Tuesday, June 13, 2017

ज्योतिषी सलाह : वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा ,विवाह कब होगा, हमारा तलाक तो ना होगा : Astrologer advice:How will the marital life ? When will be marriage or divorce

 ज्योतिषी सलाह : वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा ,विवाह कब होगा, हमारा तलाक तो ना होगा : Astrologer advice:How will the marital life ? When will be marriage or  divorce:
ज्योतिषी सलाह में आज हम बात करेंगे वैवाहिक जीवन के बारे में  अर्थात हमारा कुंडली के हिसाब से वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा ,विवाह कब होगा, हमारा तलाक तो ना होगा , और अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए क्या उपाय करना होगा, इन सब पहलुओं पर कुंडली के हिसाब से विश्लेषण करके हम पता लगाने की कोशिश करेंगे .सर्वप्रथम हम कुंडली में विवाहित जीवन के लिए प्रथम भाव और सप्तम भाव ,साथ   नवम भाव पर भी विचार करते हैं, साथ-साथ में चतुर्थ भाव पंचम भाव का द्वादश भाव पर विचार करते हैं। इन सब भावो में सप्तम भाव बहुत महत्वपूर्ण है। 
अब हम जानने की कोशिश करेंगे कि हमारा विवाह कब होगा इसके लिए हमें दशाओं पर विचार करते हैं. हम यह पता लगाते हैं कि वर्तमान में किस ग्रह की दशा चल रही है। अगर चंद्र ,गुरु और शुक्र की दशा चल रही है तो विवाह होने के योग बनते हैं उसके पश्चात सप्तमेश अर्थात सप्तम भाव के स्वामी की बात करेंगे ,अगर सप्तम भाव के स्वामी की दशा चल रही है तब भी विवाह होता है। इसके पश्चात दूसरे भाव के स्वामी जिस राशि में बैठते हैं उस उस भाव के स्वामी की दशा में विवाह होता है। सप्तमेश अगर राहु या केतु से युक्त हो तो इसकी  दशा में विवाह होता है. नवम भाव के स्वामी और दशम भाव के स्वामी की दशा में विवाह होता है। अब हम गोचर के बारे में बात करेंगे अगर कुंडली के हिसाब से जातक के विवाह का समय आ गया होगा तो हम गोचर में गुरु और शनि के बारे में विचार करेंगे। जब गोचरवश शनि और गुरु ,लग्न और लग्नेश तथा सप्तम भाव और सप्तमेश पर गोचर करते हैं तब शादी के योग बनते हैं। गुरु का गोचर जन्म कुंडली के पंचम भाव और पंचम भाव के स्वामी से विचरण करता है तब भी विवाह के योग बनते हैं। गोचर का गुरु जब नवम भाव और नवम भाव के स्वामी पर विचरण करता है तब भी विवाह के योग बनते हैं. जब गोचर का गुरु प्रथम भाव, पंचम भाव नवम भाव, एकादश भाव तथा तृतीय भाव पर विचरण करें तब भी विवाह के योग बनते हैं।
 अब हम बात करेंगे कि हमारा वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा इसके लिए हम कुंडली में  लग्न और चंद्रलग्न दोनों कुंडलियां को आधार मानकर लग्न कुंडली का और चंद्र कुंडली का सप्तमेश, शुक्र ,चंद्रमा की स्थिति के बारे में जानेंगे, अगर इन सब की  अच्छी स्थिति होने पर वैवाहिक जीवन सुख में रहता है। परंतु यदि  सप्तम भाव पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो ,यहां पापी ग्रहों की दृष्टि सप्तम भाव पर हो तो हमारा व्यवहारिक जीवन दुख में होता है। हमारा व्यवहारिक जीवन सुखमय तब होगा जब सप्तम भाव पर ग्रहों का दृष्टि संबंध न बने ,तथा सप्तम भाव का स्वामी केंद्र भाव में या त्रिकोण में हो या ग्यारहवें भाव में हो तो हमारा विवाहित जीवन सुखमय होगा। केंद्र का मतलब पहला भाव ,चौथा भाव, सातवां भाव ,दसवां भाव तथा त्रिकोण का मतलब पांचवा भाव, नवा भाव होता है ,इसका मतलब यह है  की , सप्तम भाव का स्वामी इन  भावो मे बैठा हो तो हमारा वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। सप्तमेश और सप्तम भाव के बली होने पर हमारा वैवाहिक जीवन अच्छा रहता है। 
