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Monday, July 10, 2017

ज्योतिषी सलाह :धन की स्थिति : Astrologer Advice: Money status:

ज्योतिषी सलाह :धन की स्थिति : Astrologer Advice: Money status: 


Astrologer Housi lal chourey:
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कुंडली विश्लेषण में हम चर्चा कर रहे हैं कि जातक की कुंडली में धन की स्थिति क्या रहेगी ।इसके लिए जातक की कुंडली में लग्न भाव एवं लग्नेश ,धन भाव और धनेश ,नवम भाव और नवम भाव के स्वामी की स्थिति कुंडली में कैसी है  यह देखना होता है ।ऊपर बताए गए भाव और उनके स्वामी अगर उच्च के हो ,स्व राशी में हो शुभ स्थिति में हो तो धन की स्थिति अच्छी रहती ह। यदि ऊपर बताए हुए भाव और उनके स्वामी नीच के हों, अस्त और वक्री हो और पाप प्रभाव में हो तो जातक की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है । कुंडली में ऊपर बताए गए भावो के  स्वामी की दशा अंतर्दशा चल रही होगी तो तब हमारी आर्थिक स्थिति का पता चलता हैं। शुभ ग्रहों की ,उच्च ग्रहों की दशा अंतर्दशा में जातक को धन की प्राप्ति होती है ।इसके विपरीत ऊपर के भावो में अस्त ग्रह ,वक्री ग्रह नीच राशि के ग्रह ,की दशा अंतर्दशा में जातक की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है ।अतः ज्यादा जानकारी के लिए  वीडियो को देखिए और जानकारी प्राप्त कीजिए। धन्यवाद।

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ज्योतिषी सलाह: ज्योतिषी बनने की संभावनाएं :Astrologer Advice: Chances of Being Astrologer

ज्योतिषी सलाह: ज्योतिषी बनने की संभावनाएं :Astrologer Advice: Chances of Being Astrologer 
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कुंडली विश्लेषण में आज हम चर्चा कर रहे हैं कि हमारी कुंडली में , ज्योतिषी बनने की संभावनाएं है या नहीं यह जानकारी के लिए हम जातक की कुंडली में लग्न भाव जो कि व्यक्ति का व्यक्तित्व दिखाता है ,इसके पश्चात हम पंचम भाव जो कि जातक की विद्या, बुद्धि ,निर्णय शक्ति आदि के बारे में दर्शाता है को देखते हैं ।अष्टम भाव जोकि जातक के अंदर की बात को जानकर उसे बताता है। इसके साथ-साथ इन भावों के स्वामियों की अच्छी स्थिति अर्थात अर्थात केंद्र में या त्रिकोण में होनी चाहिए और यह ग्रह उच्च राशि में स्व राशि मैं मूल त्रिकोण राशि में और अच्छे ग्रहों से दृष्ट हो ।शनि ग्रह बुध ग्रह और गुरु ग्रह की भी अहम भूमिका होती है ।इन ग्रहों का ऊपर बताए हुए भाव से संबंध बनता है तो व्यक्ति में अर्थात जातक में ज्योतिषी बनने की संभावना है बनती है ।धन्यवाद।

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Sunday, July 9, 2017

ज्योतिषी सलाह :फिल्म और टीवी में संभावनाएं के योग :Astrologer Advice: Possibilities in film and TV:

ज्योतिषी सलाह :फिल्म और टीवी में संभावनाएं के योग :Astrologer Advice: Possibilities in film and TV:


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कुंडली विश्लेषण मैं ,आज हम चर्चा कर रहे हैं फिल्म और टीवी लाइन में सफलता के लिए कुंडली में हमें कौन से भाव तथा ग्रह योग को देखना होता है ।इसके लिए कुंडली का प्रथम भाव ,दूसरा भाव, पांचवा भाव नवा भाव दसवां भाव और 11 भाव को देखना होता ह।साथ साथ में कारक ग्रह शुक्र तथा दूसरे ग्रह बुद्ध चंद्रमा मंगल शनि को भी देखना होता है ।क्योंकि शुक्र ग्रह फिल्म लाइन का कारक है ,बुध ग्रह आपकी वाणी का कारक है, शनि ग्रह आपका परिश्रम का कारक है ,मंगल ग्रह से हम पराक्रम और हिम्मत देखते हैं ,चंद्रग्रह से आपका रंग और स्वभाव देखते हैं और पंचम भाव जो मनोरंजन का कारक है उसको भी देखते हैं। कुंडली में ऊपर बताए गए भावों और करो
 ग्रहो को देखकर हम बता सकते हैं कि जातक का  फिल्म लाइन या TV में कैरियर कैसा रहेगा :धन्यवाद:
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ज्योतिषी सलाह: राजनीति से जुड़ने के योग: Astrologer Advice: Yoga possibilities of joining politics:

