Monday, October 6, 2014

ज्योतिष : कुंडली से जाने : मांगलिक दोष :मंगल दोष उपाय :Manglk Dosh in Janm Kundli :Remedies :

मंगली दोष :
 लग्न (कुंडली का प्रथम स्थान), चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश स्थान में मंगल ग्रह  का   होना  में मंगल दोष होता
है
  मंगल ग्रह : दांपत्य सुख कमी करता
है।  . मंगल अग्नि तत्व  ग्रह है तथा इसका   प्रभाव बिना मंगली जातक/जातिका पर क्रोधाअग्नि  के रूप में होंता  है।  
 द्वादश भाव : शयन सुख और  शारीरिक संबंध के लिए बाधा कारक होता   है। 

चतुर्थ भाव : सुख के साधनों मे कमी करते  है।
 सप्तम भाव : पति या पत्नी के  प्रेम के लिए बाधा कारक होता है। 
अष्टम भाव : पति या पत्नी  की आयु को कमजोर करते  है।मंगल दोष का परिहार :
वर और कन्या दोनों की जन्म कुंडलियों में मंगली दोष हो ।

दोष का परिहार नही :वर कन्या में से किसी एक के मंगली दोष है तथा दूसरे की कुंडली के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भावो
में से किसी  भाव में शनि या राहु बैठा हो, तो दोष का परिहार नही होता है।
मंगल दोष के  परिणाम :
पुत्रहीनता हो सकती
है। 
 ऋण  हो सकता है 
स्त्रियों में कामवासना 
बड सकती है
रोगादि रक्त-सम्बन्धी रोग, पित्त विकार, मज्जा विकार, नेत्र विकार, अस्थिभ्रंश ,जलन, तृष्णा, मिर्गी व उन्माद आदि मानसिक रोग, चर्म रोग,  आॅपरेशन, दुर्घटना, रक्तस्त्राव व घाव, पशुभय,  ।
मंगल दोष निवारण के उपाय:

गणेशजी को गुड़ और लाल फूल चढ़ाएं और यह मंत्र पढ़ें , ॐ गं गणपतये नमः’। 
मंगलवार को रक्तदान करें।
मंगल यन्त्र  पऱ मंगल प्रार्थना करें।
मंगलवार  व्रत करें।
कुम्भ विवाह, विष्णु विवाह कराएं।
हनुमान चालीसा पढ़ें।
चिड़ियों को मीठा खिलाएं
भिखारियों को मीठी रोटी दे ।
बड़ या बरगद की जड़ और मिट्टी में मीठा दूध मिलाकर मस्तक पर तिलक लगाएं।
रेवड़ी, तिल और शक्कर बहते जल में डाले  ।
देशी शक्कर छत पर बिखेर दें।
सिन्दूर से हनुमान जी की पूजा करे एवं हनुमान चालीसा का पाठ करे . कार्तिकेय जी की पूजा करे .