अब हम जानेंगे कि कुंडली में तलाक के योग तो नहीं बन रहे हैं या हमारा वैवाहिक जीवन अलगाववादी तो नहीं हो रहा है ,तो हमें कुंडली में सप्तम भाव ,सप्तम भाव के स्वामी तथा शुक्र पर पापी ग्रहों का प्रभाव होगा तो तलाक हो सकता है ,जैसे कि ऊपर बताए गए सप्तम भाव उसके स्वामी और शुक्र के साथ में शनि राहु ,सूर्य राहु का प्रभाव होगा तो अलगाववादी प्रवत्ति आएगी। चौथा भाव और द्वितीय भाव पर भी  इस प्रकार से पापी ग्रहों का प्रभाव होगा तब भी अलगाव की स्थिति बन सकती है। 
कुंडली में हम शादी के पहले कुंडली मिलान ठीक से करना चाहिए अगर कुंडली मिलान ठीक से की जाए तथा शुभ मुहूर्त में शादी की जाए वह हमें तलाक से बचाती। जहां विवाह विच्छेद के योग कुंडली में इस तरह से भी देख सकते हैं ,राहु और केतु का प्रभाव सप्तमेश पर ,द्वितीय पर होने पर.
 स्त्री जातक की कुंडली में सप्तम भाव पर राहु, मंगल और सूर्य में से एक या दो अथवा तीनों ग्रहों का प्रभाव होने पर विवाह में परेशानी के योग बनते हैं। युवाओं में अब हम सुखी वैवाहिक जीवन बनाने के लिए कुंडली में ,यह देखे की प्रथम सप्तम भाव में स्थित राशियां और उनके स्वामी एक दूसरे के मित्र हो तो उनका वैवाहिक जीवन ठीक रहता है। अगर लग्नेश सप्तम भाव में स्थित हो तो पत्नी आपका अनुसरण करेगी। अगर पत्नी की कुंडली में सप्तम अष्टम और नवम भाव शुभ ग्रहों से युक्त हो तो वह सौभाग्यवती, पुत्रवती ,धनी होती है। कुंडली के लग्न भाव में चंद्रमा ,बुध , गुरु ,शुक्र का प्रभाव हो तो स्त्री सर्वगुण संपन्न होती है,तथा जीवन सदा सुख में रहता है। 
अब हम बात करेंगे कि हमारी शादी को सुखमय कैसे बनाएं ,इसके लिए वर और कन्या की कुंडली को मिलान करते है, लगभग दोनों की आयु में अधिक अंतर ना हो, मांगलिक वर-वधुओं की कुंडली में दोनों का मांगलिक होना चाहिए। कुंडली मिलान में नाड़ी दोष पर भी विचार करना चाहिए। कुंडली में दरिद्र योग  , व्यभिचार योग और संतान भाव का योग इन का विश्लेषण करना चाहिए।  विवाह के पश्चात पति-पत्नी को  गणेश जी की आराधना करना चाहिए और अपनी कुंडली के हिसाब से मुख्य ग्रह और इष्ट देवता दोनों को जानकर ,मुख्य ग्रह को मजबूत करना चाहिए और इष्ट देवता की हमेशा आराधना करते रहना चाहिए।  समय-समय पर अपने कुल देवता और कुल देवी का  पूजन करना चाहिए।  कुंडली के हिसाब से भाग्यशाली रत्न को धारण करना चाहिए। समय-समय पर  तीर्थ स्थानों का भ्रमण करना चाहिए तथा स्नान ,दान करना चाहिए।  माता पिता और गुरुजनों का सदा सम्मान और सेवा करनी चाहिए। गौ माता , कुंवारी कन्याओं का आदर सत्कार करते हुए अन्न - वस्त्र ,भोजन आदि करना चाहिए। इस प्रकार हमने देखा विवाहित जीवन सुखमय रहे इसके लिए कुंडली विश्लेषण अच्छे ज्योतिषी से करवाएं। 
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1 comment:

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