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कुंडली विश्लेषण मैं आज हम चर्चा कर रहे हैं राजनीति मैं जुड़ने के लिए कुंडली में कौन से भाव और ग्रह को देखेंगे इसके लिए कुंडली का प्रथम भाव ,द्वितीय तृतीय पंचम षष्ठ नवम दशम और एकादश भाव तथा उनके स्वामी ग्रह को देखना होता ह।क्योंकि लग्न भाव खुद का व्यक्तित्व बताता है दूसरा भाव भाषण देने की कला को बताता है ।तीसरा भाव साहस का प्रतीक है ।पंचम भाव नीति और न्याय का है नवम भाव भाग्य का, दशम भाव राज्य और सरकार का ,एकादश भाव उच्च पद को दर्शाता है इसके साथ हम ग्रहो को देखेंगे सूर्य ग्रह सत्ता का है ,मान प्रतिष्ठा का है ,इसका बलवान होना जरूरी है ।गुरु ग्रह समाज सेवा का है तथा सत्ता का कारक है ।शनि ग्रह शक्ति का, मंगल ग्रह साहस और नेतृत्व का है जो कि राजनीति में महत्वपूर्ण है। इसका बलवान होना बहुत जरुरी है ,यह उच्च का होगा स्व राशि का होगा,  केंद्र त्रिकोण में हो होगा तो ,राजनीति में सफल बनाएगा।  राहु ग्रह छल कपट का और राजनीति का ग्रह है ,यह शत्रु का नाश करता है और विजय भी दिलवाता ह,यह शुभ और
 बलवान होना चाहिए ,केंद्र और त्रिकोण में इसकी उपस्थिति राजनीति में सफल बनाती हैं ।कुंडली में पंच महापुरुष योग ,बुधादित्य योग ,केंद्र त्रिकोण के योग आदि का होना सफल राजनीति का कारक होता है।शनि राहु का संबंध लग्न में लग्नेशसे हो, दशम भाव और दशमेश से होना सफल राजनीति के लिए जरूरी है ।अधिक जानकारी के लिए वीडियो देखिए ।धन्यवाद।

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ज्योतिषी सलाह: खिलाडी बनने के योग और संभावनाएं: Astrologer Advice: prospects of becoming a player

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कुंडली विश्लेषण में आज हम चर्चा करेंगे खिलाड़ी बनने के योग और संभावनाएं ।इसके लिए जातक की कुंडली में लग्न भाव को देखते हैं जो कि शरीर है जिसका कि स्वस्थ रहना जरूरी है अतः लग्न और लग्नेश का बलवान होना चाहिए ।तृतीय भाव पराक्रम का है तथा तृतीयईश यह दोनों बलवान होने पर जातक बाहुबली होता है। साथ साथ में मंगल भी स्ट्रांग होना चाहिए। पंचम भाव बलवान होने पर यश मान प्रतिष्ठा प्राप्त होती है ।चतुर्थ भाव लोकप्रियता के लिए देखते हैं ।दशम भाव कार्यक्षमता का भाव है ,दशम भाव में शनि मंगल सूर्य और राहु रहने से व्यक्ति कर्मनिष्ठ रहता है और अपने कार्य में सफल होता है ।नवम भाव सफलता का भाव है ।यह भाव भी बलवान होना चाहिए ।ग्रहो में सूर्य शनि मंगल बलवान होने पर Khiladi  को जीवन में सफल होने की कोशिश करता है ।लग्नकुंडली अगर मेष वृषभ कर्क तुला वृश्चिक मकर लग्न की हो तो जातक ज्यादा सफल होते हैं ।सफलता के लिए हमें ऊपर बताए गए भावों की तथा ग्रहों की एक दूसरे से संबंध होना ,केंद्र में होना त्रिकोण में होना  और एक दूसरे के राशि परिवर्तन हो तो यह राजयोग देते है,और हमें खिलाड़ी बनने में मददगार होते हैं और हम अपना कैरियर खेल के मैदान में बना सकते हैं इस प्रकार हमने देखा लग्न भाव तृतीय भाव पंचम भाव छठा भाव दशम भाव और 11 भाव का बलवान होना जरूरी होता है और अधिक जानकारी के लिए मेरा वीडियो देखिए और अच्छा लगे तो मेरा चैनल एस्ट्रोलॉजी सिंपलफाइट को सब्सक्राइब कीजिए और इसकी जानकारी अपनों को दीजिए ।धन्यवाद।

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Saturday, July 8, 2017

ज्योतिषी सलाह :मदिरापान की आदत:Astrologer Advice:Drinking Habit:

ज्योतिषी सलाह :मदिरापान की आदत:Astrologer Advice:Drinking Habit: 

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कुंडली विश्लेषण में आज हम चर्चा करेंगे मदिरापान की आदत ड्रिंकिंग हैबिट इसके लिए जातक की कुंडली में प्रथम भाव द्वितीय भाव प्रथम भाव का स्वामी द्वितीय भाव का स्वामी और कारक ग्रह शनि राहु और मंगल को देखते हैं तथा शुक्र चंद्र बुध गुरु का पाप प्रभाव में आना इन सबका कुंडली विश्लेषण करके हम जान सकते हैं की जातक को मदिरापान की आदत है या नहीं इस तरह आप अपनी कुंडली योग्य ज्योतिषी  को  दिखाकर उनका उचित मार्गदर्शन लेकर पापी ग्रहों का उपाय करके इस हालत से छुटकारा पा सकते हैं धन्यवाद।

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ज्योतिषी सलाह : अष्टम भाव के बारे में:Astrologer Advice: About the eighth house:

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कुंडली विश्लेषणआज हम चर्चा कर रहे हैं अष्टम भाव के बारे में ,कुंडली में अष्टम भाव हमें क्या-क्या जानकारी दे सकता है, अष्टम भाव से हम हमें अचानक धन प्राप्ति की जानकारी होती है ।
अष्टम भाव से हमें विदेश में जाकर नौकरी का पता लगता है ।
अष्टम भाव से हमारी आयु का निर्णय होता है ,हमें मृत्यु के कारण की भी जानकारी मिलती है।
 अष्टम भाव का संबंध लग्न और पंचम भाव से होता है तो जातक गूढ़ विद्याओं का ज्ञाता होता है ।
पंचम भाव, अष्टम भाव ,पंचमेश ,अष्टमेश का आपसी संबंध बनता है तो जातक को आकस्मिक धन प्राप्ति होती है ,ऐसे योग में जातक को शेयर मार्केट, सट्टेबाजी ,लॉटरी आदि से भी धन प्राप्त होता है ।

