंद्र ग्रह और रोग :
दिल और बायां भाग  : दिल और बायां भाग मे चंद्र ग्रह का प्रभाव होने से रोग देता है।
रोग : सर्दी-जुकाम ,मिर्गी ,पागलपन, बेहोशी ,मासिक धर्म ,फेफड़े संबंधी रोगो का होना।

मासिक धर्म :मासिक धर्म ठीक से न होना।
स्मरण शक्ति कमजोर होना, मानसिक तनाव और मन में घबराहट होना, शंका और अनिश्चित भय का होना ।
आत्महत्या : मन में आत्महत्या करने के विचार  आते रहते हैं।
मंगल और रोग :


रोग :नेत्र रोग,उच्च रक्तचाप ,वात रोग, गठिया रोग ,फोड़े-फुंसी ,जख्मी या चोट। ।
बुखार : बार-बार बुखार का आना ।
रोग :शरीर में कंपन ,गुर्दे में पथरी,शारीरिक ताकत मे कमी ,।
शरीर के जोड़  :शरीर के जोड़ मे समस्या का होना ।
रक्त : मंगल से रक्त संबंधी बीमारी हो सकती है  । 

बच्चे पैदा होने मे समस्या हो सकती ।
बुध ग्रह और रोग :
तुतलाहट : तुतलाहट का होना।
सूंघने  : सूंघने की शक्ति क्षीण होना ।
दांतों :  दांतों का खराब होना।
मित्र : मित्र से संबंध ख़राब होना ।
बहन, बुआ और मौसी  : बहन, बुआ और मौसी पर मुसीबत आना।
नौकरी या व्यापार : नौकरी या व्यापार में हानि होना।
बदनामी  :बदनामी होती है।
गुरु ग्रह और रोग : 
रोग :  पेचिश, रीढ़ की हड्डी में दर्द, कब्ज, रक्त विकार, कानदर्द, पेट फूलना, जिगर में खराबी ,अस्थमा, दमा, श्वास आदि के रोग, गर्दन, नाक या सिर में दर्द , वायु विकार, फेफड़ों में दर्द ।
शुक्र ग्रह और रोग : 
रोग :  गाल, ठुड्डी और नसों पर प्रभाव ,अंतड़ियों के रोग ,गुर्दे का दर्द , पांव में तकलीफ ।
वीर्य : वीर्य की कमी होना,  यौन रोग का होना , कामेच्छा का समाप्त होना ।
अंगूठे : अंगूठे में दर्द का रहना ।
त्वचा :  त्वचा संबंधी रोग का होना ।
शनि ग्रह और रोग :  :
रोग :  दृष्टि, बाल, भवें और कनपटी पर रहता है।
 आंखें कमजोर होना। भवों के बाल झड़ना ।
कनपटी की नसों में दर्द का होना ।
सिर के बाल का झड़ना ।
फेफड़े की  तकलीफ होती है।
हड्डियां का कमजोर होना। जोड़ों का दर्द होना ।
रक्त की कमी होना ।
पेट का फूलना।
सिर की नसों में तनाव।
चिंता और घबराहट का होना ।
राहु के रोग  :

रोग :गैस प्रॉब्लम, बाल झड़ना , उदर रोग,बवासीर, पागलपन।
मानसिक तनाव  : मानसिक तनाव का रहना ।
नाखून :नाखून का  टूटते रहना ।
मस्तिष्क : मस्तिष्क में पीड़ा और दर्द का बने रहना  ।
पागलखाने, दवाखाने या जेलखाने जा  सकता है।
राहु अचानक से कोई बड़ी बीमारी पैदा हो सकती  है। 

केतु का रोग  :
पेशाब :पेशाब का रोग ,कान, रीढ़ ,घुटने, लिंग, जोड़ की समस्या ।
संतान : संतान उत्पति में कठिनाई ।
बाल  : सिर के बाल झड़ते हैं।
नसों :शरीर की नसों में कमजोरी का होना ।
चर्म रोग :  चर्म रोग होता है।
कान :सुनने की क्षमता कमजोर होना ।
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Wednesday, December 10, 2014

ज्योतिष: कुंडली से जाने: रोग विचार( सूत्र -फॉर्मूला ) :किस ग्रह से कौन-सी बीमारी?उपाय:Astrology: Disease : Which disease which planet?

 ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए हमारे शास्त्रों मे कई  सूत्र दिए हैं।
 कुछ प्रमुख सूत्र इस प्रकार से  हैं। ज्योतिष में रोग विचार  में  विचारणीय  सूत्र( फॉर्मूला )।
ज्योतिष में रोग विचार :
 षष्ठ स्थान 
 ग्रहों,
 राशियों, 
कारकग्रह ,  .
छः भावों का विश्लेषण:प्रथम भाव या लग्न, षष्ठ, अष्टम एवं द्वादश भावों ,मारक भाव द्वितीय एवं सप्तम का रोग ,स्वास्थ्य से  संबंध है
 प्रथम भाव :  के द्वारा शारीरिक कष्ट,  स्वास्थ्य का विचार।
षष्ठ भाव: स्वास्थ्य , रोग के लिए । षष्ठ भाव का कारक मंगल,  बुध । अष्टम भाव: आयु एवं मृत्यु ।  मृत्यु के कारक रोग । अष्टम स्थान का कारक शनि  मंगल ।
द्वादश भाव:  रोग शारीरिक शक्ति की हानि।  रोगों का उपचार स्थल ।
तृतीय भाव से आयु का विचार होता है।  
सप्तम एवं द्वितीय ‘मारक भाव’ :आयु के व्ययसूचक हैं। 
कौन से   अंग पीड़ित होगे उसके  अनुसार : षष्ठ, अष्टम एवं द्वादश भाव के स्वामी जिस भाव में होते है उससे संबद्ध अंग में पीड़ा हो सकती है। 
जिस भाव का स्वामी छठे, आठवें या 12वें में स्थित हो उनसे संबद्ध अंगों में भी  पीड़ा होती है। 
 रोगों के कारण :
लग्न एवं लग्नेश का अशुभ स्थिति ।
चंद्रमा का क्षीर्ण अथवा निर्बल होना ,चन्द्रलग्न में पाप ग्रहों का  होना।
लग्न, चन्द्रमा एवं सूर्य तीनों पर ही पाप अथवा अशुभ ग्रहों का प्रभाव ।
शनि, मंगल आदि पाप ग्रहों का गुरु, शुक्र आदि शुभ ग्रहों की अपेक्षा अधिक बलवान होना।
ग्रहों और  बीमारी :-1. बृहस्पति : लीवर, किडनी, तिल्ली , कर्ण सम्बन्धी रोग, मधुमेह, पीलिया, याददाश्त में कमी, जीभ एवं पिण्डलियों से सम्बन्धित रोग, मज्जा दोष, यकृत पीलिया, स्थूलता, दंत रोग, मस्तिष्क विकार ,पेट की गैस और फेफड़े की ।
2. सूर्य : सूर्यः पित्त, वर्ण, जलन, उदर,  न्यूरोलॉजी , नेत्र रोग, ह्रदय रोग, अस्थियों रोग, कुष्ठ रोग, सिर के रोग, ज्वर, मूर्च्छा, रक्तस्त्राव, मिर्गी ,धड़कन का अनियंत्रित होना, रक्त चाप।
3. चंद्र :ह्रदय एवं फेफड़े , बायें नेत्र , अनिद्रा, अस्थमा, डायरिया, रक्ताल्पता, रक्तविकार,  उल्टी ,किडनी , मधुमेह, ड्रॉप्सी, अपेन्डिक्स, कफ रोग,मूत्रविकार, मुख , नासिका , पीलिया, मानसिक , दिल और आँख की ।
4. शुक्र :दृष्टि , जननेन्द्रिय , मूत्र,  गुप्त रोग, मिर्गी, अपच, गले के रोग, नपुंसकता, अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियों ,  पीलिया रोग ,त्वचा, दाद, खुजली ।
5. मंगल : गर्मी , विषजनित रोग, व्रण, कुष्ठ, खुजली, रक्त सम्बन्धी , गर्दन एवं कण्ठ से रोग, रक्तचाप, मूत्र सम्बन्धी रोग, ट्यूमर, कैंसर, पाइल्स, अल्सर, दस्त, दुर्घटना में रक्तस्त्राव, कटना, फोड़े-फुन्सी, ज्वर, अग्निदाह, चोट ,,रक्त और पेट संबंधी बीमारी, नासूर, जिगर, पित्त आमाशय,  फोड़े ।
6. बुध : छाती  रोग, नसों , नाक  , ज्वर, विषमय, खुजली, अस्थिभंग, टायफाइड, पागलपन, लकवा, मिर्गी, अल्सर, अजीर्ण, मुख के रोग, चर्मरोग, हिस्टीरिया, चक्कर आना, निमोनिया, विषम ज्वर, पीलिया, वाणी दोष, कण्ठ रोग, स्नायु रोग, ,चेचक, नाड़ियों की कमजोरी, जीभ और दाँत का रोग।
7. शनि : शारीरिक कमजोरी, दर्द, पेट दर्द, घुटनों या पैरों में होने वाला दर्द, दांतों ,त्वचा सम्बन्धित रोग, अस्थिभ्रंश, मांसपेशियों से सम्बन्धित रोग, लकवा, बहरापन, खांसी, दमा, अपच, स्नायुविकार ,नेत्र रोग और खाँसी ।
8. राहु :मस्तिष्क सम्बन्धी विकार, यकृत सम्बन्धी विकार, निर्बलता, चेचक, पेट में कीड़े, ऊंचाई से गिरना, पागलपन, तेज दर्द, विषजनित परेशानियां,  पशुओं या जानवरों से शारीरिक कष्ट, कुष्ठ रोग, कैंसर । बुखार, दिमागी की खराबियाँ, अचानक चोट, दुर्घटना ।
9. केतु : वातजनित बीमारियां, रक्तदोष, चर्म रोग,  सुस्ती, अकर्मण्यता, शरीर में चोट, घाव, एलर्जी, आकस्मिक रोग ,परेशानी, कुत्ते का काटना ,रीढ़, जोड़ों का दर्द, शुगर, कान, स्वप्न दोष, हार्निया, गुप्तांग संबंधी । 