महामृत्युजय मंत्र का जप करे.
प्रति मंगलवार मंगलदेव के निमित्त विशेष पूजन करना चाहिए।
लाल मसूर की दाल, लाल कपड़े का दान करना चाहिए।
मंगलवार हनुमानजी का पूजन किया जाए। हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए। सिंदूर और चमेली का तेल हनुमान जी को चढ़ाएं।
हनुमान जी को गुड़-चने का प्रसाद चढ़ाएं और हनुमान चालिसा का पाठ करें।
मंगलवार को शिवलिंग पर कुमकुम चढ़ाये ।
शिवलिंग पर लाल मसूर की दाल और लाल गुलाब अर्पित करें।
लाल पुष्पों को जल में प्रवाहीत करें।
मंगलवार को गुड़ व मसूर की दाल जरूर खायें।
मीठी रोटियों का दान करें।
ताँबे के तार में डाले गये रूद्राक्ष की माला धारण करें।
मंगलवार को शिवलिंग पर जल चढ़ावे।
बन्दरों को मीठी लाल वस्तु जैसे - जलेबी, इमरती, शक्करपारे  खिलावे।शिव जी या हनुमान जी के नित्य दर्शन करें और हनुमान चालीसा या महामृत्युन्जय मंत्र की रोजाना एक माला का जाप करे।
हनुमान जी के मन्दिर में दीपदान करें तथा बजरंग बाण का प्रत्येक मंगलवार को पाठ करे।
गेहूँ , गुड़, मंूगा, मसूर, तांबा, सोना, लाल वस्त्र, केशर - कस्तूरी, लाल पुष्प , लाल चंदन , लाल रंग का बैल, धी, पीले रंग की गाय, मीठा भोजन आदि लाल वस्तुओं का दान मंगलवार को करें।
पति-पत्नि दोनों एक साथ रसोई में बैठकर भोजन करें।
पूर्व दिशा में मुँह करके सूर्य का अर्ध देकर प्रणाम करें। प्रतिदिन तुलसी को जल चढ़ाने और तुलसी पत्र का सेवन करे।
मूंगा या रूद्राक्ष की माला हमेशा अपने गले में धारण करें ।
गायत्री मंत्र का जाप करें ।
सुबह पिता अथवा बड़े भाई का  आशीर्वाद लेवें ।
मंगल दोष वाले माता पिता की संतान का 5 वर्ष की आयु तक बेहद खास  ध्यान रखने की जरूरत होती
है क्यूंकि उसका immune सिस्टम काफी कमजोर होगा इस बात की बहुत संभावना होती है
मंगल दोष वाले लोग विधुर /विधवा हो जायेंगे ये एक मिथ्या धारणा है
मंगल दोष के कारण लोगो के प्रेम सम्बन्ध टूट जाते है और ये दुःख दे के टूटते है
पिता व भाई की ख़ुशी में कमी होती है
यदि बृहस्पति मजबूत हुआ तो मंगल दोष वाले love मैरिज के बाद भी सम्बन्ध टूट जाने वाली situation आ सकती है
मंगल दोष जब बहुत जादा प्रभावित करता है तो लोग शादी के लिए आपको approach करेंगे लेकिन जैसे ही आप
कही बात करोगे तो वो बात टूट जाएगी आपको कोई response नहीं देगा लोग आपके फ़ोन का उत्तर तक
नहीं देंगे ,रिश्ते नहीं आएंगे आएंगे भी तो टूट जायेंगे
यदि रिश्ते आये भी तो आपकी तरफ से कोशिश करने से बात नहीं बनेगी
किसी ख़राब पार्टनर के साथ जीवन जीने से अच्छा है की अकेले ही रहा  जाये
ज्योतिष के according 70% लोग मंगल दोष से प्रभावित या पीड़ित मिलेंगे
पति पत्नी में मंगल दोष हो तो वो एक दूसरे की इज्जत नहीं करेंगे
मंगल की छाया या आंशिक मंगल कुछ लोग बोलते है ऐसा नहीं होता
मंगल दोष से प्रभावित लोगो को लम्बे समय तक (या सही शब्दों में जीवन पर्यंत उपाय करने चाहिए)
खून में heamoglobin कम होने पे हरी मिर्च खाए ये आपकी मदद करती है
यदि किसी की कुंडली में मंगल दोष है तो प्रेम संबंधो में सावधान रहने की जरूरत है
अधिकतर ऐसे सम्बन्ध चरित्र पे दाग लग के टूट जाते है
misconception जो मंगली/मंगल दोष से प्रभावित होते है उनका विवाह नहीं होता
मंगल दोष वाले माता पिता की संतान को कष्ट होता है
मंगल शारीरिक शक्ति को denote करता है यदि कमजोर होगा तो शारीरिक उर्जा कम होगी
ऐसे लोगो की संतान बीमार बहुत जल्दी जल्दी होगी ,यदि आपको मंगल दोष हो तो
ऐसे  माता पिता अपने घर का माहौल शांत रखे
misconcept मंगल दोष वालो का मंगल दोष जीवन के 28वे वर्ष में ख़त्म हो जाता है
ये बात सही नहीं है
जीवन मन्त्र जो लोग अपने इष्ट की साधना पूजा अच्छे समय में भी करते रहते है नियमित रूप से
वो लोग अपने जीवन में आने वाले कठिन समय से पार हो जाते है उनके सामने रास्ता बन जाता है उस
कठिन समय में भी जो व्यक्ति अपने इष्ट में विश्वास नहीं रखता इष्ट की साधना नहीं करता उस व्यक्ति के
रास्ते बंद हो जाते है और बुरा वक्त उसे हरा देता है
परंपरा हनुमान जी की एक विशेष साधना करी जाती है ये मूलतः धन की रक्षा के लिये करी जाती है जीवन
में कभी भी किसी प्रकार की दिक्कत आती है या कभी भी आपको रक्षा की आवश्यकता हो
तो आप इस उपाय को कर सकते है धन की रक्षा के लिए हनुमान जी की विशेष साधना ये है की पूर्णमासी को
मौली से नारियल बांध कर उन्हें अर्पित करे और फिर वही से हनुमान जी के चरणों का तिलक ले के आइये और
फिर उसे अपनी तिजोरी पे लगा दीजिये ये यदि आपका ईमानदारी का धन है लेकिन खतरे में पड़ गया है तो
हनुमान जी अपने आप जिम्मेदारी ले के ठीक कर देते है
मंगल दोष से प्रभावित माँ अपने बच्चे की सेहत को ले के काफी परेशान (possesive ) रहती है
माँ या पिता दोनों अपने बच्चे को ले के काफी possesive होते है
मंगल दोष जिन लोगो की कुंडली में हो वो शादी होने के बाद भी अलग अलग  कुम्भ विवाह जरूर करा ले
मंगल दोष से प्रभावित पिता अपने बच्चो पे क्रोध बहुत करते है
इससे उनका बच्चा चिड चिड़ा हो जाता है या उसका स्वभाव आगे चल कर विद्रोही बन जाता है
मंगल दोष के उपाय के तौर पे
माँ /साधू संत /बन्दर की सेवा करे
लाल मिर्च का सेवन न करे (मंगल दोष वाले )
लाल रंग से बहुत  परहेज करना है
कुश के आसन पे बैठ कर ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः  या
ॐ अं अंगारकाय नमः मन्त्र का लाल चन्दन की माला से जप करे रुद्राक्ष की माला पे भी कर सकते है
मंगल दोष वालो को हमेशा सर दर्द बना रहता है
चीनी /शहद /गुड़ का दान मेहनत मजदूरी करने वाले लोगो को जरूर करे (ये भिक्षा नहीं है )
ऐसे लोगो को ताम्बे का छल्ला मंगलवार को अनामिका में धारण कर लेना चाहिए वैवाहिक
जीवन के दुःख भी शांत होंगे और सर दर्द पे भी असर पड़ेगा
थोड़े से चावलों को बहते हुए पानी में डाल दीजियेगा ज्यादा चावल की जरूरत नहीं है उपाय केवल संकेत मात्र होता है
चांदी की ठोस गोली गले में सोमवार को जरूर धारण करियेगा
मिटटी के बर्तन में 5 लाल ईंट डाल कर  किसी निर्जन स्थान में दबाये जीवन भर ये करे महीने में 1 बार ये उपाय जरूर करे (जीवन भर )
किसी पूजा स्थान आश्रम या मजदूर के घर की दिवार बनवाये
यदि शादी में compromise करना पड़े तो उसे मन से करियेगा
मंगल ब्लड या RH factor का भी स्वामी है यदि मंगल सही से मैच न हो तो ऐसे लोगो को संतान होने में
कष्ट हो जाता है ,कई लडकियो में शादी के बाद hormonal disturbance हो जाते है और उसकी वजह.

से संतान होने में काफी कष्ट होता है ,
मंगल दोषह दोष से प्रभावित लोगो को अकेले नहीं रहना चाहिये
मंगल दोष वाले बच्चो के पिता (पिता की कुंडली में मंगल दोष ) उनपे बहुत गुस्सा करते है
उससे बच्चा विद्रोही हो जाता है
मंगल दोष से प्रभावित लोगो की कुंडली में गण मिलाये बिना विवाह न करे
उचित गण मिल जाने पे मंगल दोष काफी हद तक कम हो जाता है
किसी पूजा स्थान की दीवार जरूर बनवाये चाहे वो 1 इंच की ही क्यूँ न हो.

ज्योतिष :मंगल का अशुभ प्रभाव कैसे हो दूर? :Astrology:Remedies :mangal bad effects? लिंक को क्लिक  करें :

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Shree Siddhi Vinayak Jyotish avm Vaastu Paramarsh kendra. : दीपावली के अत्यंत सरल और अचूक उपाय लक्ष्मी कृपा पाने के:Diwali: Lakshmi grace simple steps:

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Friday, September 26, 2014

ज्योतिष : कुंडली से जाने :दुर्घटना का पूर्व अनुमान :दुर्घटनाओं की भविष्यवाणी :Astrology :Can anyone predict accidents through astrology?