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ज्योतिषी सलाह : प्रेम विवाह योग :Astrologer Advice: Love Marriage Yoga:

ज्योतिषी सलाह : प्रेम विवाह योग :Astrologer Advice: Love Marriage Yoga:

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कुंडली विश्लेषण  ,ज्योतिषी सलाह :आज हम प्रेम विवाह की चर्चा करेंगे ,आजकल बहुत से जातक यह जानने की कोशिश करते हैं कि हमारा प्रेम विवाह होगा या नहीं इसके लिए हम जातक की कुंडली में नीचे बताए गए सूत्रों को देखते हैं ।
कुंडली में पंचम भाव से प्रेम संबंधों का पता चलता है जबकि सप्तम भाव से विवाह का पता चलता है ,शुक्र सप्तम भाव का कारक ग्रह अतः जातक के कुंडली में पंचम भाव के स्वामी तथा सप्तम भाव के स्वामी और शुक्र का शुभ संयोग होता है तो दोनों जातकका प्रेम संबंध संभव हो जाता है,   शुक्र सप्तमेश से संबंधित होकर पंचम भाव में बैठा हो तो प्रेम विवाह संभव है ,पंचमेश और सप्तमेश की युति या राशि परिवर्तन हो तो प्रेम विवाह संभव है ।
पंचमेश और सप्तमेश की युति या राशि परिवर्तन हो तो प्रेम विवाह संभव होता है ।

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Friday, July 7, 2017

ज्योतिषी सलाह : विवाह में विलंब और कलह: Astrologer Advice: Delay and Discord (Problem/Unhappy) in Marriage

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कुंडली विश्लेषण:आज हम चर्चा करेंगे कि विवाह में विलंब और कलह  के क्या कारण होते है।आज हम कुंडली विश्लेषण में जातक की कुंडली में विवाह में विलंब क्यों होता है  तथा विवाह होने के बाद कलह क्यों किस कारण से होता है।इसके लिए हम जातक की कुंडली में लग्न भाव ,द्वितीय भाव ,सप्तम भाव आदि को देखना होता है। पुरुष की कुंडली में शुक्र शादी का कारक होता है तथा स्त्री की कुंडली में गुरु शादी का कारक होता है। सप्तम भाव तथा सप्तमेश अगर पाप ग्रहों से प्रभावित होगा तथा सप्तमेश छठे भाव में बैठा होगा तो शादी मैं देर से होगी तथा शादी के बाद  कलह होता रहेगा ।
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ज्योतिषी सलाह : कष्ट और दुर्घटनाये का विश्लेषण:Astrologer Advice: Analysis of Pains and Accidents:

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कुंडली विश्लेषण:ज्योतिषी सलाह :आज हम कुंडली के द्वारा यह जानने की कोशिश करेंगे कि हमारा जीवन कष्ट में मैं क्यों रहता है ,उसके लिए कुंडली में कौन से भाव तथा ग्रह जिम्मेदार ,जो कि हमें दुर्घटनाएं ,शत्रुभय , विपत्ति ,क्लेश, अवसाद, रोग ,कारागार आदि ,दुखदाई परिस्थितियां पैदा करता है।
इन सब का विचार कुंडली के प्रथम भाव, षष्टम भाव ,अष्टम भाव तथा द्वादश भाव से किया जाता है ।
 इसके साथ-साथ इन भाव के स्वामी की स्थिति का अवलोकन किया जाता है ।
ग्रहो में शनि मंगल राहु मुख्य रूप से कष्ट देते हैं, इनकी स्थिति भी कुंडली में देखी जाती है ।

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Thursday, February 12, 2015

ज्योतिष :सुदर्शन कुंडली : सुदर्शन चक्र :Astrology: Sudarshan Horoscope: Sudarshan kundali:video

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Tuesday, October 21, 2014

कुंडली से जाने : इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर तकनीकी क्षेत्र में कैरियर :नौकरी प्राप्ति का समय: कामयाबी योग :Engineering education to achieve career:When to get Jobs,: video


Astrologer Housi Lal Chourey  कुंडली से जाने : इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर तकनीकी क्षेत्र में कैरियर :नौकरी प्राप्ति का समय: कामयाबी योग :Engineering education to achieve career:When to get Jobs,
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 कुंडली से जाने  इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर तकनीकी क्षेत्र में कैरियर :नौकरी प्राप्ति का समय: कामयाबी योग: 
 नीचे  बताई गये पॉइंट्स को कुंडली मे देख  कर विश्लेशण करना होता है। 
इंजीनियरिंग की शिक्षा: शिक्षा और कैरियर के निर्धारण : 
इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर तकनीकी क्षेत्र में कैरियर बनने संबंधी शिक्षा: लग्न, लग्नेश, चतुर्थ, चतुर्थेश, पंचम, पंचमेश, दशम भाव या दशमेश का बुध ,शुक्र, मंगल, शनि राहू केतु से संबंध होता है। ,
पंचमेश की बहुत महत्वपूर्ण है। बुद्धि, प्रसिद्धि, जीवन का स्तर, सफलता।
उच्च शिक्षा : बुध या शुभ ग्रह लग्न, चौथे, पांचवें, सातवें, भाग्य ,दशम भावमे  बलवान-स्वग्रही उच्च का होना चाहिए।
 चंद्र, गुरु एवं शुक्र ग्रह का शुभ योग हो तो वह व्यक्ति सफलता प्राप्त कर आर्थिक स्थिति मजबूत करता है।

