Tuesday, October 21, 2014

कुंडली से जाने : इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर तकनीकी क्षेत्र में कैरियर :नौकरी प्राप्ति का समय: कामयाबी योग :Engineering education to achieve career:When to get Jobs,: video


Astrologer Housi Lal Chourey  कुंडली से जाने : इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर तकनीकी क्षेत्र में कैरियर :नौकरी प्राप्ति का समय: कामयाबी योग :Engineering education to achieve career:When to get Jobs,
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 कुंडली से जाने  इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर तकनीकी क्षेत्र में कैरियर :नौकरी प्राप्ति का समय: कामयाबी योग
 नीचे  बताई गये पॉइंट्स को कुंडली मे देख  कर विश्लेशण करना होता है। 
इंजीनियरिंग की शिक्षा: शिक्षा और कैरियर के निर्धारण : 
इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर तकनीकी क्षेत्र में कैरियर बनने संबंधी शिक्षा: लग्न, लग्नेश, चतुर्थ, चतुर्थेश, पंचम, पंचमेश, दशम भाव या दशमेश का बुध ,शुक्र, मंगल, शनि राहू केतु से संबंध होता है। ,
पंचमेश की बहुत महत्वपूर्ण है। बुद्धि, प्रसिद्धि, जीवन का स्तर, सफलता।
उच्च शिक्षा : बुध या शुभ ग्रह लग्न, चौथे, पांचवें, सातवें, भाग्य ,दशम भावमे  बलवान-स्वग्रही उच्च का होना चाहिए।
 चंद्र, गुरु एवं शुक्र ग्रह का शुभ योग हो तो वह व्यक्ति सफलता प्राप्त कर आर्थिक स्थिति मजबूत करता है।

बुध: तर्क शक्ति, ज्ञान एवं निर्णय शक्ति का कारक है.
इंजीनियर के कारक:
मंगल  :भूमिपुत्र मंगल खनिज, रंग, रसायन, फार्मेसी, धातु, सीमेंट तथा फैक्टरियों का कारक ग्रह है .
शनि :मशीनरी, लोाहा, पत्थर, मजदूरी, प्रधान धंधा, हार्डवेयर, लकड़ी, शस्त्र, ईंट, इलेक्ट्रिकल कार्योंं का कारक है।
पहले,चौथे, पांचवे, दसवें भाव एवं इनके स्वामियों का सम्बन्ध मंगल, शनि, राहु, केतु से  होना चाहिए।
 भाव : दशम भाव (कर्म का भाव) ,
 सप्तम भाव :(दशम से दशम) ,
 षष्ठ भाव :(दशम से नवम यानि कर्म का भाग्य भाव) .
 ग्रह :दशमेश ग्रह  दशम भाव पर प्रभाव डालने वाले ग्रह ,
बलवान ग्रह (षड्बली) .
 
इंजीनियर के कारक ग्रह - शुक्र, मंगल, राहू केतु , शनि .

बुध :बुद्धि व गणना का कारक ग्रह .
गुरु :ज्ञानकारक ग्रह .
 कैरियर के लिए 2, 6, 10 भाव का आपस में संबंध
 कैरियर निर्धारण : जन्म कुंडली, चंद्र कुंडली, सूर्य कुंडली में जो अधिक बली हो ।

 मंगल, सूर्य :को बलवान होना इंजीनियर,
मंगल बुध : इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का कारक
 मंगल :बिजली .

 बुध :को शिल्प, तर्क, गणना .
 शनि : तकनीकी काम व यन्त्रों .
 युति  :सूर्य मंगल  इंजिनियर .
शिक्षाभाव: दूसरे, चौथे ,पांचवे , नवम भाव:
दशमी भाव :आजीविका और कैरियर  ,
लग्न कुंडली के दशमस्थ ग्रह या दशमेश तथा दशमांश कुंडली (डी-10) के दशमस्थ ग्रह या दशमेश  
षष्ठ भाव :सेवा तथा नौकरी
द्वितीय भाव :धन
पंचम घर / पंचमेश से दशम व दशमेश का संबध
मंगल ,शनि  राहु/ केतु ,इंजिनियरों की कुण्डली में होता है.
दशाएं : ,दशमेश /दशम भाव में बैठे ग्रहों .