कब रोग ठीक होगा : रोगकारक ग्रह की दशा अन्तर्दशा की समाप्ति के बाद  रोग ठीक होगा ।  लग्नेश , योगकारक ग्रह की दशा अन्तर्दशा प्रत्यन्तर्दशा प्रारम्भ हो जाए, तो रोग से छुटकारा प्राप्त हो सकता  हैं। शनि :रोग से जातक को लम्बे समय तक पीड़ित रहता है।  राहु :किसी रोग का कारक  होता है, तो बहुत समय तक उस रोग की पता नही हो पाता है। ऐसे में रोग अधिक अवधि तक चलता है।
रोग का निवारण के लिए मन्त्र का जाप करे  :
 त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनानमृत्योमुरक्षीय मामृतात्।।
प्रतिदिन इस मन्त्र को भोजन करते समय, ओषधि लेते
समय तीन बार इस मन्त्र का जप
करने से शरीर स्वस्थ रहता हे  और रोगों को नष्ट करता हे।
मंत्रों और हनुमान चालीसा के पाठ।
गायत्री मंत्र का पाठ। 
उपाय: ग्रहों के द्वारा उत्पन्न रोग के समय अपने सम्बंधित चिकित्सक की सलाह पर दवा का सेवन करना चाहिए। अपने ज्योतिषी की सलाह पर सम्बंधित भावः जिस से बीमारी उत्पन्न है के स्वामी की तथा कारक ग्रह से सम्बंधित उपाय करना चाहिए।
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Tuesday, October 7, 2014

ज्योतिष : कुंडली से जाने ::रोग ,बीमारी का समय : Astrology:timing of disease

 हम कुंडली से जान सकते हैं की बीमारी कब हो सकती हैं :
  देह-सुख :  यदि लग्नेश 6, 8, 12 भाव में स्थित हो अशुभ ग्रह के साथ स्थित  तो शारीरक सुखों में कमी होती है।
  लग्नेश अस्त, नीच अथवा शत्रु राशि में स्थित हो तो जातक बार-बार बीमार होता  है। 
शुभ ग्रह केन्द्र-त्रिकोण में स्थित हों तो शरीर सुख  मिलते हैं।
 लग्नेश या चंद्रमा अशुभ प्रभाव में हों या उन पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो देह सुखों में कमी आ जाती है.
 बली सूर्य और बली चंद्र का होना भी आवश्यक होता है।
 रोग के विश्लेषण :  लग्न और लग्नेश की क्या स्थिति।  कारक ग्रह और उनकी राशि :
   फेफ़डों और ह्वदय से संबंधित रोग के लिए हमें चतुर्थ भाव और कर्क राशि पर विचार करना होगा। . 
चिकित्सा ज्योतिष के लिए छठे भाव और इसके स्वामी पर विचार करना चाहिए।
 रोग का समय : 6, 8, 12 भावों के स्वामियों की दशाओं   लग्नेश की अंतर्दशा में रोग की उत्पत्ति होती है। 
मेष लग्न में मंगल की दशा में बुध की अंतर्दशा के अंतर्गत बीमारियां आती हैं। बुध छठे भाव के स्वामी हैं।
वृषभ लग्न में छठे भाव में शुक्र की मूल त्रिकोण राशि तुला स्थित होती है। शुक्र महादशा में बृहस्पति की अंतर्दशा  रोग उत्पन्न होता है।  इस लग्न में बृहस्पति एकादशेश होते हैं, जो छठे से छठा भाव होता है।
सभी लग्नों में 6, 8, 12 भावों के स्वामियों की दशाओं या अंतर्दशाओं के साथ-साथ लग्नेश की अंतर्दशा में रोग प्रकट होते हैं।

6, 8, 12 भावों में स्थित ग्रह भी उनकी महादशाओं या अंतर्दशाओं में बीमारियों को जन्म देते हैं।
मृत्यु संबंधी मामलों में मारक ग्रहों की दशाओं में रोगों  बढ़ जाते  है। मारक भावों (2-7) और 8, 12 भावों में स्थित ग्रह अपनी दशा या अंतर्दशा में रोग कारक हो जाता है। 
राहु और शनि दो प्रबल कार्मिक ग्रह हैं। अपनी दशा-अंतर्दशाओं में रोग और समस्याओं का कारण बन जाते हैं।
नोट :अपनी  कुंडली अच्छे ज्योतिषी  को  दिखाइए  और रोग कारक ग्रहों को जानकर उनकी दशा, अंतर्दशा तथा प्रत्यंतर में उपाय करके अशुभ प्रभावों में कमी कर सकते  हैं  
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