बुध: तर्क शक्ति, ज्ञान एवं निर्णय शक्ति का कारक है.
इंजीनियर के कारक:
मंगल  :भूमिपुत्र मंगल खनिज, रंग, रसायन, फार्मेसी, धातु, सीमेंट तथा फैक्टरियों का कारक ग्रह है .
शनि :मशीनरी, लोाहा, पत्थर, मजदूरी, प्रधान धंधा, हार्डवेयर, लकड़ी, शस्त्र, ईंट, इलेक्ट्रिकल कार्योंं का कारक है।
पहले,चौथे, पांचवे, दसवें भाव एवं इनके स्वामियों का सम्बन्ध मंगल, शनि, राहु, केतु से  होना चाहिए।
 भाव : दशम भाव (कर्म का भाव) ,
 सप्तम भाव :(दशम से दशम) ,
 षष्ठ भाव :(दशम से नवम यानि कर्म का भाग्य भाव) .
 ग्रह :दशमेश ग्रह  दशम भाव पर प्रभाव डालने वाले ग्रह ,
बलवान ग्रह (षड्बली) .
 
इंजीनियर के कारक ग्रह - शुक्र, मंगल, राहू केतु , शनि .

बुध :बुद्धि व गणना का कारक ग्रह .
गुरु :ज्ञानकारक ग्रह .
 कैरियर के लिए 2, 6, 10 भाव का आपस में संबंध
 कैरियर निर्धारण : जन्म कुंडली, चंद्र कुंडली, सूर्य कुंडली में जो अधिक बली हो ।

 मंगल, सूर्य :को बलवान होना इंजीनियर,
मंगल बुध : इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का कारक
 मंगल :बिजली .

 बुध :को शिल्प, तर्क, गणना .
 शनि : तकनीकी काम व यन्त्रों .
 युति  :सूर्य मंगल  इंजिनियर .
शिक्षाभाव: दूसरे, चौथे ,पांचवे , नवम भाव:
दशमी भाव :आजीविका और कैरियर  ,
लग्न कुंडली के दशमस्थ ग्रह या दशमेश तथा दशमांश कुंडली (डी-10) के दशमस्थ ग्रह या दशमेश  
षष्ठ भाव :सेवा तथा नौकरी
द्वितीय भाव :धन
पंचम घर / पंचमेश से दशम व दशमेश का संबध
मंगल ,शनि  राहु/ केतु ,इंजिनियरों की कुण्डली में होता है.
दशाएं : ,दशमेश /दशम भाव में बैठे ग्रहों .

 शिक्षा के कारक :गुरु, बुध, मंगल,
 किसी भी जन्म कुंडली में दशम भाव ही कर्म का भाव कहलाता है।
 नवम भाव भाग्य भाव है।
नवमांश व दशमांश 

 कुंडली से जाने नौकरी प्राप्ति का समय  नियम:
 प्रथम, दूसरा भाव, छठे भाव,दशम भाव एवं एकादश भाव का संबंध  या इसके स्वामी से होगा तो  नौकरी के योग बनते  है ।
डी १० चार्ट मे भी दिखना है।
लग्न के स्वामी की दशा और अंतर्दशा में
नवमेश की दशा या अंतर्दशा में
षष्ठेश की दशा या, अंतर्दशा में
प्रथम,दूसरा , षष्ठम, नवम और दशम भावों में स्थित ग्रहों की दशा या अंतर्दशा में
दशमेश की दशा या अंतर्दशा में
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में
नौकरी मिलने के समय जिस ग्रह की दशा और अंतर्दशा चल रही है उसका संबंध किसी तरह दशम भाव या दशमेश से ।
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में भी नौकरी मिल सकती है।
राहु और केतु की दशा, या अंतर्दशा में :  

 गोचर: गुरु गोचर में दशम या दशमेश से नौकरी मिलने के समय केंद्र या त्रिकोण में ।
गोचर : शनि और गुरु एक-दूसरे से केंद्र, या त्रिकोण में हों, तो नौकरी मिल सकती है,
कामयाबी योग :
कुंडली का पहला, दूसरा, चौथा, सातवा, नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी  अपनी दशा और अंतर्दशा में  जातक को कामयाबी प्रदान करते है। 