यदि कुंडली से जाने :  ज्योतिष से जातक के जीवन में होने वाली  घटना के समय को जाना जा सकता है।  
ज्योतिषीय नियम हैं जो घटना के समय बताने  में सहायक होते हैं ?
घटना के समय को जानने के लिए -
लग्न और लग्नेश को देखा  जाता  है।
घटनाओं का संबंध किस भाव से है
भाव का स्वामी कौन  है ।
भाव का कारक ग्रह कौन है।
भाव में कौन कौन से ग्रह हैं।
भाव पर किस  ग्रह की दृष्टि।
कौनसी  ग्रह महादशा ,अंतर्दशा, प्रत्यंतर्दशा, सूक्ष्म एवं प्राण दशा चल रही है।
 भाव को प्रभावित करने वाले ग्रहों की गोचर स्थिति भी देखना चाहिये। इन सभी का अध्ययन करने   से किसी भी घटना का समय जाना जा सकता है।
कुंडली से जाने :दुर्घटना का पूर्व समय:
जन्म कुंडली में लग्न, चन्द्रमा और सूर्य :

12 वा , 8 वा , 4 भाव  
चार्ट डी 1, डी ९ . ट्रांजिट चार्ट.
जातक के साथ होने वाली दुर्घटना का पूर्व समयका पता लगाया जा सकता है?
दुर्घटना का संबंध लग्न और लग्नेश से   रहता है। लग्न जातक के स्वयं का होता  है।  लग्न में शुभ ग्रह होना  चाहिये हैं। अशुभ ग्रह हानि पहुंचाते हैं। शुभ ग्रह स्थित  होने से    और दृष्टि होने से   सुरक्षा   होती  है।   अकारक ग्रह या मारक ग्रह जब भी लग्न या लग्नेश पर गोचर करता है 
तब दुर्घटना  होने के योग बनते  है। अकारक ग्रह या मारक ग्रह की यदि दशा-अंतर्दशा चल रही हो, तो जातक को कष्ट और दुर्घटना  होने के योग बनते  है।    ग्रह मंगल : जातक को दुर्घटना में अधिक चोट आती या रक्त भी बहता है।
 दुर्घटना का समय :  ग्रह का गोचर लग्न  पर हो , वही समय दुर्घटना  का होता है। इसी तरह से  आने वाली दुर्घटना का पूर्व अनुमान लगाया जा सकता है।ग्रह मंगल और शनि दुर्घटनाओं के योग बनाते हैं 
 दुर्घटनाओं के लिए कुछ और   योग
 लग्न या दूसरे घर में राहु और मंगल,
 लग्न में शनि,
 लग्न में मंगल ग्रह,
तीसरे घर में मंगल या शनि ग्रह
5 वीं भाव में, मंगल या शनि .दशा अवधि:12 वा , 8 वा , 4 भाव की ग्रह की महादशा ,अंतर्दशा, प्रत्यंतर्दशा,अवधि के दौरान दुर्घटना  हो सकती   है या अस्पताल में भर्ती  हो सकते  है। 
कुंडली में हैं दुर्घटना योग
6ठा और 8वाँ भाव।  षष्ठ भाव व अष्टमेश का स्वामी भी अशुभ ग्रहों के साथ।
वाहन से दुर्घटना: शुक्र को देखना होगा। 

लोहा या मशीनरी से दुर्घटना: शनि को देखना होगा। 
आग या विस्फोटक से दुर्घटना : मंगल शनि को देखना होगा। चौपायों से दुर्घटना: शनि । 
अकस्मात दुर्घटना के लिए :राहु ।
शनि-मंगल-केतु अष्टम भाव: वाहनादि से दुर्घटना के कारण चोट लगती है।
इस प्रकार कुंडली  देखकर दुर्घटना के योग को जान सकते हैं। 

 दुर्घटनाओं से बचने के सरल उपाय
 हनुमान मंदिर में मिटटी के दिए में चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
 पक्षियों को लाल-मसूर खिलाएं।
 हनुमान मंदिर से कलाई पर मौली बंधवाएं।
 हनुमान जी के मंदिर में गुड़ चने का प्रसाद बांटें।
 नींबू पर सिंदूर लगाकर चौराहे पर फैंक दें।
 विधवा स्त्रियों की इच्छा अनुसार मिठाई बांटें।
 घर की छत पर लाल पताका (झंडा) लगाएं।
हनुमान जी के चित्र पर लाल फूल चढ़ाएं। कर्पूर से जलाएं।
 नारियल पर मौली लपेटकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं।


अशुभ ग्रहों का उपाय 
सूर्य : सूर्य को जल दे. पिता की सेवा करे।  
गेहूँ और तांबे का बर्तन दान करें।
चंद्र : किसी मंदिर में कुछ दिन कच्चा दूध और चावल रखें:
माता की सेवा करे। 
चन्द्र के लिए चावल, दुध एवं चान्दी के वस्तुएं दान करें.
मंगल : मंगलवार को बंदरो को भुना हुआ गुड और चने खिलाये।
बड़े भाई बहन के सेवा करे. मंगल के लिए साबुत, मसूर की दाल दान करें 
बुध : ताँबे के पैसे में सूराख करके बहते पानी में बहाएँ।
 फिटकरी से दन्त साफ करे. साबुत मूंग का दान करें।
माँ दुर्गा की आराधना करें।
 बृहस्पति : केसर का तिलक रोजाना लगाएँ। 
कुछ मात्रा में केसर खाएँ और नाभि या जीभ पर लगाएं। 
चने की दाल या पिली वस्तु दान करें.
शुक्र : गाय की सेवा करें।
घर तथा शरीर को साफ-सुथरा रखें। 
 गाय को हरा चारा डाले।
दही, घी, कपूर का दान करें. 
शनि : शनि के दिन पीपल पर तेल का दिया जलाये। 
किसी बर्तन में तेल लेकर उसमे अपना क्षाया दखें और बर्तन तेल के साथ दान करे.
हनुमान जी की पूजा करे और बजरंग बाण का पाठ करे.
काले साबुत उड़द एवं लोहे की वस्तु का दान करें. 
राहु : जौ या मूली या काली सरसों का दान करें। 
 केतु :  चींटियों को। काला सफ़ेद कम्बल कोढियों को दान करें।
कौओं को रोटी खिलाएं. काला तिल दान करे.कर्म ठीक रखे। 
मन्दिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए जाएं.
माता-पिता और गुरु जानो का सम्मान करे 
अपने धर्मं का पालन करे. भाई बन्धुओं से अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखें.
पितरो का श्राद्ध करें. प्रत्येक अमावस को पितरो के निमित्त मंदिर में दान करे गाय और कुत्ता पालें,  
ना पाल सके तो बाहर ही उसकी सेवा करे, 
यदि सन्तान बाधा हो तो कुत्तों को रोटी खिलाने से,
घर में बड़ो के आशीर्वाद लेने से। 
उनकी सेवा करने से सन्तान सुख की प्राप्ति होगी . 
गौ ग्रास. रोज भोजन करते समय परोसी गयी थाली में से एक हिस्सा गाय को, एक हिस्सा कुत्ते को एवं एक हिस्सा कौए को खिलाएं। 