 शिक्षा के कारक :गुरु, बुध, मंगल,
 किसी भी जन्म कुंडली में दशम भाव ही कर्म का भाव कहलाता है।
 नवम भाव भाग्य भाव है।
नवमांश व दशमांश 

 कुंडली से जाने नौकरी प्राप्ति का समय  नियम:
 प्रथम, दूसरा भाव, छठे भाव,दशम भाव एवं एकादश भाव का संबंध  या इसके स्वामी से होगा तो  नौकरी के योग बनते  है ।
डी १० चार्ट मे भी दिखना है।
लग्न के स्वामी की दशा और अंतर्दशा में
नवमेश की दशा या अंतर्दशा में
षष्ठेश की दशा या, अंतर्दशा में
प्रथम,दूसरा , षष्ठम, नवम और दशम भावों में स्थित ग्रहों की दशा या अंतर्दशा में
दशमेश की दशा या अंतर्दशा में
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में
नौकरी मिलने के समय जिस ग्रह की दशा और अंतर्दशा चल रही है उसका संबंध किसी तरह दशम भाव या दशमेश से ।
द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में भी नौकरी मिल सकती है।
राहु और केतु की दशा, या अंतर्दशा में :  

 गोचर: गुरु गोचर में दशम या दशमेश से नौकरी मिलने के समय केंद्र या त्रिकोण में ।
गोचर : शनि और गुरु एक-दूसरे से केंद्र, या त्रिकोण में हों, तो नौकरी मिल सकती है,
कामयाबी योग :
कुंडली का पहला, दूसरा, चौथा, सातवा, नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी  अपनी दशा और अंतर्दशा में  जातक को कामयाबी प्रदान करते है। 


 1.सूर्य: लोक प्रशासन ,राजनीति ,अर्थशास्त्र,गणित ,मौसम ,वनस्पति विज्ञान ,पशु चिकित्सा ,दवा संबंधी युद्ध संबंधी विषय आदि.
2.चंद्र : गृह विज्ञान,साहित्य,पशुपालन ,मनोविज्ञान ,नर्सिंग ,जल संबंधी,साज़ सज्जा ,शहद , छोटे बच्चों की देखभाल संबंधी विषय भोज्य पदार्थ संबंधी विषय ,व वस्त्र आदि से संबंधित.
3.मंगल : खनिज संबंधी ,ऑटो मोबाइल ,सेना ,पुलिस ,धातु ,पेट्रोलियम ,शारीरिक शिक्षा,व्यायाम ,फिजियोथेरेपी,धरती के अंदर होने वाले कार्यों से संबंधी आदि विषय.
4.बुध : बैंकिंग ,संचार , त्वचा संबंधी ,पत्र्कारिक्ता,शिक्षा,साँस संबंधी विषय,अर्थशास्त्र, कर्मकांड,पैसे संबंधी ,टैक्स आदि से संबंधित विषय.
5.गुरु: शिक्षा ,ज्योतिष ,क़ानून ,चिकित्सा ,व्याकरण,देखभाल ,प्रबंधन आदि संबंधित ..
6. शुक्र : फ़िल्म ,शरीर कि सुंदरता संबंधी ,नाटक ,एनिमेशन ,वस्त्र ,भोजन संबंधी वा लगभग वो सभी विषय जो चंद्र से भी जुड़े होते हैं .
7.शनि :इतिहास ,कृषि ,लेब टेस्ट आदि से संबंधी ,चमड़ा ,सिविल ,कंप्यूटर,अस्पताल ,एरोनाटिकल,विधि शाश्त्र ,कैंसर ,प्रबंधन ,मनोविज्ञान ,बाज़ार से संबंधी विषय.
8.राहू: पुरातत्व ,विषाणु संबंधी, दूरसंचार , इंजीनियरिंग ,जादू टोना ,रहश्य्मय विषय ,बॉयोटेक्नोलॉजी ,तकनीकी काम,रेडियोलॉजी  आदि. 


. नौकरी के कारक ग्रहों का संबंध सूर्य व चन्द्र से हो तो जातक सरकारी नौकरी पाता है।
सूर्य. चंद्रमा व बृहस्पति सरकारी नौकरी मै उच्च पदाधिकारी बनाता है।
द्वितीय, षष्ठ एवं दशम्‌ भाव को अर्थ-त्रिकोण सूर्य की प्रधानता होने पर  सरकारी
नौकरी करता है
 केंद्र में गुरु स्थित होने पर
सरकारी नौकरी मे  उच्च पदाधिकारी का पद प्राप्त होता है।
नौकरी  के अन्य योग :
शनि कुण्डली में बली हो  तो व्यक्ति नौकरी करता है.
मंगल
कुण्डली में बली हो तो पुलिस, खुफिया विभाग अथवा सेना में उच्च पद होने की संभावना होती है।
गुरु
कुण्डली में बली हो तो  जातक को अच्छा वकील, जज, धार्मिक प्रवक्ता , ख्याति प्राप्त ज्योतिर्विद बनाता है।
बुध
कुण्डली में बली हो तो  व्यापारी, लेखक, एकाउन्टेंट, लेखन एवं प्रकाशन, में  ।
शुक्र
कुण्डली में बली हो तो  फिल्मी कलाकार,  गायक, सौंदर्य संबंधी ।
राहु से आयात व्यापार एवं केतु से निर्यात व्यापार ।  