 1.सूर्य: लोक प्रशासन ,राजनीति ,अर्थशास्त्र,गणित ,मौसम ,वनस्पति विज्ञान ,पशु चिकित्सा ,दवा संबंधी युद्ध संबंधी विषय आदि.
2.चंद्र : गृह विज्ञान,साहित्य,पशुपालन ,मनोविज्ञान ,नर्सिंग ,जल संबंधी,साज़ सज्जा ,शहद , छोटे बच्चों की देखभाल संबंधी विषय भोज्य पदार्थ संबंधी विषय ,व वस्त्र आदि से संबंधित.
3.मंगल : खनिज संबंधी ,ऑटो मोबाइल ,सेना ,पुलिस ,धातु ,पेट्रोलियम ,शारीरिक शिक्षा,व्यायाम ,फिजियोथेरेपी,धरती के अंदर होने वाले कार्यों से संबंधी आदि विषय.
4.बुध : बैंकिंग ,संचार , त्वचा संबंधी ,पत्र्कारिक्ता,शिक्षा,साँस संबंधी विषय,अर्थशास्त्र, कर्मकांड,पैसे संबंधी ,टैक्स आदि से संबंधित विषय.
5.गुरु: शिक्षा ,ज्योतिष ,क़ानून ,चिकित्सा ,व्याकरण,देखभाल ,प्रबंधन आदि संबंधित ..
6. शुक्र : फ़िल्म ,शरीर कि सुंदरता संबंधी ,नाटक ,एनिमेशन ,वस्त्र ,भोजन संबंधी वा लगभग वो सभी विषय जो चंद्र से भी जुड़े होते हैं .
7.शनि :इतिहास ,कृषि ,लेब टेस्ट आदि से संबंधी ,चमड़ा ,सिविल ,कंप्यूटर,अस्पताल ,एरोनाटिकल,विधि शाश्त्र ,कैंसर ,प्रबंधन ,मनोविज्ञान ,बाज़ार से संबंधी विषय.
8.राहू: पुरातत्व ,विषाणु संबंधी, दूरसंचार , इंजीनियरिंग ,जादू टोना ,रहश्य्मय विषय ,बॉयोटेक्नोलॉजी ,तकनीकी काम,रेडियोलॉजी  आदि. 


. नौकरी के कारक ग्रहों का संबंध सूर्य व चन्द्र से हो तो जातक सरकारी नौकरी पाता है।
सूर्य. चंद्रमा व बृहस्पति सरकारी नौकरी मै उच्च पदाधिकारी बनाता है।
द्वितीय, षष्ठ एवं दशम्‌ भाव को अर्थ-त्रिकोण सूर्य की प्रधानता होने पर  सरकारी
नौकरी करता है।
 केंद्र में गुरु स्थित होने पर
सरकारी नौकरी मे  उच्च पदाधिकारी का पद प्राप्त होता है।
नौकरी  के अन्य योग :
शनि कुण्डली में बली हो  तो व्यक्ति नौकरी करता है.
मंगल
कुण्डली में बली हो तो पुलिस, खुफिया विभाग अथवा सेना में उच्च पद होने की संभावना होती है।
गुरु
कुण्डली में बली हो तो  जातक को अच्छा वकील, जज, धार्मिक प्रवक्ता , ख्याति प्राप्त ज्योतिर्विद बनाता है।
बुध
कुण्डली में बली हो तो  व्यापारी, लेखक, एकाउन्टेंट, लेखन एवं प्रकाशन, में  ।
शुक्र
कुण्डली में बली हो तो  फिल्मी कलाकार,  गायक, सौंदर्य संबंधी ।
राहु से आयात व्यापार एवं केतु से निर्यात व्यापार ।  


  फलादेश कैसे करते  है ----
  - जो ग्रह अपनी उच्च, अपनी या अपने मित्र ग्रह की राशि में हो - शुभ फलदायक होगा।
- इसके विपरीत नीच राशि में या अपने शत्रु की राशि में ग्रह अशुभफल दायक होगा।
- जो ग्रह अपनी राशि पर दृष्टि डालता है, वह शुभ फल देता है।
-त्रिकोण के स्वा‍मी सदा शुभ फल देते हैं।
- क्रूर भावों (3, 6, 11) के स्वामी सदा अशुभ फल देते हैं।
- दुष्ट स्थानों (6, 8, 12) में ग्रह अशुभ फल देते हैं।
- शुभ ग्रह केन्द्र (1, 4, 7, 10) में शुभफल देते हैं, पाप ग्रह केन्द्र में अशुभ फल देते हैं।
-बुध, राहु और केतु जिस ग्रह के साथ होते हैं, वैसा ही फल देते हैं।
- सूर्य के निकट ग्रह अस्त हो जाते हैं और अशुभ फल देते हैं। 

बाधा  के योग :
भाव   दूषित  हो तो  अशुभ फल देते है। 
ग्रह निर्बल पाप ग्रह अस्त ,शत्रु –नीच राशि  में लग्न से 6,8 12 वें भाव में स्थित हों , तो काम मे बाधा आती है |
लग्नेश बलों में कमजोर, पीड़ित, नीच, अस्त, पाप मध्य, 6,8,12वें भाव में ,तो  भी  बाधा आती है .
 

कुण्डली मे D-१०   (चार्ट ) का  भी आंकलन    करना  चाहिये ।
बाधक  ग्रहो को  जानकर उनका उपाय करे। 
दान ,मंत्रो का जाप,रत्न ,आदि के द्यारा।
नौकरी मिलने के लिए उपाय -- 

- तांबे के लोटे से सुबह-सुबह सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए ।   
- हनुमान जी के दर्शन करें।
-पक्षियों को जो ,बाजरा   खिलाना चाहिए।    हो सके तो   सात प्रकार के अनाजों को एकसाथ मिलाकर पक्षियों को खिलाएं। गेहूं, ज्वार, मक्का, बाजरा, चावल, दालें आदि हो सकती हैं। सुबह-सुबह यह उपाय करें, जल्दी ही नौकरी से जुड़ी समस्या पूरी हो जाएंगी।
-गाय को आटा और गुड़ खिला देवे । 
-इसलिए बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते रहना चाहिए।
- हनुमान जी तस्वीर रखें और उनकी पूजा करें। हर मंगलवार को जाकर बजरंग बाण का पाठ करें। 

-हनुमान चालीसा का पाठ करें।  -
-सुबह स्नान करते समय पानी में थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर स्नान करते हैं। 
- इंटरव्यू देने के लिए निकलने से पहले एक चम्मच दही और चीनी मुंह में  रख लें।
- गणेश जी का कोई ऐसा चित्र या मूर्ति घर में रखें या लगाएं, जिसमें उनकी सूंड़ दाईं ओर मुड़ी हो। गणेश जी की आराधना करें।