दुर्घटना से बचने के उपाय महामृत्युंजय मंत्र का जप ।
- शनिवार को छाया दान ।
- विष्णु सहस्त्रनाम  जप ।
 ग्रह ४/6/8 /भाव से संबंधित अनिष्ट ग्रहों का उपाय कीजिए ।
- पशु को चारा खिलाना और पक्षियों, मछलियों को भोजन कराने ।

हनुमान जी की शक्ति से संपन्न वाहन दुर्घटना नाशक यन्त्र को अपने घर और वाहन में स्थापित करने पर ,.
,श्री हनुमान जी की कृपा से वाहन आदि से दुर्घटना का भय बिलकुल नहीं रहता है । सर्वत्र रक्षा होती है ।

 इसे मंगलवार या शनिवार के दिन एक यन्त्र घर पर और एक यन्त्र अपने वाहन के आगे के हिस्से में कही पर भी रख दे । 
धुप दीप दिखा कर पूजा अवश्य करे पहले ।
इसके अतरिक्त जब भी घर से बहार निकले तो 11  बार. ॐ ज़ूम सः .इस मंत्र का जप करके निकले |
इन उपायों को करने से दुर्घटना के योग टल सकते हैं।

 विद्वान पंडित कुंडली देखकर यह भी बता सकते हैं कि किन ग्रहों के कारण कौन सा समय जातक के लिए ठीक नहीं है। ग्रहों के योग देखकर किसी दुर्घटना की पूर्व जानकारी के बारे में भी पता चल जाता है।   उपाय करने से होने वाले दुर्घटना को रोका या कम किया जा सकता है।
   नोट :अपनी  कुंडली अच्छे ज्योतिषी  को  दिखाइए ।
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Thursday, September 25, 2014

कुंडली से जाने :विदेश यात्रा से लाभ या हानि :Know from Horoscope: gains or losses from foreign travel :

कुंडली से जाने :विदेश यात्रा से लाभ या  हानि :कुंडली देखकर जातक जान सकता है की विदेश यात्रा से लाभ या  हानि होगी।
 कुंडली में सूर्य, चन्द्र,मंगल, बुध, गुरु और राहु केतु ग्रह ये बताते हैं कि आप  किस उद्देश्य से विदेश जायगे  ।
 सूर्य :उच्च का सूर्य  कुंडली मे हो तो मान  सम्मान विदेश में दिलाता है  अगर सूर्य  नीच है , सूर्य खराब है तो जातक दंड विदेश  मे मिलता है।
 चन्द्र बलिष्ट ,उच्च का हो , तो जातक आसानी से विदेश जाता है.
चन्द्र नीच है ,  ख़राब है तो जातक को विदेश जाने में तो परेशानी का कारण बनता है .
विदेश में मन नहीं   लगता  है।
उच्च चन्द्र के कारण जातक लम्बी विदेश यात्राऐ  करता है।
खराब ,नीच चन्द्र वाले को नदी, समुद्र के पास यात्रा करनी चाहिए।     कुंडली मंगल उच्च का ,अच्छा हो ,तो जातक विदेश जाकर वहाँ बसता  है,
और  जातक स्वदेश भी आता है।
-राशि/ लगन :  मेष, सिंह, वृश्चिक राशि/ लगन वाले जातक विदेश  आते जाते रहते हैं।
बुध :जातक व्यापार  के लिए विदेश जाता है.
बुध तीसरे भाव, द्वादश भाव या चन्द्र से सम्बन्ध बनाये तो विदेश मे  हानि के योग बन सकते है।
 गुरु :उच्च शिक्षा, परोपकार या शांति के लिए विदेश जाता है।
चन्द्र शुक्र युति हो तो अवश्य ही विदेश घूमने  जाता  है।
तकनीकि क्षेत्र :  शनि राहु केतु तकनीकि क्षेत्र में काम के विदेश लिए विदेश जाता है।
विदेश  यात्रा:फॉरेन ट्रेवल :
 विदेश  यात्रा और विदेश निवास:
 विदेश  यात्रा
विदेश  यात्रा  के लिए कुंडली का  नवम भाव ,दसवा भाव ,या नवम लार्ड का प्रभाव या बारवह लार्ड का प्रभाव या सातवा  लार्ड का प्रभाव,चौथा भाव पर और तीसरे भाव पर रहेगा तो विदेश  दौरा होगा।
 विदेश निवास :
 विदेश निवास का पता हम कुंडली के सातवा भाव ,बारवा भाव या  सातवा  लार्ड का प्रभाव या बारवा लार्ड प्रभाव या  नौवा लार्ड प्रभाव का चौथा भाव पर रहने पर जातक विदेश निवास करता है। इन सब पर राहु और  शुक्र का प्रभाव भी रहता  है।
 विदेश यात्रा के  लिए कारक ग्रह:  चंद्रमा, बृहस्पति, शुक्र , शनि एवं राहु हैं।

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Wednesday, September 24, 2014

कुंडली से जाने : बच्चे बच्चियों को अपोजिट सेक्स के प्रति आकर्षण:लड़के और बहिकती लडकिया :Child girls attracted to the opposite sex