  फलादेश कैसे करते  है ----
  - जो ग्रह अपनी उच्च, अपनी या अपने मित्र ग्रह की राशि में हो - शुभ फलदायक होगा।
- इसके विपरीत नीच राशि में या अपने शत्रु की राशि में ग्रह अशुभफल दायक होगा।
- जो ग्रह अपनी राशि पर दृष्टि डालता है, वह शुभ फल देता है।
-त्रिकोण के स्वा‍मी सदा शुभ फल देते हैं।
- क्रूर भावों (3, 6, 11) के स्वामी सदा अशुभ फल देते हैं।
- दुष्ट स्थानों (6, 8, 12) में ग्रह अशुभ फल देते हैं।
- शुभ ग्रह केन्द्र (1, 4, 7, 10) में शुभफल देते हैं, पाप ग्रह केन्द्र में अशुभ फल देते हैं।
-बुध, राहु और केतु जिस ग्रह के साथ होते हैं, वैसा ही फल देते हैं।
- सूर्य के निकट ग्रह अस्त हो जाते हैं और अशुभ फल देते हैं। 

बाधा  के योग :
भाव   दूषित  हो तो  अशुभ फल देते है। 
ग्रह निर्बल पाप ग्रह अस्त ,शत्रु –नीच राशि  में लग्न से 6,8 12 वें भाव में स्थित हों , तो काम मे बाधा आती है |
लग्नेश बलों में कमजोर, पीड़ित, नीच, अस्त, पाप मध्य, 6,8,12वें भाव में ,तो  भी  बाधा आती है .
 

कुण्डली मे D-१०   (चार्ट ) का  भी आंकलन    करना  चाहिये
बाधक  ग्रहो को  जानकर उनका उपाय करे। 
दान ,मंत्रो का जाप,रत्न ,आदि के द्यारा।
नौकरी मिलने के लिए उपाय -- 

- तांबे के लोटे से सुबह-सुबह सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए ।   
- हनुमान जी के दर्शन करें।
-पक्षियों को जो ,बाजरा   खिलाना चाहिए।    हो सके तो   सात प्रकार के अनाजों को एकसाथ मिलाकर पक्षियों को खिलाएं। गेहूं, ज्वार, मक्का, बाजरा, चावल, दालें आदि हो सकती हैं। सुबह-सुबह यह उपाय करें, जल्दी ही नौकरी से जुड़ी समस्या पूरी हो जाएंगी।
-गाय को आटा और गुड़ खिला देवे । 
-इसलिए बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते रहना चाहिए।
- हनुमान जी तस्वीर रखें और उनकी पूजा करें। हर मंगलवार को जाकर बजरंग बाण का पाठ करें। 

-हनुमान चालीसा का पाठ करें।  -
-सुबह स्नान करते समय पानी में थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर स्नान करते हैं। 
- इंटरव्यू देने के लिए निकलने से पहले एक चम्मच दही और चीनी मुंह में  रख लें।
- गणेश जी का कोई ऐसा चित्र या मूर्ति घर में रखें या लगाएं, जिसमें उनकी सूंड़ दाईं ओर मुड़ी हो। गणेश जी की आराधना करें।

- शनिवार को शनि देव की पूजा करके आगे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें।
ॐ शं शनैश्चराय नम:
सूर्य के उपाय 
-आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करे 3 बार सूर्य के सामने
- ॐ घृणी सूर्याय नमः  का कम से कम 108 बार जप कर ले
- गायत्री का जप कर ले
- घर की पूर्व दिशा से रौशनी  आयेगी तो अच्छा रहेगा ।
-घर में तुलसी का पौधा जरूर लगा दे.
-पिता की सेवा।
-शराब और मांसाहार न खिलाये
-शिवजी ,पीपल के उपाय।

  नोट -योग्य ज्योतिषी के पास जाकर यह विश्लेषण करना बहुत ही फायदेमंद रहता है । 

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