- शनिवार को शनि देव की पूजा करके आगे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें।
ॐ शं शनैश्चराय नम:
सूर्य के उपाय 
-आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करे 3 बार सूर्य के सामने
- ॐ घृणी सूर्याय नमः  का कम से कम 108 बार जप कर ले
- गायत्री का जप कर ले
- घर की पूर्व दिशा से रौशनी  आयेगी तो अच्छा रहेगा ।
-घर में तुलसी का पौधा जरूर लगा दे.
-पिता की सेवा।
-शराब और मांसाहार न खिलाये
-शिवजी ,पीपल के उपाय।

  नोट -योग्य ज्योतिषी के पास जाकर यह विश्लेषण करना बहुत ही फायदेमंद रहता है । 

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Thursday, October 16, 2014

कुंडली मे डॉक्टर बनने के योग : डॉक्टर के रूप में कैरियर : कामयाबी योग :Career as Doctor :Becoming a doctor :Astrology Simplified video



 
Astrologer Housi Lal Chourey
 कुंडली मे डॉक्टर बनने के योग : डॉक्टर के रूप में कैरियर : कामयाबी योग :Career as Doctor :Becoming a doctor :
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जातक की कुंडली  डॉक्टर बनने के योग  :
नीचे  बताई गये पॉइंट्स को कुंडली मे देख  कर विश्लेशण करना होता है। 
पंचमेश की बहुत महत्वपूर्ण है। बुद्धि, प्रसिद्धि, जीवन का स्तर, सफलता।
ग्रह :सूर्य, मंगल,गुरु शनि एवं राहु
सूर्य :स्वास्थ्य का कारक।
मंगल :भुजबल, उत्साह व कार्य शक्ति का कारक । 
गुरू :ज्ञान और सुख का कारक।
सूर्य, मंगल व गुरू : बली हों, 
शनि एवं राहु :टैक्निकल :

भाव : प्रथम , द्वितीय ,पंचम ,षष्ट ,दशम , एकादश,  तथा उनके स्वामिवो से सम्बध हो तो जातक डॉक्टर बनता है।
युति: चंद्र-शनि, मंगल-शनि, बुध-शनि
सूर्य-मंगल की युति : -डाक्टर, सर्जन ,शल्य चिकित्सक।
मंगल या केतु युति: शल्य चिकित्सक होता है।
शनि तथा सूर्य युति : दंत चिकित्सक बनाती है।  
शुक्र और सूर्य :डॉक्टर,  हार्ट अथवा न्यूरो सर्जन,स्त्री रोग विशेषज्ञ
राहु तथा केतु- सर्जन

सूर्य+मंगल +बुध -डाक्टर।
सूर्य+बुध+शुक्र-दांतों का डाक्टर ।
१० वे भाव में उच्च राशी का मंगल (१०)  

12 वें घर का उपचार, 
में बुद्धादित्य योग हो तो उसे प्रसिद्धि मिलेगी।.
दशम भाव में शनि तथा सूर्य की युति जातक को दंत चिकित्सक बनाती है

विश्लेशण :नवांश ,दशमांश कुंडली :
षड्बल:
कौन से ग्रह महादशा ,अंतर्दशा, प्रत्यंतर्दशा, सूक्ष्म एवं प्राण दशा चल रही है।
भाव को प्रभावित करने वाले ग्रहों की गोचर स्थिति भी देखना चाहिये।
ग्रह अपनी उच्च, अपनी या अपने मित्र ग्रह की राशि में हो.
कामयाबी योग :
कुंडली का पहला, दूसरा,  नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी  अपनी दशा और अंतर्दशा में  जातक को कामयाबी प्रदान करते है।  

बाधक  ग्रहो को  जानकर उनका उपाय करे।
दान ,मंत्रो का जाप,रत्न ,आदि के द्यारा।


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Tuesday, October 14, 2014

कुंडली से जाने :कैरियर कम्प्यूटर : आई. टी. :नौकरी,कामयाबी प्राप्ति का समय: Career in Computer :Astrology Simplified video,