 कुंडली  में स्थित कुछ योगों  से पता चल सकता है की बच्चा किस पकार का है और उसी के अनुसार  ही बच्चे पर ध्यान देना  जरुरी है।
कुंडली में मंगल शुक्र का युति .मंगल के कारण बच्चों राह से भटकने है।
 कुंडली में  शुक्र चन्द्र की युति। 

 बच्चे बच्चियों पर ध्यान रखें।
 बच्चे बच्चियों को  अपोजिट सेक्स के प्रति आकर्षित होते है।
चंद्र शुक्र-प्रेम-प्रसंगों में सफलता प्राप्त करने एवं प्रेमिका को प्राप्त करने  ,विपरीत लिंगी से कार्य कराने के लिए।
चंद्रमा कमजोर हो तो बच्चा बहुत भावना वाला  होता है। 

 ऐसे   बच्चे बच्चियों को  कुछ स्वार्थी बच्चे/बच्चियां उसे ब्लैकमेल करते हैं।
कुंडली में  चन्द्र राहु की युति हो तो बच्चे के मन में  खुराफातें उपजती हैं.
चन्द्र राहु की युति कई प्रकार के भ्रम आजाते है और उन भ्रमो से बाहर निकलना ही नही हो पाता है
मंगल शनि की युति हो और मंगल बहुत बली हो तो बच्चा किसी को भी हानि पहुँचाने से नहीं डरेगा। गुरु ख़राब हो, नीच, अस्त, वक्री हो तो बच्चा अपने माता-पिता बड़े बुजुर्ग  किसी की भी इज्जत नहीं करेगा।
पांचवें भाव , पांचवें भाव का लॉर्ड और चंद्रमा भावनाओं को नियंत्रित करता    है ,
लग्न, पांचवें या सातवें भाव पर उनके प्रभाव से व्यक्ति अत्यधिक भावुक होता  है .
तीसरे लॉर्ड और मंगल साहस का कारक हैं.
 राहु और बारहवें और आठवें भाव के लॉर्ड्स सुख के लिए मजबूत इच्छा को दर्शाता है .

 शुक्र, चंद्रमा, आठवें भाव  लग्न या सातवें भाव के साथ जुड़ कर  कामुक सुख के लिए मजबूत इच्छा को दर्शाता है. 
राहु, शुक्र और भावनाओं और साहस के कारकों के साथ जुड़कर  प्यार के लिए जुनून दिखाता है।  
उम्र की अनदेखी, सभी सामाजिक मानदंडों अनदेखी कर कामुक सुख की इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रयास करता हैं।  
बृहस्पति और नौवें घर की कमजोरी अतिरिक्त योगदान करता हैं.पांचवें लॉर्ड की नियुक्ति सातवें या आठवें भाव  कामुक सुख के लिए कामुक सुख के लिए झुकाव. देता है।
प्यार और लगाव के लिए जिम्मेदार ग्रह  बुध, चंद्रमा, शुक्र और मंगल ग्रह और   भाव  5 वीं और 7thभाव  है .
मोह, घोटालों, आत्महत्याओं के  लिए 8the भाव को देखा जाता है।
मन के संतुलन के हानि के लिए  १२TH  भाव  ओर बुध गृह को  देखना  होता है।
वीनस-मंगल ग्रह युति ,सातवें घर में शुक्र,दुर्बल वीनस, 
एक्सट्राऑर्डिनरी सेक्स ड्राइव दे सकता है.
 मंगल  राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा ग्रह की दशा,और  5 ,7 वीं, 8 वीं और 12 वीं ,भाव  के साथ संबंध हो तब  होता  है।
 आठवें  भाव जो  की  वैवाहिक जीवन, विधवापन, पापों घोटालों, यौन अंग, रहस्य मामलों, अश्लील के लिए देखा जाता है।
वीनस 7 वीं या 8 वीं भाव के साथ   और मंगल ग्रह या राहु के साथ।,  विपरीत सेक्स के प्रति यौन इच्छा और आकर्षण तेज करता  है .
वीनस विपरीत सेक्स के प्रति मजबूत आकर्षण देता है जब यह मंगल ग्रह की राशि  मै होता  है।

उपाय :-
मंगल शुक्र योग के लिए बच्चे को खेलकूद में डालें। 

 बच्चे की एनेर्जी को खेलकूद में लगायें, बुध के लिए हरी सब्जियों का सेवन कराएँ
लड़की की कुंडली में इस तरह के योग हों तो उसे संगी,डांस, पेंटिंग आदि किसी कला में डाले
बड़ों का आदर करना सिखाएं . अपने बुजुर्गों का आदर करें इससे  गुरु ग्रह मजबूत होगा।

भगवान हनुमान और गणेश की पूजा.
 मंगल ग्रह भड़काने वाला हैं.
  (उसे भी अनुशासित उसे बनाना जा सकता  है : सुबह में हनुमान चालीसा का जाप ).
 

कुंडली किसी योग्य ज्योतिषाचार्य को दिखा  कर परामर्श लेना  चाहिए। 

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आप भी मुझे फोन कर सकते हैं  :   0731 2591308/ 09893234239 / 08861209966 /jio 08319942286 (08:00 AM- 10:00 PM के बीच) .
 

Tuesday, September 23, 2014

ज्योतिष: कुंडली से जाने नौकरी प्राप्ति का समय :सरकारी नौकरी: उच्च पद : उपाय :Astrology :The timing of receipt job :

 कुंडली से जाने नौकरी प्राप्ति का समय  नियम: प्रथम, दूसरा भाव, छठे भाव,दशम भाव एवं एकादश भाव का संबंध  या इसके स्वामी से होगा तो  नौकरी के योग बनते  है ।
डी १० चार्ट मे भी दिखना है। 
लग्न के स्वामी की दशा और अंतर्दशा में 
नवमेश की दशा या अंतर्दशा में 
षष्ठेश की दशा या, अंतर्दशा में
प्रथम,दूसरा , षष्ठम, नवम और दशम भावों में स्थित ग्रहों की दशा या अंतर्दशा में 

दशमेश की दशा या अंतर्दशा में
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में  
नौकरी मिलने के समय जिस ग्रह की दशा और अंतर्दशा चल रही है उसका संबंध किसी तरह दशम भाव या दशमेश से ।
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में भी नौकरी मिल सकती है।

छठा भाव :छठा भाव नौकरी का एवं सेवा का है।
छठे भाव का कारक भाव शनि है।
 दशम भाव या दशमेश का संबंध छठे भाव से हो तो जातक नौकरी  करता है।

राहु और केतु की दशा, या अंतर्दशा में :
जीवन की कोई भी शुभ या अशुभ घटना राहु और केतु की दशा या अंतर्दशा में हो सकती है। 
 गोचर: गुरु गोचर में दशम या दशमेश से नौकरी मिलने के समय केंद्र या त्रिकोण में ।गोचर : शनि और गुरु एक-दूसरे से केंद्र, या त्रिकोण में हों, तो नौकरी मिल सकती है,
गोचर  : नौकरी मिलने के समय शनि या गुरु का या दोनों का दशम भाव और दशमेश दोनों से या किसी एक से संबंध होता है।सरकारी नौकरी:यह जान लें कि दशम भाव बली हो तो नौकरी  .
 नौकरी के कारक ग्रहों का संबंध सूर्य व चन्द्र से हो तो जातक सरकारी नौकरी पाता है।
सूर्य. चंद्रमा व बृहस्पति
सरकारी नौकरी मै उच्च पदाधिकारी बनाता है।
द्वितीय, षष्ठ एवं दशम्‌ भाव को अर्थ-त्रिकोण सूर्य की प्रधानता होने पर  सरकारी
नौकरी करता है
 केंद्र में गुरु स्थित होने पर
सरकारी नौकरी मे  उच्च पदाधिकारी का पद प्राप्त होता है।
नौकरी  के अन्य योग :
शनि कुण्डली में बली हो  तो व्यक्ति नौकरी करता है.
मंगल
कुण्डली में बली हो तो पुलिस, खुफिया विभाग अथवा सेना में उच्च पद होने की संभावना होती है।
गुरु
कुण्डली में बली हो तो  जातक को अच्छा वकील, जज, धार्मिक प्रवक्ता , ख्याति प्राप्त ज्योतिर्विद बनाता है।
बुध
कुण्डली में बली हो तो  व्यापारी, लेखक, एकाउन्टेंट, लेखन एवं प्रकाशन, में  ।
शुक्र
कुण्डली में बली हो तो  फिल्मी कलाकार,  गायक, सौंदर्य संबंधी ।
राहु से आयात व्यापार एवं केतु से निर्यात व्यापार ।  

 कामयाबी योग :

कुंडली का पहला, दूसरा, चौथा, सातवा, नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी  अपनी दशा और अंतर्दशा में  जातक को कामयाबी प्रदान करते है।  
  फलादेश कैसे करते  है ----
  - जो ग्रह अपनी उच्च, अपनी या अपने मित्र ग्रह की राशि में हो - शुभ फलदायक होगा।
- इसके विपरीत नीच राशि में या अपने शत्रु की राशि में ग्रह अशुभफल दायक होगा।
- जो ग्रह अपनी राशि पर दृष्टि डालता है, वह शुभ फल देता है।
-त्रिकोण के स्वा‍मी सदा शुभ फल देते हैं।
- क्रूर भावों (3, 6, 11) के स्वामी सदा अशुभ फल देते हैं।
- दुष्ट स्थानों (6, 8, 12) में ग्रह अशुभ फल देते हैं।
- शुभ ग्रह केन्द्र (1, 4, 7, 10) में शुभफल देते हैं, पाप ग्रह केन्द्र में अशुभ फल देते हैं।
-बुध, राहु और केतु जिस ग्रह के साथ होते हैं, वैसा ही फल देते हैं।
- सूर्य के निकट ग्रह अस्त हो जाते हैं और अशुभ फल देते हैं। 

बाधा  के योग :
भाव   दूषित  हो तो  अशुभ फल देते है। 
ग्रह निर्बल पाप ग्रह अस्त ,शत्रु –नीच राशि  में लग्न से 6,8 12 वें भाव में स्थित हों , तो काम मे बाधा आती है |
लग्नेश बलों में कमजोर, पीड़ित, नीच, अस्त, पाप मध्य, 6,8,12वें भाव में ,तो  भी  बाधा आती है .
 

कुण्डली मे D-१०   (चार्ट ) का  भी आंकलन    करना  चाहिये
बाधक  ग्रहो को  जानकर उनका उपाय करे। 
दान ,मंत्रो का जाप,रत्न ,आदि के द्यारा।
नौकरी मिलने के लिए उपाय -- 

- तांबे के लोटे से सुबह-सुबह सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए ।   
- हनुमान जी के दर्शन करें।
-पक्षियों को जो ,बाजरा   खिलाना चाहिए।    हो सके तो   सात प्रकार के अनाजों को एकसाथ मिलाकर पक्षियों को खिलाएं। गेहूं, ज्वार, मक्का, बाजरा, चावल, दालें आदि हो सकती हैं। सुबह-सुबह यह उपाय करें, जल्दी ही नौकरी से जुड़ी समस्या पूरी हो जाएंगी।
-गाय को आटा और गुड़ खिला देवे । 
-इसलिए बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते रहना चाहिए।
- हनुमान जी तस्वीर रखें और उनकी पूजा करें। हर मंगलवार को जाकर बजरंग बाण का पाठ करें। 

-हनुमान चालीसा का पाठ करें।  -
-सुबह स्नान करते समय पानी में थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर स्नान करते हैं। 
- इंटरव्यू देने के लिए निकलने से पहले एक चम्मच दही और चीनी मुंह में  रख लें।
- गणेश जी का कोई ऐसा चित्र या मूर्ति घर में रखें या लगाएं, जिसमें उनकी सूंड़ दाईं ओर मुड़ी हो। गणेश जी की आराधना करें।

- शनिवार को शनि देव की पूजा करके आगे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें।
ॐ शं शनैश्चराय नम:
सूर्य के उपाय 
-आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करे 3 बार सूर्य के सामने
- ॐ घृणी सूर्याय नमः  का कम से कम 108 बार जप कर ले
- गायत्री का जप कर ले
- घर की पूर्व दिशा से रौशनी  आयेगी तो अच्छा रहेगा ।
-घर में तुलसी का पौधा जरूर लगा दे.
-पिता की सेवा।
-शराब और मांसाहार न खिलाये
-शिवजी ,पीपल के उपाय।

  नोट -ज्योतिषि को अपनी कुंडली दिखाइए। 

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Sunday, September 21, 2014

ज्योतिष : कुंडली से जाने :संतान प्राप्ति का समय :निःसंतान योग :संतान बाधा दूर करने के सरल उपाय: Astrology:Time of receipt children by Horoscope: obstacle to overcome by simple upay:

  ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए हमारे शास्त्रों मे कई  सूत्र दिए हैं।
 कुछ प्रमुख सूत्र इस प्रकार से  हैं।


ज्योतिषीय नियम हैं जो घटना के समय बताने  में सहायक होते हैं .
संतान प्राप्ति  का समय :
लग्न और लग्नेश को देखा  जाता  है।
घटना का संबंध किस भाव से है
भाव का स्वामी कौन  है ।
भाव का कारक ग्रह कौन है। 
भाव में कौन कौन से ग्रह हैं। 
भाव पर किस  ग्रह की दृष्टि। 
कौन से ग्रह महादशा ,अंतर्दशा, प्रत्यंतर्दशा, सूक्ष्म एवं प्राण दशा चल रही है।
भाव को प्रभावित करने वाले ग्रहों की गोचर स्थिति भी देखना चाहिये। 
 इन सभी का अध्ययन करने   से किसी भी घटना का समय जाना जा सकता है।
 संतान प्राप्ति के समय को जानने के लिए पंचम भाव, पंचमेश अर्थात पंचम भाव का स्वामी, पंचम कारक गुरु, पंचमेश, पंचम भाव में स्थित ग्रह और पंचम भाव ,पंचमेश पर दृष्टियों पर ध्यान देना चाहिए।   जातक का विवाह हो चुका हो और संतान अभी तक नहीं हुई हो , संतान का समय निकाला जा सकता है। 
पंचम भाव जिन शुभ ग्रहों से प्रभावित हो उन ग्रहों की दशा-अंतर्दशा और गोचर के शुभ रहते संतान की प्राप्ति होती है। 
गोचर में जब ग्रह पंचम भाव पर या पंचमेश पर या पंचम भाव में बैठे ग्रहों के भावों पर गोचर करता है तब संतान सुख की प्राप्ति का समय होता है।यदि गुरु गोचरवश पंचम, एकादश, नवम या लग्न में भ्रमण करे तो भी संतान लाभ की संभावना होती है। जब गोचरवश लग्नेश, पंचमेश तथा सप्तमेश एक ही राशि में भ्रमण करे तो संतान लाभ होता है।  
  संतान कब (साधारण योग): पंचमेश यदि पंचम भाव में स्थित हो या लग्नेश के निकट हो, तो विवाह के पश्चात् संतान शीघ्र होती है दूरस्थ हो तो मध्यावस्था में, अति दूर हो तो वृद्धावस्था में संतान प्राप्ति होती है। यदि पंचमेश केंद्र में हो तो यौवन के आरंभ में, पणफर में हो तो युवावस्था में और आपोक्लिम में हो तो अधिक अवस्था में संतान प्राप्ति होती है।
 पुत्र और पुत्री प्राप्ति का समय कैसे जानें? 
  संतान प्राप्ति के समय के निर्धारण में यह भी जाना जा सकता है कि पुत्र की प्राप्ति होगी या पुत्री की। यह ग्रह महादशा, अंतर्दशा और गोचर पर निर्भर करता है। यदि पंचम भाव को प्रभावित करने वाले ग्रह पुरुष कारक हों तो संतान पुत्र और यदि स्त्री कारक हों तो पुत्री होगी।पुरुष ग्रह की महादशा तथा पुरुष ग्रह की ही अंतर्दशा चल रही हो एवं कुंडली में गुरु की स्थिति अच्छी हो तो निश्चय ही पुत्र की प्राप्ति होती है। विपरीत स्थितियों में कन्या जन्म की संभावनाएं होती हैं।

जन्म कुंडली में संतान योग जन्म कुंडली में संतान विचारने के लिए पंचम भाव का अहम रोल होता है। पंचम भाव से संतान का विचार करना चाहिए। दूसरे संतान का विचार करना हो तो सप्तम भाव से करना चाहिए। तीसरी संतान के बारे में जानना हो तो अपनी जन्म कुंडली के भाग्य स्थान से विचार करना चाहिए भाग्य स्थान यानि नवम भाव से करें।

१   पंचम भाव का स्वामी स्वग्रही हो
२.
पंचम भाव पर पाप ग्रहों की दॄष्टि ना होकर शुभ ग्रहों की दॄष्टि हो अथवा स्वयं चतु सप्तम भाव को देखता हो.
३.
पंचम भाव का स्वामी कोई नीच ग्रह ना हो यदि  भाव पंचम में कोई उच्च ग्रह हो तो अति सुंदर योग होता है.
४.
पंचम भाव में कोई पाप ग्रह ना होकर शुभ ग्रह विद्यमान हों और षष्ठेश या अष्टमेश की उपस्थिति  भाव पंचम में नही होनी चाहिये.
५.
पंचम भाव का स्वामी को षष्ठ, अष्टम एवम द्वादश भाव में नहीं होना चाहिये. पंचम भाव के स्वामी के साथ कोई पाप ग्रह भी नही होना चाहिये साथ ही स्वयं पंचम भाव का स्वामी नीच का नही होना चाहिये.
६.
पंचम भाव का स्वामी उच्च राशिगत होकर केंद्र त्रिकोण में हो.
पति एवम पत्नी दोनों की कुंडलियों का अध्ययन करना चाहिए | 
सप्तमांश लग्न का स्वामी जन्म कुंडली में :बलवान ,शुभ स्थान ,सप्तमांश लग्न भी शुभ ग्रहों से युक्त  |
 ८  एकादश भाव में शुभ ग्रह बलवान हो |
संतान सुख मे परेशानी के योग :
ऊपर बताये गये  ग्रह निर्बल पाप ग्रह अस्त ,शत्रु –नीच राशि  में लग्न से 6,8 12 वें भाव में स्थित हों , तो संतान प्राप्ति में बाधा आती है | 
पंचम भाव: राशि ( वृष ,सिंह कन्या ,वृश्चिक ) हो  तो कठिनता से संतान होती है |

निःसंतान योग
 पंचम भाव में क्रूर, पापी ग्रहों की मौज़ूदगी
पंचम भाव में बृहस्पति की मौजूदगी
पंचम भाव पर क्रूर, पापी ग्रहों की दृष्टि
पंचमेश का षष्ठम, अष्टम या द्वादश में जाना
पंचमेश की पापी, क्रूर ग्रहों से युति या दृष्टि संबंध
पंचम भाव, पंचमेश व संतान कारक बृहस्पति तीनों ही पीड़ित हों 
नवमांश कुण्डली में भी पंचमेश का शत्रु, नीच आदि राशियों में स्थित होना
पंचम भाव व पंचमेश को कोई भी शुभ ग्रह न देख रहे हों संतानहीनता की स्थिति बन जाती है।
 