 
Astrologer Housi Lal Chourey कुंडली से जाने :कैरियर कम्प्यूटर : आई. टी. :नौकरी,कामयाबी प्राप्ति का समय:
 Career in Computer:
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 कुंडली से हम  जान सकते है की हमारा कम्प्यूटर  मे कैरियर होगा या नहीं ?नीचे  बताई गये पॉइंट्स को कुंडली मे देख  कर विश्लेशण करना होता है। 
 कैरियर के निर्धारण : पंचमेश की बहुत महत्वपूर्ण है। बुद्धि, प्रसिद्धि, जीवन का स्तर, सफलता। कम्पयुटर के कारक
  भाव : दशम भाव (कर्म का भाव) ,
 सप्तम भाव :(दशम से दशम) ,
 षष्ठ भाव :(दशम से नवम यानि कर्म का भाग्य भाव) .
 ग्रह :दशमेश ग्रह  दशम भाव पर प्रभाव डालने वाले ग्रह ,
बलवान ग्रह (षड्बली) .
कारकों : कम्पयुटर के कारक ग्रह - शुक्र, मंगल, राहूकेतु , शनि .
 बुध :बुद्धि व गणना का कारक ग्रह .
गुरु :ज्ञानकारक ग्रह .
 कैरियर के लिए 2, 6, 10 भाव का आपस में संबंध
 कैरियर निर्धारण : जन्म कुंडली, चंद्र कुंडली, सूर्य कुंडली में जो अधिक बली हो ।
शुक्र ग्रह :कम्प्यूटर का कारक.
 मंगल :बिजली .
 बुध :को शिल्प, तर्क, गणना .
 शनि : तकनीकी काम व यन्त्रों .
 युति  :सूर्य मंगल  इंजिनियर .
शिक्षाभाव: दूसरे, चौथे ,पांचवे , नवम भाव:
दशमी भाव :आजीविका और कैरियर  ,
लग्न कुंडली के दशमस्थ ग्रह या दशमेश तथा दशमांश कुंडली (डी-10) के दशमस्थ ग्रह या दशमेश  
षष्ठ भाव :सेवा तथा नौकरी
द्वितीय भाव :धन
 पंचम घर / पंचमेश से दशम व दशमेश का संबध
मंगल ,शनि  राहु/ केतु ,इंजिनियरों की कुण्डली में होता है.
 दशाएं : ,दशमेश /दशम भाव में बैठे ग्रहों .
 शिक्षा के कारक :गुरु, बुध, मंगल,
शुक्र व शनि दोनो यन्त्रों से जुडे ग्रह अगर ,शिक्षा भाव, दूसरे, चौथे ,पांचवे , नवम,  भाव: से संबध बनाये तो जातक आई.टी क्षेत्र में  सफलता प्राप्त करता है.
 किसी भी जन्म कुंडली में दशम भाव ही कर्म का भाव कहलाता है।
 नवम भाव भाग्य भाव है।
नवमांश व दशमांश
   कुंडली से जाने नौकरी प्राप्ति का समय  नियम:
 प्रथम, दूसरा भाव, छठे भाव,दशम भाव एवं एकादश भाव का संबंध  या इसके स्वामी से होगा तो  नौकरी के योग बनते  है ।
डी १० चार्ट मे भी दिखना है।
लग्न के स्वामी की दशा और अंतर्दशा में
नवमेश की दशा या अंतर्दशा में
षष्ठेश की दशा या, अंतर्दशा में
प्रथम,दूसरा , षष्ठम, नवम और दशम भावों में स्थित ग्रहों की दशा या अंतर्दशा में
दशमेश की दशा या अंतर्दशा में
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में
नौकरी मिलने के समय जिस ग्रह की दशा और अंतर्दशा चल रही है उसका संबंध किसी तरह दशम भाव या दशमेश से ।
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में भी नौकरी मिल सकती है।
राहु और केतु की दशा, या अंतर्दशा में :   गोचर: गुरु गोचर में दशम या दशमेश से नौकरी मिलने के समय केंद्र या त्रिकोण में ।गोचर : शनि और गुरु एक-दूसरे से केंद्र, या त्रिकोण में हों, तो नौकरी मिल सकती है,
कामयाबी योग :
कुंडली का पहला, दूसरा, चौथा, सातवा, नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी  अपनी दशा और अंतर्दशा में  जातक को कामयाबी प्रदान करते है।
 बाधक  ग्रहो को  जानकर उनका उपाय करे।
दान ,मंत्रो का जाप,रत्न ,आदि के द्यारा।
नौकरी मिलने के लिए उपाय --
- तांबे के लोटे से सुबह-सुबह सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए ।  
- हनुमान जी के दर्शन करें।
-पक्षियों को जो ,बाजरा   खिलाना चाहिए।    हो सके तो   सात प्रकार के अनाजों को एकसाथ मिलाकर पक्षियों को खिलाएं। गेहूं, ज्वार, मक्का, बाजरा, चावल, दालें आदि हो सकती हैं। सुबह-सुबह यह उपाय करें, जल्दी ही नौकरी से जुड़ी समस्या पूरी हो जाएंगी।
-गाय को आटा और गुड़ खिला देवे ।
-इसलिए बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते रहना चाहिए।
- हनुमान जी तस्वीर रखें और उनकी पूजा करें। हर मंगलवार को जाकर बजरंग बाण का पाठ करें।
-हनुमान चालीसा का पाठ करें।  -
-सुबह स्नान करते समय पानी में थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर स्नान करते हैं।
- इंटरव्यू देने के लिए निकलने से पहले एक चम्मच दही और चीनी मुंह में  रख लें।
- गणेश जी का कोई ऐसा चित्र या मूर्ति घर में रखें या लगाएं, जिसमें उनकी सूंड़ दाईं ओर मुड़ी हो। गणेश जी की आराधना करें।
- शनिवार को शनि देव की पूजा करके आगे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें।
ॐ शं शनैश्चराय नम:सूर्य के उपाय
-आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करे 3 बार सूर्य के सामने
- ॐ घृणी सूर्याय नमः  का कम से कम 108 बार जप कर ले
- गायत्री का जप कर ले
- घर की पूर्व दिशा से रौशनी  आयेगी तो अच्छा रहेगा ।
-घर में तुलसी का पौधा जरूर लगा दे.
-पिता की सेवा।
-शराब और मांसाहार न खिलाये
-शिवजी ,पीपल के उपाय।
  नोट -ज्योतिषि को अपनी कुंडली दिखाइए।


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Friday, September 19, 2014

आदतों को सुधारो और ग्रहो को सुधारो :Correct habits that improve the planet :Astrology Simplified video,

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Housi Lal Choureyआदतों को सुधारो तो  ग्रह सुधरते  है ,जाने  कैसे  ?
Correct habits that improve the planet :
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आदतों को सुधारो तो   ग्रह भी  सुधरते  है ,जाने  कैसे  ?
आदत बदलने  से ही ग्रह भी आपकी कुंडली के  ठीक होते  है।  
मंदिर को साफ़ करते है तो बृहस्पति बहुत अच्छे फल देगा ।
अपनी झूठी थाली या बर्तन उसी जगह पर छोड़ना -सफलता मे कमी।    झूठे बर्तन को उठाकर  जगह पर रखते  है या साफ़ कर लेते है तो चन्द्रमा , शनि  ग्रह ठीक  होते है ।
देर रात जागने से  चन्द्रमा अच्छे फल नहीं  देता
है।
कोई भी बाहर से आये  उसे स्वच्छ पानी जरुर पिलाए। राहू  
ग्रह ठीक   होता  है । राहू का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता । 
थूकने की आदत  - यश,सम्मान मे कमी ।
 रसोई को गन्दा रखते हैं तो आपको मंगल ग्रह  से दिक्क्तें आएँगी। रसोई हमेशा साफ़ सुथरी रखेंगै तो   मंगल ग्रह ठीक  होता ।
  घर में सुबह उठकर पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध,सूर्य,शुक्र और चन्द्रमा मजबूत करते हैं    । 
जो लोग पैर घसीट कर चलते से ,शराब और सिगरेट पीने से  राहु खराब  होता है । 
बाथरूम में कपडे इधर उधर फेंकते  है ,  बाथरूम में पानी बिखराकर आ जाते है तो चन्द्रमा  अच्छे फल नहीं देता  है। 
बाहर से आकर अपने चप्पल , जूते , मोज़े इधर उधर फेंक देते है ,उन्हें  शत्रु परेशान करते है ।
राहू और शनि ठीक  फल  नही देते  है  जब बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा , सलवटे होंगी ,चादर कही , तकिया कही  है। 
 चीख कर बोलेंने से शनि  खराब खराब होता हैैं।  
बुजूर्गों के आशीर्वाद से घर में सुख समृद्धि बढती  है.
घर में बच्चे और वृद्ध खुश रहते है उस घर में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
आप  ने  जाना की खराब आदतों के  कारण  से  आप अपने   ग्रहों को खराब कर  रहे  है। अपने  आप  को  बदलकर देखिए,और ग्रहों के खराब प्रभाव ठीक कीजये। 

Thursday, September 18, 2014

कुंडली से जाने तलाक के कारण :Divorce in astrology:Astrology Simplified video,

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Housi Lal Chourey कुंडली से जाने तलाक के कारण  :
Divorce in astrology:
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कुंडली से जाने तलाक के कारण  
जन्म पत्रिका का सप्तम स्थान होता है।

पांच हानिकर या seprative ग्रह हैं. 
 सूर्य / , मंगल ग्रह / , शनि और राहु व केतु seprative ग्रह हैं.
 सातवें भाव विवाह का प्रतिनिधित्व करते हैं. \.
शनि के 7 वें
भाव में होनेपर  :  देर से शादी करना  चाहिऐ लगभग  ,28 या 30 की  उम्र मे .
मंगल ग्रह.

पति-पत्नी के बीच विवाद होते हैं।
 सातवें भाव में मंगल ग्रह साथी के साथ बहुत कुछ तर्क करता है: सातवें वीं घर में सूर्य.:  अहंकार और अभिमान का ग्रह है,
 
सातवें भाव में दुर्बल वीनस,
 सातवें भाव में राहु :
राहु सप्तम होने पर जीवन साथी व्यभिचारी होता है।
सातवें घर में केतु शादी में कोई दिलचस्पी नहीं रखता  है.
6 या 12 वें घर में बैठा 7th घर  लार्ड
तलाक का कारण बनाता है। 
ऊपर बताये गये ग्रहों ,सातवें भाव में तलाक के कारण बनते  है।.
 तलाक होने की संभावना बढ़ जाती है।
डी -9 चार्ट की  भी जाँच करनी चाहिए.
 शनि और राहु तलाक के लिए सबसे खतरनाक ग्रह हैं. शनि / राहु 7th घर के साथ कोई संबंध है  तलाक देता है. 
 भाव 2, 4, 5 ,7 , 8 , 11  और 12  वैवाहिक मामलों के  हैं. इन भावो कमजोर हो जाने पर और उनके लॉर्ड्स malefics साथ जुड़ने या aspected होने  पर तब विवाहित जीवन में परेशानी आती है.
 7  भाव के साथ जुड़े होने पर , तो शनि महा दशा 19 साल और राहु महा दशा 18 साल के लिए रहती  है . इनकी महा दशा / अंतर दशा के दौरान संघर्ष झगड़े, विवाद, गलतफहमी होती  है। 
 शादी से पहले संबंध और बाद के वैवाहिक संबंधों, शारीरिक हमला, बहुत आम हैं और कहीं भी  होता है.
benefic ग्रहों बृहस्पति, चंद्रमा, बुध और शुक्र दशा / अंतर दशा के दौरान तलाक नहीं होता है।
 सूर्य / , मंगल ग्रह / , शनि और राहु व केतु seprative ग्रह की दशा या अंतर दशा आती है जब तलाक  होता है.
उपाय -
ईस्ट देव की आराधना करे।
सप्तम स्थान में स्थित क्रूर ग्रह के उपाय करे ।
मंगल   ग्रह  का दान करें। 
 गुरुवार का व्रत करें।
 माता पार्वती का पूजन करें।
सोमवार का व्रत करें।
प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। 

पीपल की परिक्रमा करें।