 पुत्र या पुत्री :
सूर्य ,मंगल, गुरु पुरुष ग्रह हैं |
शुक्र ,चन्द्र स्त्री ग्रह हैं |
 बुध और शनि नपुंसक ग्रह हैं |
 संतान योग कारक पुरुष ग्रह होने पर पुत्र होता  है।
 संतान योग कारक स्त्री ग्रह होने पर पुत्री होती  है |
शनि और बुध  योग कारक हो  पुत्र व पुत्री होती  है|
ऊपर बताये गये  ग्रह निर्बल पाप ग्रह अस्त ,शत्रु –नीच राशि  में लग्न से 6,8 12 वें भाव में स्थित हों तो ,  पुत्र या पुत्रियों की हानि होगी |

 बाधक ग्रहों की क्रूर व पापी ग्रहों की किरण रश्मियों को पंचम भाव, पंचमेश तथा संतान कारक गुरु से हटाने के लिए रत्नों का उपयोग करना होता  है। 

संतान बाधा दूर करने के सरल  उपाय:
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं गुरुवे नमः का जाप करें |
तर्जनी में गुरु रत्न पुखराज स्वर्ण में धारण  करें।
संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करे :
ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि में तनयं कृष्ण त्वामहम शरणम गतः |

जाप ,हवन. तर्पण ,ब्राह्मणों को भोजन |
गायें की सेवा करे  |
गरीब बालक, बालिकाओं को, पढ़ाएं, लिखाएं, वस्त्र, कापी, पुस्तक, दान करे 
आम, बील, आंवले, नीम, पीपल के पौधे लगाना चाहिए ।गोपाल सहस्रनाम- हरिवंश पुराण   का पाठ करना चाहिए
क्रूर ग्रह का उपाय करें।
दूध   अंजीर, सफेद प्याज का मुरब्बा  सेवन करें।
भगवान शिव का पूजन करें।
बड़े का अनादर ना करे।
धार्मिक आचरण रखना चाहिए
गरीबों को  खाना खिलाएं, दान , करें।
अनाथालय में  दान दें।
कुता  को प्यार करे।
संतान दोष अथवा पितृ दोष का  उपाय करना चाहिए 
घर का वास्तुदोष का  उपाय करे। 

हरिवंश पुराण का पाठ या संतान गोपाल मंत्र का जाप कराये .बाधक   ग्रहो के उपाय करे। सोने  का उपयोग न करे।
ताबै का उपयोग  करे।ताबै के बर्तन का पानी पीये।
मास मदिरा का सेवन ना करे। 
अनुलोम विलोन ,कपालभाति करना चाहिए   । 
खासी सरदी का  उपाय  करे। 
जब पंचम भाव में का स्वामी सप्तम में तथा सप्तमेश सभी क्रूर ग्रह से युक्त हो तो वह स्त्री मां नहीं बन पाती।
 क्रूर ग्रह , बाधाकारक ग्रहों  का जाप ,दान ,हवन ,करने से संतान  की प्राप्ति हो सकती  है
सूर्य :
पितृ पीड़ा
पितृ शान्ति के लिए  पिंड दान |
हरिवंश पुराण का श्रवण करें |
रविवार को  गेंहु,गुड ,केसर ,लाल चन्दन ,लाल वस्त्र ,ताम्बा,दान करे  |
गायत्री जाप करे।
ताम्बे के पात्र में ,जल में , लाल चन्दन ,लाल पुष्प ड़ाल कर नित्य सूर्य को अर्घ्य  कराना
चाहियें  |
चन्द्र : माता का शाप  है। 

गायत्री का जाप करें |
मोती चांदी की अंगूठी में  अनामिका या कनिष्टिका अंगुली में धारण करें |
सोमवार के नमक रहित व्रत |
सोमवार को चावल ,चीनी ,आटा, श्वेत वस्त्र ,दूध दही ,नमक ,चांदी  का दान करें |
मंगल : भ्राता का शाप  . 

रामायण का पाठ करें | 
मूंगा  सोने या ताम्बे  की अंगूठी में अनामिका अंगुली में धारण करें |
मंगलवार के नमक रहित व्रत रखें
मंगलवार को गुड  ,लाल रंग का वस्त्र और फल ,ताम्बे का पात्र ,सिन्दूर , मसूर की दाल  का दान करें |
बुध : मामा का शाप  

विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें |
पन्ना सोने या चांदी की अंगूठी में बुधवार को कनिष्टिका अंगुली में  |
बुधवार  के नमक रहित व्रत।
बुधवार को कर्पूर,घी, खांड, ,हरे  रंग का वस्त्र ,कांसे का पात्र ,साबुत मूंग  का दान करें |
बृहस्पति : गुरु ,ब्राह्मण का शाप. 
पुखराज सोने  गुरुवार को  तर्जनी अंगुली में  |
गुरूवार के नमक रहित व्रत। .
गुरूवार को घी, हल्दी, चने की दाल , पीत रंग का वस्त्र का दान करें | 

गुरु का सत्कार करें |
शुक्र :  स्त्री को कष्ट देना है।
गौ दान  
करें | 
ब्राह्मण दंपत्ति दान  करें |
हीरा
या (जरकन )प्लैटिनम या चांदी की अंगूठी शुक्रवार को मध्यमा अंगुली में धारण करें |
शुक्रवार  के नमक रहित व्रत। 
शुक्रवार को  आटा ,चावल दूध ,दही, मिश्री ,श्वेत चन्दन ,इत्र, श्वेत रंग का वस्त्र ,चांदी का दान करना 
चाहियें |
शनि : प्रेत बाधा है
रुद्राभिषेक करें | 

नीलम या   लाजवर्त मध्यमा अंगुली में धारण करें |
कील  का छल्ला पहने |
शनिवार के नमक रहित व्रत रखें |
शनिवार को काले उडद ,तिल ,तेल ,लोहा,काले जूते ,काला कम्बल , काले  रंग का वस्त्र का दान करें |
श्री हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करना करे।

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